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55 साल से भटक रहे 59 घुमक्कड़ परिवारों को मिलेगा पक्का आशियाना

Sat, 29 Jul 2017 07:40 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 29 Jul 2017 07:40 PM IST
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houses for nomadic tribes in banswara allotted by government
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‘‘साब, हम 55 साल से भटक रहे हैं, 1962 से हमारे बाप-दादा कॉमर्शियल काॅलोनी में रहते थे, उसके बाद 1999 में हमें वहां से बेदखल किया तो हम शारदा काॅलोनी में बसे और वहां से 2006 में हमें हटाया तो हम यहां आकर बसे। हर किसी ने हमें दुत्कारा परंतु अब प्रधानमंत्री आवास योजना में हमें सरकार द्वारा निःशुल्क जमीन देकर मकान बनाने के लिए राशि दी जा रही है। हमारे बच्चों को स्थाई ठौर मिल जाएगा।’’
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यह कहना है उदयपुर संभाग के जनजाति बहुल क्षेत्र बांसवाड़ा शहर से सटी ग्राम पंचायत लोधा की कच्ची बस्ती में रह रहे चिकलीगर लोहार जाति के 59 घुमक्कड़ परिवारों का। घुमक्कड़ जीवनयापन करने वाले इन परिवारों को हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली है। परंतु इनके खाते में भूमि का अभाव होने के कारण इनको मकान बनाने में तकलीफ आ रही थी। ग्राम पंचायत लोधा ने इन घुमक्कड़ परिवारों की तकलीफ को समझा और इनको निःशुल्क भूमि आवंटन के लिए जिला कलक्टर भगवतीप्रसाद के पास प्रस्ताव भेजा।
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फिलहाल एक नहर के किनारे टीन और घासफूंस के छप्परों में रह रहे इन परिवारों के बारे में जानकर कलक्टर ने भी संवेदनशीलता दिखाई। कलक्टर के निर्देश पर इन 59 परिवारों के लिए ग्राम पंचायत में जानामेड़ी गांव में 6.03 बीघा जमीन आवंटित कर दी गई।
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अब नगर परिषद से आवास निर्माण के लिए एनओसी प्राप्त होते ही ग्राम प्रशासन द्वारा इन परिवारों को पट्टों का आवंटन कर दिया जाएगा। इन परिवारों को जब प्रशासन द्वारा जमीन आवंटित करने के बारे में जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं था और वे बार-बार सरकार और ग्राम पंचायत प्रशासन का आभार करते हुए नहीं थक रहे थे। 
 

इतने साल किया संघर्ष अब नहीं खुशी का कोई ठिकाना

houses for nomadic tribes in banswara allotted by government
पक्के मकान मिलने की खुशी में खिले चेहरे - फोटो : amar ujala
इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ग्राम पंचायत लोधा के सचिव अशोक सुथार का कहना है कि इन 59 परिवारों के लिए उन्होंने काॅलोनी निर्माण का मास्टरप्लान भी तैयार कर लिया है। इन सभी परिवारों के आवास एक जैसे बनेंगे और इस काॅलोनी का नाम पीएम आवास काॅलोनी रखने का निर्णय ग्राम पंचायत द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्राम पंचायत को 215 आवास का लक्ष्य दिया गया था और इस वर्ष अब तक 32 आवास स्वीकृत हो चुके हैं।

घुमक्कड़ परिवारों को भूमि आवंटन से आवास भी अब जल्द बन जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सरपंच ममता बामनिया, समाजसेवी प्रकाश बामनिया, विजयलाल बामनिया और घुमक्कड़ परिवारों में से एक श्यामा पटवा ने जी-जान लगाई। उम्मीद है कि 6 महीने में इन सभी को स्थाई ठिकाना मिल जाएगा।

खुशी से फूला नहीं समा रहा श्यामा-

वर्तमान में मयूर मिल के पीछे नहर किनारे और हाईटेंशन लाइन के नीचे रह रहे चिकलीगर लोहार जाति के घुमक्कड़ परिवारों में एक लाभार्थी श्यामा पटवा का कहना है कि बरसों से वे मौत के साये में रह रहे थे, किसी ने उन पर ध्यान नहीं दिया। अब सरकार की नजरें पड़ी हैं।

व्यवस्थित काॅलोनी में पक्के मकान मिल जाते हैं तो उनका जीवन आसान हो जाएगा। इसी काॅलोनी की वृद्धा राधा कौर का कहना है कि एक चिड़िया भी होती है तो वह घौंसला बनाकर रहती है, आखिर हम तो इंसान हैं। गंदगी भरे घरों में रहने से बच्चों में बीमारियां हो रही थी। अब सरकार की मेहर हुई है।

समाजसेवी प्रकाश बामनिया का कहना है कि एक बच्चे की हाईटेंशन लाइन का करंट लगने से मौत हो गई थी तो दो बच्चे नहर में भी बह गए थे। यह जमीन भी पुलिस प्रशासन के नाम आवंटित है ऐसे में यहां से भी इनको कभी भी हटाए जाने का खतरा था। अब चिंता दूर हो गई है।
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