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बिहार में नया बखेड़ा : राजद के निशाने पर 'संजय' या 'झा'? शराब के साथ गिरफ्तार नेहा की असल कहानी से समझें

सार

Bihar News : पिछले हफ्ते से एक लड़की का चेहरा बिहार में वायरल है। उसकी करतूत से ज्यादा उसके चेहरे और ग्लैमर को इंटरनेट पर भुनाया जा रहा है। इसमें राजद भी कूद गया। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि उसकी पूरी और वास्तविक कहानी सामने लायी जाए। 

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rjd post on soical media about family of neha jha samastipur sanjay jha fact check in liquor case bihar news
राजद ने लड़की का चेहरा सामने लाया, हम नैतिकता के कारण नहीं ला रहे। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

"संजय झा की बेटी नेहा झा भी शराब तस्करी में हाथ आजमा रही थी क्योंकि 

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- BJP JDU सरकार के कारण बिहार में अपार बेरोजगारी है!
- फेल शराबबंदी के कारण शराब तस्करी में बहुत पैसा है!
- Bihar Police कर्मियों और BJP JDU नेताओं की शराब माफिया से मिलीभगत के कारण पकड़े जाने का खतरा बहुत कम है!"


राष्ट्रीय जनता दल के सोशल मीडिया पेज से सोमवार को यह पोस्ट एक युवती की तस्वीर के साथ शेयर किया गया। हम उस युवती का चेहरा दिखाने के पक्ष में नहीं थे और न हैं। लेकिन, सोशल मीडिया पर आई इन पंक्तियों ने बिहार की राजनीति में गजब की हलचल मचा रखी है। राजद का यह पोस्ट एक तीर से दो शिकार कर रहा है। एक शिकार तो राजद के समर्थक समझ रहे हैं। पोस्ट पर आ रही प्रतिक्रिया बता रही कि राजद समर्थक इस मैसेज को जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के बारे में समझ रहे। इस खबर में इस बात का भी फैक्ट चेक है। साथ ही, दूसरे निशाने की पूरी कहानी भी। आइए समझते हैं।

सबसे पहले, यह जानिए कि संजय झा कौन वाले?
भारतीय जनता पार्टी के रास्ते जनता दल यूनाईटेड का सफर करने वाले संजय कुमार झा राज्यसभा सांसद हैं। मिथिलांचल के मधुबनी जिले के अररियासंग्राम के रहने वाले हैं राजनीतिज्ञ संजय कुमा झा। वह स्वाभाविक रूप से विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल के निशाने पर रहते हैं। लेकिन, राष्ट्रीय जनता दल के इस सोशल मीडिया पोस्ट को लगता है कि भ्रम फैलाने के लिए ही लिखा गया है। क्योंकि, जिस 'संजय झा' की बेटी 'नेहा झा' का चेहरा सामने रखकर भाजपा-जदयू सरकार पर हमला किया गया है, वह समस्तीपुर जिले के सिंघिया के रहने वाले हैं। मतलब साफ है कि 'संजय झा' लिखकर राजद समर्थकों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।
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तस्वीर में दिख रही युवती की पहचान बताना जरूरी
यह युवती जब ट्रेन में शराब के साथ पकड़ी गई तो पुलिस की लापरवाही के कारण इसकी तस्वीर हर सोशल मीडिया पर शेयर हो गई। तब पूरे तथ्य सामने नहीं आ रहे थे, लेकिन अब जब राजद ने पहचान उजागर कर दी है तो उसके बारे में एक-एक बात जानना 'फैक्ट चेक' के नजरिए से भी जरूरी है। राजधानी पटना से करीब 115 किलोमीटर दूर समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र से छह किलोमीटर दूर स्थित बारी गांव के वार्ड संख्या- 12 में रहने वाले संजय कुमार झा की बेटी है यह नेहा झा। इस परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक नाता नहीं है। यह खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। नेहा की मां आंगनबाड़ी सेविका हैं। इसी परिवार की सबसे छोटी बेटी नेहा झा नई दिल्ली-दरभंगा 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कोच (H1) में शराब भरे आठ ट्रॉली और दो बैकपैक के साथ पकड़ी गई थी। इन बैगों के अंदर 75 लीटर महंगे ब्रांड के विदेशी शराब की खेप थी, जिसे बिहार में खपाया जाना था। बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी के बाद से ऐसा खेल अक्सर सामने आता रहता है, बगैर एक दिन छोड़े हुए।
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सोशल मीडिया पर वायरल बातों में हकीकत कम
जिस दिन से नेहा की गिरफ्तारी हुई, सोशल मीडिया पर कहानियों की भरमार आ गई। उसके रूप-सौंदर्य की चर्चा के साथ उसके बारे में अश्लील टिप्पणियों की भी बाढ़ आ गई। हरेक ने अपने तरह से कहानियां भी बनाईं। दूसरी तरफ हकीकत कुछ ऐसी है कि नेता के पिता का नाम संजय कुमार झा है, लेकिन गांव में उन्हें पंकज के नाम से भी जानते हैं। नेहा के दादा शशिभूषण झा की पहचान स्थानीय स्तर पर राजनीति में रही है। वर्ष 2009 से 2014 तक वह पंचायत के पैक्स अध्यक्ष रह चुके हैं। परिवार के पास खेती योग्य करीब 10 बीघा भूमि है। मतलब, संपन्नता में वैसे कोई कमी नहीं है। 

'संजय' नहीं 'झा' को निशाने पर रखा है राजद ने
चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- "राजद ने 'संजय झा' लिखकर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को छायावादी तरीके से निशाना बनाया है, लेकिन चूंकि राजनीति की थोड़ी भी जानकारी रखने वाले जानते हैं कि यह वह संजय झा नहीं हैं तो राजद को भी इसका पता होगा ही। दरअसल, यहां संजय झा को नहीं बल्कि 'झा' को निशाने पर रखा गया है। मतलब, फॉरवर्ड जातियों को निशाने पर रखा गया है। लालू प्रसाद यादव 'भूरा बाल साफ करो' का नारा देकर आगे बढ़े थे और राजद उससे खुद को कभी अलग नहीं कर सका। 'झा' को निशाने पर रखा गया और बताने की कोशिश की गई कि भाजपा-जदयू के राज में सवर्ण जातियों के बच्चे भी शराब के कारोबार में लगे हैं।"

राजद का निशाना कई मायने में सही लगा है
राजद ने अगर सवर्ण जातियों के शराब के कारोबार में जाने की बात लिखी है तो कई मायनों में यह गलत नहीं। पुलिस रिकॉर्ड भी कहता है कि अपेक्षाकृत कम संख्या में सवर्ण और खासकर ब्राह्मण, भूमिहार या कायस्थों को शराब कारोबार में पकड़ा गया है। राजपूतों की संख्या है, लेकिन नई पीढ़ी के। लेकिन, नेहा झा के परिवार की कहानी में शराब की अहम भूमिका सामने आती है। करीब दो वर्ष पहले नेहा के पिता संजय कुमार झा को सिंघिया थाना की पुलिस ने शराब मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ट्रेन में उसके साथ गिरफ्तार ईशान कुमार  उसकी बड़ी बहन अंशु झा का देवर है। नेहा की दूसरी बहन निशु झा भी शराब मामले में दो बार जेल जा चुकी हैं। 30 नवंबर 2025 को दरभंगा उत्पाद विभाग ने निशु को 21 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्रा के अनुसार निशु के पति भी शराब के कारोबार में संलिप्त होने की वजह से जेल जा चुके हैं। यह अलग बात है कि पति-पत्नी में अनबन और तलाक तक बात पहुंचने की जानकारी है। नेहा की एक बहन और है, लेकिन उसका बैकग्राउंड साफ-सुथरा बताया जाता है।

परिवार में एक लड़का बिगड़ चुका
नेहा के दो छोटे भाई हैं। जानकारी के अनुसार एक भाई ने इंटरमीडिएट के बाद NEET की तैयारी की थी। परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद वह नशे की जद में आ गया। उसका मुजफ्फरपुर स्थित एक नशामुक्ति केंद्र में कई महीनों तक इलाज भी चला, लेकिन कोई सुधार नहीं हो सका। परिवार का सबसे छोटा बेटा अभी दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है। 


इस प्रकरण के पहले इतनी चर्चा नहीं, अब भविष्य खराब
नेहा झा की गिरफ्तारी के पहले भी परिवार में मां, एक बहन और एक भाई का रिकॉर्ड अच्छा था और अब भी है। लेकिन, इस प्रकरण ने सोशल मीडिया पर ग्लैमर के बहाने ऐसा कुछ किया कि परिवार के हर सदस्य का जीवन बदल गया लगता है। अब न तो नेहा के दादा के अच्छे कामों या मां के कामकाज की कोई चर्चा कर रहा है और न सामान्य जीवन जी रही एक बहन और एक सबसे छोटे भाई की जिंदगी ही सामान्य रह गई है। अब नेहा के परिवार की न केवल पूरी कुंडली खुल रही है, बल्कि सोशल मीडिया और उसे फॉलो करने वाले मीडियाकर्मी भी अपने हिसाब से कहानियां गढ़ रहे हैं। गांव में कुछ लोग इस परिवार की इस तरह छीछालेदर को लेकर भी गुस्से में हैं, हालांकि रोचक कहानियां वायरल होने से नहीं बच रही हैं।
(समस्तीपुर से इनपुट- पद्माकर सिंह)

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