तीन तलाक: रेशमा, अफसाना व शगुफ्ता की जिंदगी में मची थी खलबली, अब जागी उम्मीद
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देशभर में तीन तलाक के मुद्दे पर छिड़ी बहस के बीच मंगलवार को अदालत का फैसला आ गया है। जब सुप्रीम कोर्ट विशेष बैंच ने तीन तलाक पर पाबंदी लगाते हुए छह माह में केन्द्र सरकार से इस पर कानून बनाने के लिए कहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तीन तलाक का दर्द झेल चुकी मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय राहत पहुंचाने वाला हो सकता है। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में जाने से मुस्लिम समाज की महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान में भी पिछले कुछ माह में तीन तलाक के कई मामले सामने आए। मामले चौंका देने वाले थे, कोई अपनी पत्नी को फोन पर तलाक दे रहा है, तो कोई कागज पर लिखकर। यही नहीं, एक मामले में तो सड़क पर ही तलाक दे दिया गया।
महिला आयोग में पहुंचकर रोती हैं पीड़ित महिलाएं
कानूनविदों का कहना है कि कानून नहीं होने के कारण पीड़ित महिलाओं की गुहार केवल अपने समाज के मुखियाओं, रिश्तेदारों तक ही पहुंच पाती है। जब कानून बन जाएगा, तो बात अधिकारों की हो जाएगी और न्याय भी मिलेगा।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि तीन तलाक के मुददे को लेकर मुस्लिम समाज की महिलाओं ने महिला आयोग का दरवाजा भी खटखटाया है, लेकिन हमारे पास भी समझाइश के अलावा कोई चारा नहीं रहता।
उन्होंने बताया कि हम पति और पत्नी को अकेले बैठाकर समझाते हैं और परिवार को टूटने से बचाने का प्रयास करते हैं। लेकिन जब मामला काफी उलझा हुआ रहता है, तो पति और पत्नी को परिजनों के साथ बैठाकर भी समझाने का प्रयास करते हैं।
कुछ एेसे-एेसे चौंका देने वाले मामले आए सामने
वहीं दो मामले पिछले दिनों जोधपुर में आए थे। जहां अफसाना बानो और शगुफ्ता को उनके पतियों ने पत्र भेजकर तलाक दे दिया था। जबकि तीन तलाक से सबंधित एक मामला बाड़मेर का भी था। जहां पति की दूसरी शादी का विरोध करने पर पीड़िता को तलाक दे दिया गया।
गौरतलब है कि यह सभी मामले पुलिस की चौखट तक भी पहुंचे। लेकिन उपर्युक्त काननू नहीं होने के कारण सही कार्रवाई किसी भी मामले में नहीं हो सकी है। वहीं राज्य महिला आयोग या अन्य कानूनी संस्थाओं के पास अभी तक केवल ऐसे मामलों में समझाइश ही एक जरिया रहा है।
लेकिन मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मुस्लिम महिलाओं विशेषकर तीन तलाक का दंश झेल रही महिलाओं में उम्मीद की किरण जगी है।