MP Politics: चुनावी होमवर्क में जुटी भाजपा, सांसद-विधायक तैयार कर रहे धार्मिक स्थलों और आयोजनों की रिपोर्ट
MP Politics: भाजपा विधानसभा चुनाव 2023 के साथ-साथ लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भी मध्यप्रदेश में काम कर रही है। पार्टी का फोकस लगातार कमजोर और हारे हुए क्षेत्रों में है। इसलिए हर बूथों के तहत कितने धार्मिक स्थल, जातियां और सामाजिक नेताओं का राजनीतिक प्रभाव है, यह जानकारी जुटाई जा रही है...
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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भले ही एक साल का वक्त है, लेकिन सत्ताधारी भाजपा अभी से तैयारियों में जुट गई है। पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनाए फॉर्मूले को प्रयोग में ला रही है। इसी के सहारे भाजपा ने यूपी फतह किया था। यूपी की तर्ज पर ही अब एमपी भाजपा बूथ स्तर पर मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारा-चर्च से जुड़ी हर बारीक सूचना अपने डाटा बैंक में एकत्र कर रही है। इतना ही नहीं, धार्मिक आयोजन के कर्ताधर्ता, किस राजनीतिक दल को सपोर्ट करते हैं, उनके आंकड़े भी तैयार किए जा रहे हैं। पार्टी ने इसकी जिम्मेदारी सांसद और विधायकों को दी है। यह जानकारी सरल एप के जरिए जुटाई जा रही है।
दरअसल, भाजपा विधानसभा चुनाव 2023 के साथ-साथ लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भी मध्यप्रदेश में काम कर रही है। पार्टी का फोकस लगातार कमजोर और हारे हुए क्षेत्रों में है। इसलिए हर बूथों के तहत कितने धार्मिक स्थल, जातियां और सामाजिक नेताओं का राजनीतिक प्रभाव है, यह जानकारी जुटाई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश भाजपा ने कुछ ही दिन पहले ही विधायक और सांसदों को सरल एप की ट्रेनिंग दे दी गई है।
मंदिर, मस्जिद सभी की जानकारी करानी होगी अपडेट
इस एप में विधायकों और सांसदों को उनके विधानसभा और संसदीय क्षेत्र के कमजोर बूथ की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही भाजपा विधायकों और सांसदों को उनके इलाके के मंदिर और मस्जिदों की जानकारी भी अपडेट करनी होगी। इतना ही नहीं उनके विधानसभा क्षेत्र में होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजनों की जानकारी भी विधायक और सांसदों को एप के जरिए देनी होगी। दरअसल, भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने के लिए सरल एप बनाया है। इस एप में सभी विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्र के 10 ऐसे बूथ की जानकारी देनी है, जो कमजोर हैं या पिछले विधानसभा चुनाव में हार गए थे।
भाजपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि धार्मिक स्थलों की जानकारी जुटाने के बाद उनके संचालकों और उनसे जुड़े प्रभावशाली पदाधिकारियों को पार्टी से जोड़ा जाएगा। जिन धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों में ज्यादा आस्था है, वहां भाजपा बड़ा आयोजन करेगी। इसी तरह जातिगत वोटर्स को साधने के लिए सामाजिक संगठनों में पैठ बनाई जाएगी। उन्हें पार्टी के आयोजन में महत्व दिया जाएगा। सभी वर्गों के धार्मिक आयोजन में पार्टी के नेता शामिल होंगे।
हारी हुई 100 सीटों पर विशेष फोकस
भाजपा को 2018 के विधानसभा चुनाव में 107 सीटें मिली थीं, जिससे पार्टी बहुमत से दूर रह गई थी। ऐसे में पार्टी ने हारी हुई 100 सीटों पर विशेष फोकस करने का प्लान बनाया है। पार्टी ने दिग्गज नेताओं को इन सीटों पर तैनात करने का प्लान बनाया है। ताकि हर एक सीट पर बूथ मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके और 2023 में इन सीटों पर भाजपा की वापसी हो।
सांसद-विधायकों और जिला अध्यक्ष की तैनाती
भाजपा ने प्रत्येक सीट पर चुनाव होने तक सांसद-विधायकों और जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी तय कर दी है। पार्टी ने सभी नेताओं को इन सीटों को जीतने के लिए माइक्रो प्लानिंग बनाने की बात कही है। जबकि संगठन की निगरानी में इन नेताओं के इन सीटों पर लगातार दौरे होते रहेंगे, जिसका पूरा मैनेजमेंट संगठन की निगरानी में होगा। राज्यसभा सांसदों, प्रदेश के केंद्रीय मंत्री और प्रदेश पदाधिकारियों को भी इन सीटों पर जाना पड़ेगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार के मंत्री भी इन सीटों पर विशेष फोकस रखेंगे।
आदिवासी सीटों पर विशेष नजर
भाजपा को पिछले चुनाव में आदिवासी बहुल सीटों सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में पार्टी ने धार, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों की हर एक विधानसभा सीट पर विशेष तैयारी की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा अगले सप्ताह से आदिवासी इलाकों का दौरा करेंगे। इन क्षेत्रों में पार्टी नेता-कार्यकर्ताओं की बैठक होगी। जहां बदलाव की जरुरत होगी वहां बदलाव भी किए जाएंगे।