Civil Defence Districts: क्या होते हैं सिविल डिफेंस जिले, कैसे तय होती है कैटेगरी? जानें इनमें आपका जिला कहां
Civil Defence Districts: देश में 1971 के बाद सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल होने जा रही है। सरकार 7 मई 2025 को 300 से अधिक जिलों में मॉक ड्रिल, युद्ध जैसी परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के लिए आयोजित की जा रही है।
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सिविल डिफेंस जिलों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर तीन श्रेणी में बांटा गया है। पहली श्रेणी- सबसे संवेदनशील, दूसरी श्रेणी- संवेदनशीन और तीसरी श्रेणी- कम संवेदनशील है। देश के कुल 35 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में 259 सिविल डिफेंस जिले बनाए हैं। 256 सिविल डिफेंस जिलों को श्रेणी-एक, दो और तीन के बीच रखा गया है। हालांकि सात मई को होने वाली मॉक ड्रिल में 300 से अधिक जिलों को शामिल किया गया है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में 19 जिले सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट घोषित हैं। लेकिन राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में मॉक ड्रिल का आयोजन कराने का फैसला किया है।
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नागरिक सुरक्षा जिले और सामान्य प्रशासनिक जिले भिन्न होते हैं। किसी भौगोलिक क्षेत्र में छावनी, रिफाइनरी या परमाणु संयंत्र होने पर उसे आवश्यकता और तात्कालिकता के आधार पर 'नागरिक सुरक्षा जिले' के रूप में चिह्नित किया जाता है।
सीमाओं से निकटता: पंजाब, राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के जिलों को उनकी अग्रिम पंक्ति की स्थिति के कारण प्राथमिकता दी गई है।
महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे: रक्षा प्रतिष्ठानों, बिजली ग्रिड, रिफाइनरियों, बंदरगाहों और संचार नेटवर्क वाले क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया है।
शहरी घनत्व और जनसंख्या: बड़े शहरी केंद्रों के लक्ष्य बनने की अधिक संभावना होती है और उन्हें जटिल निकासी और जागरूकता योजना की आवश्यकता होती है।
तटीय संवेदनशीलता: तटीय जिलों, विशेष रूप से समुद्री खतरों के संपर्क में आने वाले जिलों की रणनीतिक भूमिका के लिए महत्व दिया जाता है।
- स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना और उन्हें संगठित करना।
- ब्लैकआउट और निकासी अभ्यास आयोजित करना।
- होम गार्ड, एनसीसी, एनएसएस, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय का प्रबंधन करना।
- सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना और आश्रय योजना पर काम करना।
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल क्या है?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल एक ऐसा अभ्यास होता है जिसमें वास्तविक परिस्थितियों की तरह ही हवाई हमले के सायरन बजाए जाते हैं, शहरों को ब्लैकआउट (बिजली गुल) किया जाता है, नागरिकों को सुरक्षित आश्रयों में ले जाया जाता है और इमरजेंसी टीमें अपनी भूमिका निभाती हैं। इसका मकसद नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना और आपदा के समय घबराहट, भ्रम और नुकसान को कम करना होता है।