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क्या गृह मंत्रालय से हुई चूक! धर्मगुरू बन गृहमंत्री से मिला एक खादिम

Thu, 16 Nov 2017 03:16 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Thu, 16 Nov 2017 03:16 PM IST
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A mistake are seeing in a meeting which chaired by rajnath singh
राजनाथ सिंह ने ली बैठक
अध्योध्या और राम मंदिर का मुद्दा इन दिनों फिर से गर्माया हुआ है। जिसकी प्रमुख वजह है श्री श्री रविशंकर का यूपी दौरा। इसी बीच केन्द्रीय गृह मंत्रालय में मंगलवार को हुर्इ धर्म गुरुओं की सहमति बैठक में एक चूक भी सामने आई है।
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एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार गृहमंत्री राजनाथ सिंह से अजमेर की ख्वाजा साहब की दरगाह के एक खादिम ने धर्मगुरू बनकर मुलाकात की है। इस बैठक में अजमेर की ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम सैयद फखर काजमी ने भी बतौर धर्मगुरू हिस्सा लिया। जब खादिम काजमी की जानकारी जुटाई गई तो सामने आया कि न तो वह दरगाह कमेटी में किसी पद पर हैं और न ही उन्हें धर्मगुरू का दर्जा दिया गया है।
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम करवाने और राम मंदिर विवाद का सबकी सहमति से हल करवाने के लिए धर्म गुरूओं की मदद लेने की बात कही थी। इसको लेकर कमेटी का भी गठन किया गया। श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में सभी धर्मगुरूओं के साथ बैठक की जा रही है।
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खादिम होता है सेवक या खिदमतगार, लगाए आरोप भी

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जन्नती दरवाजा
इस संबंध ख्वाजा साहब की दरगाह की कमेटी के सीईओ और नाजिम रिटायर्ड आईएएस आई.बी. पीरजादा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ख्वाजा साहब की दरगाह में कुल पांच हजार खादिम है। उन्हीं की तरह सैयद फखर काजमी भी हैं। इनके पास किसी भी तरह का कमेटी में भी पद नहीं है। उन्होंने काजमी के धर्मगुरू होने से भी इंकार किया है।

वहीं जब दरगाह के सज्जादानशीन सैयद जेनुअल आबेदीन अली खान के बेटे नसीरूद्दीन चिश्ती ने बताया कि खादिम केवल मात्र खिदमतगार या सेवक होता है। खादिम को धर्मगुरू का दर्जा नहीं दिया जा सकता। दरगाह की कमेटी में भी सज्जादानशीन की पदवी दीवान साहब को दी गई है।

उनका आरोप है कि खादिम फखर काजमी ने उनके पिता की तरह की पोशाक में जाकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस संबंध में उनके पिता या वह क्यों कार्रवाई करे। इस संबंध में तो स्वयं गृह मंत्रालय को कार्रवाई करनी चाहिए।
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