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दो सप्ताह में करो श्रमिकों को भुगतान, वरना हाजिर हो अधिकारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 17 Aug 2017 08:36 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भी जनता जल योजना से जुडे श्रमिकों को भुगतान नहीं करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह दो सप्ताह में श्रमिकों को भुगतान करे। ऐसा नहीं करने पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी पेश नहीं हुए तो उन्हें जेल भेजा जा सकता है। अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएचईडी की योजना को पंचायत को हस्तान्तरित करना समझ से परे हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश प्रदेश जनता जल योजना श्रमिक यूनियन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता विनायक जोशी ने अदालत को बताया कि उच्चतम न्यायालय 1 फरवरी 2013 से यूनियन के श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने का आदेश दे चुका है। वहीं उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर हाईकोर्ट भी गत 21 नवंबर को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने का कह चुका है, लेकिन आज तक भुगतान नहीं किया गया।
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वहीं राज्य सरकार की ओर से एएजी अनुराग शर्मा ने कहा कि कई श्रमिक ऐसे हैं, जो दिन में केवल आधा घंटा काम करते हैं। ऐसे में उन्हें भुगतान नहीं किया जा सकता। इस पर अदालत ने कहा कि आमजन का पैसा यदि किसी गरीब को मिलता है तो सरकार को रोड़ा नहीं बनना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने दो सप्ताह में भुगतान नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी पेश नहीं हुए तो उन्हें जेल भेजा जा सकता है। अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएचईडी की योजना को पंचायत को हस्तान्तरित करना समझ से परे हैं।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश प्रदेश जनता जल योजना श्रमिक यूनियन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता विनायक जोशी ने अदालत को बताया कि उच्चतम न्यायालय 1 फरवरी 2013 से यूनियन के श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने का आदेश दे चुका है। वहीं उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर हाईकोर्ट भी गत 21 नवंबर को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने का कह चुका है, लेकिन आज तक भुगतान नहीं किया गया।
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वहीं राज्य सरकार की ओर से एएजी अनुराग शर्मा ने कहा कि कई श्रमिक ऐसे हैं, जो दिन में केवल आधा घंटा काम करते हैं। ऐसे में उन्हें भुगतान नहीं किया जा सकता। इस पर अदालत ने कहा कि आमजन का पैसा यदि किसी गरीब को मिलता है तो सरकार को रोड़ा नहीं बनना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने दो सप्ताह में भुगतान नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।