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फर्जी मार्कशीट मामला : हाईकोर्ट ने दिए सरपंच को पद से हटाने के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 03 Jun 2017 07:25 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी अंक तालिका के आधार पर निर्वाचित सीकर के नीम का थाना की ग्राम पंचायत मावण्डा की सरंपच को तत्काल पद से हटने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश आलोक शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सहीराम की ओर से दायर परमादेश (को-वारंटो) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि जनवरी 2015 में हुए सरपंच चुनाव में ओबीसी वर्ग की सरिता देवी मावण्डा ग्राम पंचायत की सरपंच बनी थी। चुनाव में राज्य सरकार ने सरपंच पद के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा उत्तीर्ण रखी थी। याचिका में कहा गया कि झुंझनूं में जन्मी सरपंच सरिता देवी ने अपनी आठवीं की अंकतालिका फुलेरा, जयपुर की एक अस्तिवहीन स्कूल की पेश की। जबकि वह कभी फुलेरा में नहीं रही। इसके अलावा शिक्षा विभाग की रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि जिस स्कूल की अंकतालिका पेश की गई है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं था। वहीं, सरपंच व राज्य सरकार की ओर से यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया गया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रकरण में सिर्फ चुनाव याचिका ही दायर हो सकती है। चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार भी केवल चुनाव में पराजित उम्मीदवार को ही होता है।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि यदि कोई सरपंच पद की योग्यता ही नहीं रखता तो उसे पद पर बैठे रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने सरंपच सरिता देवी को तत्काल सरपंच पद से हटने के आदेश दिए हैं।
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याचिका में कहा गया कि जनवरी 2015 में हुए सरपंच चुनाव में ओबीसी वर्ग की सरिता देवी मावण्डा ग्राम पंचायत की सरपंच बनी थी। चुनाव में राज्य सरकार ने सरपंच पद के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा उत्तीर्ण रखी थी। याचिका में कहा गया कि झुंझनूं में जन्मी सरपंच सरिता देवी ने अपनी आठवीं की अंकतालिका फुलेरा, जयपुर की एक अस्तिवहीन स्कूल की पेश की। जबकि वह कभी फुलेरा में नहीं रही। इसके अलावा शिक्षा विभाग की रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि जिस स्कूल की अंकतालिका पेश की गई है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं था। वहीं, सरपंच व राज्य सरकार की ओर से यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया गया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रकरण में सिर्फ चुनाव याचिका ही दायर हो सकती है। चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार भी केवल चुनाव में पराजित उम्मीदवार को ही होता है।
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जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि यदि कोई सरपंच पद की योग्यता ही नहीं रखता तो उसे पद पर बैठे रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने सरंपच सरिता देवी को तत्काल सरपंच पद से हटने के आदेश दिए हैं।
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