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हथेली जितने बच्चे की सर्जरी कर डॉक्टरों ने बचाई जान

Tue, 16 May 2017 07:33 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Tue, 16 May 2017 07:33 PM IST
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15-day child's heart surgery
ऑपरेशन थिएटर में चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
एक हथेली जितना छोटा बच्चा, उम्र 15 दिन, दिल की दोनों मुख्य धमनियां जुड़ी हुई। बच्चे की जान को खतरा था, ऐसे में चिकित्सकों ने कुछ ऐसा किया जिससे न केवल बच्चे की जान बची बल्कि एक इतिहास भी बन गया। दावा है कि महज 470 ग्राम वजन के नवजात की यह सफल सर्जरी पूरी दुनिया में चिकित्सा इतिहास का प्रथम मामला है।
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जानकारी के मुताबिक उदयपुर निवासी एसपी जैन व उनकी पत्नी के वर्षों बाद आईवीएफ प्रक्रिया द्वारा संतान हुई थी। बच्चा समय पूर्व सात महीने में ही पैदा हो गया। नवजात को पैदा होते ही सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उसके फेफड़ें सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। उसे उदयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां कार्डियोलोजिस्ट डॉ. रमेश पटेल ने एंजियोग्राफी की तो पता चला कि नवजात के हृदय से निकलने वाली दो मुख्य धमनियां आपस में जुड़ी हुई है। यह धमनियां जब बच्चा मां के गर्भ में होता है तब तक जुड़ी रहती है जिससे बच्चा जीवित रह सके परन्तु जन्म के बाद यह धमनियां प्राकृतिक रुप से बंद हो जाती है। यदि किसी बच्चे की धमनियां प्राकृतिक रुप से बंद नहीं हो पाती है तो उसका उपचार दवाईयों द्वारा भी संभव है परन्तु इस मामले में दवाईयों से भी उपचार नहीं हो पा रहा था।
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नवजात के फेफड़ों एवं हृदय में सूजन आ गई थी और फेफड़ों में आवश्यकता से अधिक रक्त प्रवाह हो रहा था जिससे वह सांस नहीं ले पा रहा था। उसे वेंटीलेटर द्वारा सांस दी जा रही थी। धमनियों के जुड़े होने से हृदय पर अधिक दबाव पड़ रहा था जिससे नवजात की कभी भी मृत्यु हो सकती थी। समय से पूर्व जन्मे इस बच्चे के कम शारीरिक विकास के कारण सांस की नली डाली गई और बच्चे को जीवित रखने के लिए ग्लूकोज को सेंट्रल लाईन ड्रिप द्वारा दिया गया। नियमित रुप से मस्तिष्क एवं हृदय की सोनोग्राफी भी की गई जिससे आंतरिक रक्तस्त्राव तो नहीं हो रहा है, इसे सुनिश्चित किया जा सके।
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अंत में ऑपरेशन ही विकल्प रह गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक्सपर्ट कार्डियक सर्जन डॉ. संजय गांधी बुलाने का निर्णय लिया गया। इस इस टीम ने ऑपरेशन में आधे घंटे का समय लगाया। सर्जरी के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कोटरी मशीन जिसके द्वारा ऊतकों को खोला गया ताकि रक्तस्त्राव न हो। इन धमनियों के जुड़ाव से फेफड़ों में आवश्यकता से अधिक रक्त प्रवाह हो रहा था जिसको क्लिप व सर्जिकल टांकों  से बंद किया गया। इससे रक्त प्रवाह कम एवं सामान्य हो पाया।
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