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संपन्न परिवारों के कैदियों से पैसा मांग रहे हैं जेल अधिकारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 08 Aug 2017 08:13 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल सुधार को लेकर लंबित याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए अजमेर जेल का उदाहरण देते हुए कहा कि संपन्न परिवार के कैदियों से जेल अधिकारी पैसा मांग रहे हैं। अदालत ने कहा कि मोबाइल के जरिए जेल के अंदर से गैंग संचालित हो रहे हैं। ऐसे में जेलों में पर्याप्त मोबाइल जेमर लगाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही अदालत ने जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट्स से पूछा है कि उनकी ओर से जेलों का दौरा कब किया गया था।
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश वीएस सिराधना की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी बताने को कहा है कि नॉन ऑफिशियल विजीटर्स की नियुक्ति के लिए क्या किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जेल नियमों को जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाए। अदालत ने जोधपुर जेल में 4जी जेमर लगाने के निर्देश देते हुए 29 अगस्त को रेडियो मैपिंग रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 16 बिंदुओं पर पालना रिपोर्ट पेश की गई, लेकिन रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। वहीं भारत इलेक्ट्रोनिक्स लि. की ओर से कहा गया कि केन्द्रीय कारागृहों की रेडियो मैपिंग की जा चुकी है। जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस जेल में किस स्तर का मोबाइल जेमर लगाने की आवश्यकता है। इसी दौरान एक एनजीओ की ओर से कहा गया कि जेल के हालात जानने के लिए नॉन ऑफिशियल विजीटर्स नियुक्त करने के कोई मापदंड नहीं हैं। इसके चलते काम न करने वाले लोग नियुक्त हो जाते हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए मामले की सुनवाई 29 अगस्त को तय की है।
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न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश वीएस सिराधना की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी बताने को कहा है कि नॉन ऑफिशियल विजीटर्स की नियुक्ति के लिए क्या किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जेल नियमों को जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाए। अदालत ने जोधपुर जेल में 4जी जेमर लगाने के निर्देश देते हुए 29 अगस्त को रेडियो मैपिंग रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 16 बिंदुओं पर पालना रिपोर्ट पेश की गई, लेकिन रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। वहीं भारत इलेक्ट्रोनिक्स लि. की ओर से कहा गया कि केन्द्रीय कारागृहों की रेडियो मैपिंग की जा चुकी है। जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस जेल में किस स्तर का मोबाइल जेमर लगाने की आवश्यकता है। इसी दौरान एक एनजीओ की ओर से कहा गया कि जेल के हालात जानने के लिए नॉन ऑफिशियल विजीटर्स नियुक्त करने के कोई मापदंड नहीं हैं। इसके चलते काम न करने वाले लोग नियुक्त हो जाते हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए मामले की सुनवाई 29 अगस्त को तय की है।
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