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पैरोल से फरार होने की सजा अलग से भुगतनी होगी बिट्टी मोहंती को
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 18 May 2017 08:37 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जर्मन छात्रा से दुष्कर्म करने के मामले में सजा भुगतने के दौरान पैरोल लेकर फरार होने के मामले में कहा है कि अभियुक्त को मिली तीन माह की सजा उसे अलग से भुगतनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने बित्रिहोत्रा उर्फ बिट्टी मोहंती की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश बिट्टी मोहंती की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
मामले के अनुसार अलवर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने जर्मन पर्यटक से दुष्कर्म के आरोप में बिट्टी मोहंती को 12 अप्रैल 2006 में सात साल की सजा और दस हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया था। वहीं 20 नवंबर 2006 को मोहंती को मां की बीमारी के आधार पर पन्द्रह दिन की पैरोल मिली थी। जिसके चलते 4 दिसंबर 2006 को अभियुक्त को वापस जेल में जाना थाए लेकिन वह फरार हो गया।
वहीं पुनरू गिरफ्तार होने के बाद निचली अदालत ने 16 अक्टूबर 2014 को आरोपी को तीन माह की सजा सुनाते हुए इसे दुष्कर्म में मिली सजा समाप्त होने के बाद तीन माह जेल में रखने के आदेश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि दोनों सजाओं को एक साथ चलाई जाए।
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जिसे एकलपीठ ने खारिज करते हुए कहा कि अभियुक्त को दोनों सजाएं अलग.अलग भुगतनी होगी।
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मामले के अनुसार अलवर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने जर्मन पर्यटक से दुष्कर्म के आरोप में बिट्टी मोहंती को 12 अप्रैल 2006 में सात साल की सजा और दस हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया था। वहीं 20 नवंबर 2006 को मोहंती को मां की बीमारी के आधार पर पन्द्रह दिन की पैरोल मिली थी। जिसके चलते 4 दिसंबर 2006 को अभियुक्त को वापस जेल में जाना थाए लेकिन वह फरार हो गया।
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वहीं पुनरू गिरफ्तार होने के बाद निचली अदालत ने 16 अक्टूबर 2014 को आरोपी को तीन माह की सजा सुनाते हुए इसे दुष्कर्म में मिली सजा समाप्त होने के बाद तीन माह जेल में रखने के आदेश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि दोनों सजाओं को एक साथ चलाई जाए।
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जिसे एकलपीठ ने खारिज करते हुए कहा कि अभियुक्त को दोनों सजाएं अलग.अलग भुगतनी होगी।