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24 घंटे खुला रखा जाए जेल का हॉस्पिटल, जैमर कारगर क्यों नहीं-हाईकोर्ट

Tue, 07 Nov 2017 07:59 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Tue, 07 Nov 2017 07:59 PM IST
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 The High Court said: Keep the hospital open for 24 hours, why not work jammer in jail
jail - फोटो : Demo pic
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि जेल में स्थित अस्पताल को चौबीस घंटे खुला रखा जाए। इसके अलावा अदालत ने मरीज कैदियों को भर्ती करने के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुशंषा को जरूरी किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश जेल में कैदियों की मौत के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर दर्ज स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। 
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वहीं न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश केसी शर्मा की खंडपीठ ने कैदियों के कल्याण के मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए गृह सचिव से पूछा है कि जेलों में लगाए जैमर अब तक कारगर क्यों नहीं हुए हैं और भविष्य में लगाने जाने वो 55 जैमर से क्या असर पडेगा।
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जेल में कैदियों की मौत के मामले में सुनवाई के दौरान एक कैदी की ओर से अधिवक्ता कैलाश नाथ भट्ट ने अदालत को बताया कि गंभीर बीमारी के बावजूद प्रार्थी को अस्पताल से जबरन बैरक में भेज दिया है। वहीं कैदियों के कल्याण के मामले में न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि उनकी ओर से गत रविवार को जयपुर जेल का दौरा किया गया था। जहां कई अनियमितताएं मिली।
 

13 जेलों को छोड़कर सभी में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा आरंभ

 The High Court said: Keep the hospital open for 24 hours, why not work jammer in jail
Jailbreak - फोटो : Demo pic
कैदियों के लिए न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था थी और न ही जेमर आदि काम कर रहे थे। न्यायमित्र ने यह भी बताया की रोटी बनाने की मशीन भी घटिया किस्म की खरीदी गई। इसके अलावा शाम छह बजे बाद अस्पताल में चिकित्सक नहीं रहता है। ऐसे में बीमार कैदी को कम्पांडर या दूसरे कैदी ही संभालते हैं।

वहीं राज्य सरकार की ओर से पालना रिपोर्ट पेश कर कहा गया कि 13 जेलों को छोड़कर सभी में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा आरंभ हो गई है। इसके अलावा जेलों में 55 जेमर और लगाए जाने हैं। वहीं नॉन ऑफिशियल विजिटर्स की नियुक्ति सात दिनों में कर दी जाएगी। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के संबंध  में अपना स्पष्टीकरण भी देने को कहा है। कैदियों की मौत के मामले में अदालत 11 दिसंबर को सुनवाई करेगी। वहीं कैदियों के कल्याण के मामले में 4 दिसंबर को सुनवाई होगी। 
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