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जाट आंदोलन: वार्ता शुरू, मान-मनौव्वल में जुटे अधिकारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 23 Jun 2017 06:53 PM IST
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जाट आरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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भरतपुर में चल रहे जाट आंदोलन पर सरकार की ओर से बातचीत की पेशकश के बाद जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकारी नुमाइंदों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। यह पहले दौर की बातचीत है।
संघर्ष समिति के संरक्षक व कांग्रेस विधायक विश्वेन्द्र सिंह और उनकी टीम के साथ बात करने के लिए भरतपुर सम्भागीय आयुक्त सुबीर कुमार, जिला कलेक्टर एन.के. गुप्ता व अन्य अधिकारी मौजूद हैं। माना जा रहा है कि जाट आरक्षण को लेकर जाटों द्वारा की जा रही मांगों पर किसी तरह की सहमति बन सकती है। गौरतलब है कि राजस्थान में जाटों के आरक्षण को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने बृहस्पतिवार को ही अपनी रिपोर्ट सीएम वसुंधरा राजे को सौंप दी है, उसके बाद भी जाटों का आंदोलन जारी है।
विश्वेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार को यह बात लिखित रूप में स्पष्ट करनी होगी कि जो रिपोर्ट पेश की गई है, उस पर वह किस तरह का फैसला लेने जा रही है। सरकार के लिखित जवाब के बाद ही कुछ हो सकेगा। शुक्रवार को पूरे दिन भरतपुर व उसके आस पास के इलाके में आंदोलन जारी रहा। बसें व ट्रेंने भी रोकी गई, डायवर्ट की गई। कुछ जगहों पर आगजनी भी दी गई।
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उधर माना जा रहा है कि एक दिन पहले ही सौंपी गई अन्य पिछड़ा वर्ग की रिपोर्ट पर सरकार की कैबिनेट फैसला ले सकती है। इससे सीधे तौर पर रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों को स्वीकार किया जा सकता है।
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संघर्ष समिति के संरक्षक व कांग्रेस विधायक विश्वेन्द्र सिंह और उनकी टीम के साथ बात करने के लिए भरतपुर सम्भागीय आयुक्त सुबीर कुमार, जिला कलेक्टर एन.के. गुप्ता व अन्य अधिकारी मौजूद हैं। माना जा रहा है कि जाट आरक्षण को लेकर जाटों द्वारा की जा रही मांगों पर किसी तरह की सहमति बन सकती है। गौरतलब है कि राजस्थान में जाटों के आरक्षण को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने बृहस्पतिवार को ही अपनी रिपोर्ट सीएम वसुंधरा राजे को सौंप दी है, उसके बाद भी जाटों का आंदोलन जारी है।
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विश्वेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार को यह बात लिखित रूप में स्पष्ट करनी होगी कि जो रिपोर्ट पेश की गई है, उस पर वह किस तरह का फैसला लेने जा रही है। सरकार के लिखित जवाब के बाद ही कुछ हो सकेगा। शुक्रवार को पूरे दिन भरतपुर व उसके आस पास के इलाके में आंदोलन जारी रहा। बसें व ट्रेंने भी रोकी गई, डायवर्ट की गई। कुछ जगहों पर आगजनी भी दी गई।
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उधर माना जा रहा है कि एक दिन पहले ही सौंपी गई अन्य पिछड़ा वर्ग की रिपोर्ट पर सरकार की कैबिनेट फैसला ले सकती है। इससे सीधे तौर पर रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों को स्वीकार किया जा सकता है।