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RTH Bill: विरोध का नया रूप, 'मेरे पापा डॉक्टर हैं, लुटेरे या कसाई नहीं' स्लोगन लिखकर सड़क पर उतरे बच्चे
Sun, 02 Apr 2023 03:33 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sun, 02 Apr 2023 03:33 PM IST
सार
आम जनता को जोड़ने, अपनी मांग पहुंचाने और राइट टू हेल्थ के नुकसान बताने के लिए अब निजी डॉक्टर्स के परिवार और बच्चे भी हड़ताल के लिए सड़कों पर उतर गए हैं।
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राइट टू हेल्थ बिल का विरोध
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
डॉक्टर्स और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। 15 दिन से निरंतर कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरे निजी डॉक्टर्स न तो झुकने को तैयार हैं और न ही किसी समझौते के लिए तैयार हैं। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश के चिकित्सा मंत्री भी अपनी बात से टस से मस होते नहीं नजर आते हैं।
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15 दिन से चल रहे निजी डॉक्टर्स के कार्य बहिष्कार
प्रदेश भर के डॉक्टर आम जनता और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए रोज अनोखे प्रयोग कर रहे हैं। अबकी बार डॉक्टर्स ने मशाल रैली निकाली, जिसमें सैकड़ों गाड़ियों के साथ एक जुलूस निकाला गया और आम जनता को राइट टू हेल्थ के नुकसान बताने का प्रयास किया गया।
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रविवार को निजी डॉक्टर्स ने अपने परिवार को भी इस कार्य बहिष्कार में सम्मलित करते हुए अपने बच्चों के हाथो में तख्तियां थामा दीं हैं, जिन पर लिखा है मेरे पापा डॉक्टर हैं लुटेरे नहीं और कसाई नहीं। सभी डॉक्टर्स के बच्चे हाथों में अपने डॉक्टर माता-पिता के समर्थन की तख्तियां लेकर सड़क पर एक रैली निकाल रहे हैं।
राइट टू हेल्थ बिल का विरोध
- फोटो : Amar Ujala Digital
लोगों की सहानुभूति चाहते हैं डॉक्टर
दरअसल निजी डॉक्टर्स और आमजन के बीच एक अनकही खाई बन चुकी है। निजी डॉक्टर्स और अस्पतालों को लुटेरे और कसाई की उपमा मिलती जा रही है। निजी डॉक्टर्स को इस हड़ताल को सफल और इसमें जीत के लिए आम जनता की सहानुभूति की बहुत आवश्यकता है, जो अभी तक निजी डॉक्टर्स को नहीं मिली है।
दरअसल निजी डॉक्टर्स और आमजन के बीच एक अनकही खाई बन चुकी है। निजी डॉक्टर्स और अस्पतालों को लुटेरे और कसाई की उपमा मिलती जा रही है। निजी डॉक्टर्स को इस हड़ताल को सफल और इसमें जीत के लिए आम जनता की सहानुभूति की बहुत आवश्यकता है, जो अभी तक निजी डॉक्टर्स को नहीं मिली है।