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Mock Drill: देशभर में मॉक ड्रिल यानी पाकिस्तान को साफ-साफ शब्दों में चेतावनी, इस बार तैयारी 1971 जैसी

Tue, 06 May 2025 11:36 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 06 May 2025 11:36 PM IST
सार

Mock Drill: विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात का सामना करना या न करना पाकिस्तान के हाथ में है। भारत ने आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ा रखी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रुख साफ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान नहीं संभला तो इस बार की कार्रवाई में उसके दो-तीन टुकड़े हो सकते हैं।

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Mock drill across the country means a clear warning to Pakistan, this time the preparation is like 1971
मॉक ड्रिल (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान जो राग अलाप रहा है, उसमें उसे कोई सफलता नहीं मिल रही। इधर भारत ने मनोवैज्ञानिक दबाव को तेज कर दिया है। सात और आठ मई को राजस्थान में पाकिस्तान से लगती दक्षिणी सीमा पर भारतीय वायुसेना बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रही है। इसका नोटिस जारी हो चुका है। यह सात मई को रात 9.30 बजे से आठ मई को तड़के तीन बजे तक चलेगा। एसके शर्मा कहते हैं कि यह कोई ड्रिल नहीं, बल्कि युद्ध की तैयारी का संदेश है। केंद्रीय गृह मंत्रालय कई राज्यों के संपर्क में है। इतना ही नहीं, देश के सभी राजनीतिक दल आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई में देश के साथ एक सुर में खड़े हैं। भारत के कूटनीति और सामरिक जानकार कहते हैं कि यह पाकिस्तान को साफ-साफ चेतावनी है। 
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'पाकिस्तान को भारत की भाषा समझनी चाहिए'
पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अभी कुछ बिगड़ा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय शक्तियां भी नहीं चाहतीं कि एक और युद्ध भड़के, लेकिन पाकिस्तान को खुद को विनाश से बचाना है तो उसे आतंकवाद के विरुद्ध ठोस तरीके से सामने आना होगा। भारत ने कड़ा रुख अपनाकर साफ कर दिया है कि अब पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सेना से अवकाश प्राप्त मेजर जनरल सिन्हा कहते हैं कि सीमा पर जिस तरीके से तैयारी चल रही है, पाकिस्तान को वह भाषा अब समझ लेनी चाहिए। दोनों पूर्व सैन्य अफसरों का कहना है कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने और परमाणु हथियार की धमकी देकर नाजायज लाभ लेने की पाकिस्तान की दोनों रणनीतियां असरदार नहीं हो पा रही हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है दबाव
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जानसन ने भारत को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार देश है और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई को उनका पूर्ण समर्थन है। जानसन ने तो यहां तक कहा कि अमेरिका इसके लिए भारत को हर संसाधन मुहैया कराएगा। पाकिस्तान को दूसरा झटका संयुक्त राष्ट्र में लगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में बैठक हुई और इसमें आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की अच्छी खासी किरकिरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पहलगाम आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका के बारे में भी पूछा गया। 

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी पहलगाम में आतंकी हमले की भर्त्सना की और पाकिस्तान को चेताया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत के साथ खड़े होने का खुला समर्थन दिया है।

पाकिस्तान अब भी बाज नहीं आ रहा
22 अप्रैल को बायसरन घाटी पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान लगातार मनोवैज्ञानिक खेल खेल रहा है। वह कश्मीर को भारत-पाक के बीच विवाद की जड़ और अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश से बाज नहीं आ रहा है। इसके साथ-साथ वह पहलगाम में आतंकी हमले की जांच में सहयोग करने और इसमें अपना हाथ होने से साफ इनकार कर रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के हैकर्स लगातार भारतीय रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं, तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल, विदेश मंत्रालय समेत अन्य संवेदनशील विभागों की वेब साइट पर हमला बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं। 


आईटी एक्सपर्ट राजेश चौधरी बताते हैं कि पाकिस्तान में राफेल लड़ाकू विमान को ट्रैक करने, फ्रांस द्वारा भारत को सोर्स कोड न देने, अमेरिका से नौसेना के लिए लिए गए पी8-आई विमानों को ट्रेक करने का प्रोपैगैंडा भी खूब चल रहा है। सिख सैनिकों को लेकर भी पाकिस्तान में काफी झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। वहां भारत के आंतरिक हालात को लेकर भी खूब झूठ फैलाया जाता है।  

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अब गेंद पाकिस्तान के पाले में
रक्षा और विदेश मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि बात बहुत आगे निकल चुकी है। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है। भारत ने साफ संकेत दिया है कि उसकी तैयारी 54 साल पहले 1971 के युद्ध वाले समय की है। इसका मकसद सीधे सीधे पाकिस्तान को संदेश देना है कि उसे आतंकवाद को संरक्षण या फिर भारतीय हमले को झेलने के लिए तैयार रहने का विकल्प चुनना होगा। पूर्व मेजर जनरल सिन्हा कहते हैं कि आर्डिनेंस फैक्ट्री में उत्पादन शुरू किया जा चुका है। अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। सर्जिकल स्ट्राइक और आपरेशन बालाकोट हो चुका है। इसलिए बात अब इसके आगे की है।

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