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JLF 2018: लादेन के बाद आतंकी संगठन अलकायदा को खत्म मानना बड़ी भूल है- पीटर बर्गिन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 28 Jan 2018 02:05 PM IST
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पीटर बर्गिन और लादेन
- फोटो : अमर उजाला
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के एक सेशन में कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए।
पीटर बर्गिन ने कहा कि बिन लादेन के मरने के बाद अल-कायदा खत्म मानने वाले लोग बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। अल-कायदा बहुत लंबा चलने वाला आतंकी संगठन है। यह आईएस से लंबा चलेगा। इतना जरूर है कि अब 9-11 जैसा खतरा अमेरिका पर नहीं मंडरा रहा है। लादेन के मरने के बाद यह खतरा हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि बिन लादेन जैसे आतंकी को मारना भले ही आसान हो लेकिन आइडियोलॉजी को मारना बहुत मुश्किल होता है। लादेन को तो मार दिया लेकिन उसकी आइडियोलॉजी अब भी जिंदा है, उसके प्रशंसक जिंदा है। वे बढ़ भी रहे हैं।
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पीटर बर्गिन ने कहा कि बिन लादेन के मरने के बाद अल-कायदा खत्म मानने वाले लोग बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। अल-कायदा बहुत लंबा चलने वाला आतंकी संगठन है। यह आईएस से लंबा चलेगा। इतना जरूर है कि अब 9-11 जैसा खतरा अमेरिका पर नहीं मंडरा रहा है। लादेन के मरने के बाद यह खतरा हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि बिन लादेन जैसे आतंकी को मारना भले ही आसान हो लेकिन आइडियोलॉजी को मारना बहुत मुश्किल होता है। लादेन को तो मार दिया लेकिन उसकी आइडियोलॉजी अब भी जिंदा है, उसके प्रशंसक जिंदा है। वे बढ़ भी रहे हैं।
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ओसामा को पाकिस्तानी लोगों से मिलता था पूरा सपोर्ट
ओसामा बिन लादेन
उन्होने कहा कि बिन लादेन पाकिस्तान में 9 साल तक रहा क्योंकि उसे पाकिस्तानी के लोगों का पूरा सपोर्ट था। वह सत्रह साल का था तब से पाकिस्तान को बेहतर तरीके से जानता था। इसी लिए उसने पाकिस्तान को अपना सुरक्षित ठिकाना चुना।
अब तक ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि उसे पाकिस्तान की सरकार का संरक्षण प्राप्त था या नहीं हां मगर इतना जरुर है कि ये सबूत मिले हैं कि उसे वहां की आर्मी या इंटेलीजेंस का सपोर्ट था। हांलाकि यह कहा जाता है कि पाकिस्तानी लोग उसके प्रशंसक थे इसलिए उसकों वहां उनका सपोर्ट भी बखूबी मिलता था। पाकिस्तान आईएस जैसे संगठन को सपोर्ट नहीं कर रहा है बल्कि ये संगठन खुद उसके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
अब तक ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि उसे पाकिस्तान की सरकार का संरक्षण प्राप्त था या नहीं हां मगर इतना जरुर है कि ये सबूत मिले हैं कि उसे वहां की आर्मी या इंटेलीजेंस का सपोर्ट था। हांलाकि यह कहा जाता है कि पाकिस्तानी लोग उसके प्रशंसक थे इसलिए उसकों वहां उनका सपोर्ट भी बखूबी मिलता था। पाकिस्तान आईएस जैसे संगठन को सपोर्ट नहीं कर रहा है बल्कि ये संगठन खुद उसके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।