लॉक-अनलॉक के बीच पांच महीने में कैसी हो गई हमारी और हमारे शहरों की जिंदगी
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विस्तार
हकीकत यह है कि इस समय विश्व के लगभग सभी देशों में कोरोना वायरस का असर है। कोरोना के खतरे के बीच विश्व के लगभग सभी देशों ने संपूर्ण लॉकडाउन या आंशिक लॉकडाउन भी अपनाया। लेकिन कोई असर नहीं दिखा।
अमर उजाला ने पिछले पांच महीनों में हुए बदलावों को जानने के लिए एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है। इसमें देश के प्रमुख राज्यों के शहरों में लॉकडाउन और अनलॉक के बाद की स्थिति को तस्वीरों के माध्यम से दिखाने की कोशिश की गई है। हमारी इस श्रृंखला में आप अपना सहयोग भी दे सकते हैं। यदि आपके पास भी अपने शहर के किसी ऐसे स्थान की तस्वीर है, जिससे मार्च 2020 के पहले और आज के अंतर को देखा जाए तो हमारे साथ शेयर करिए। ऐसी तस्वीरों को आप अमर उजाला के ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज पर शेयर कर सकते हैं।
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तस्वीरों में देखिए अमर उजाला की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:
- वो सुनहरे दिन लौटकर आएंगे, कोरोना को हराएंगे
दिल्ली को दिलवालों का शहर कहा जाता है। शहर के लोग वीकेंड्स पर परिवार के साथ मौज-मस्ती करने में भी खासा आगे रहते हैं। लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना ने इस शहर और यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी को काफी हद तक प्रभावित किया है। देश में कोविड-19 का प्रसार शुरू हो जाने के बाद 24 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ। पहले की सामान्य जिंदगी और इन पांच महीनों के दौरान और बाद के जीवन में खासा फर्क आ चुका है। जीवन के इसी अंतर और गहमागहमी के ठिकानों पर आए बदलाव को अपने कैमरे में कैद किया फोटो जर्नलिस्ट विवेक निगम, जी. पाल, हिमांशु सोनी और शुभम बंसल ने।
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- पांच महीने बाद अब ऐसा है नवाबों के शहर लखनऊ का नजारा
इन पांच महीनों में लखनऊ शहर के नजारे पूरी तरह बदल चुके हैं। जो शहर अपनी शाम और भोजन को लेकर पूरी दुनिया में जाना जाता था वहां अब शामें उतनी गुलजार नहीं होती हैं। लजीज पकवानों की जिन दुकानों पर भीड़ लगती थी वो अब बंद हैं। शहर के बाजार, पार्क, ऐतिहासिक स्थल, प्रसिद्ध मंदिर, युवाओं के अड्डे मरीन ड्राइव और गोमती रिवर फ्रंट पर अब न तो पहले की तरह चहल-पहल है और न ही मौज-मस्ती। कोरोना ने लोगों को घरों तक ही सीमित कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि वीकेंड को लगने वाला लॉकडाउन एक ब्रेक का काम करता है। जो कि सप्ताह के पांच दिन बढ़ने वाले व्यापार को अंतिम दो दिनों में रोक देती है।
- कोरोना काल में बदल गया गाजियाबाद, तस्वीरों में देखें सूनीं सड़कें, खाली मंदिर और बाजार
भले ही अब देश में क्रमवार अनलॉक किया जा रहा हो लेकिन बाजारों से लेकर मंदिरों, चौराहों से लेकर पार्कों तक की स्थिति अब भी वैसी नहीं हुई है जो पांच महीने पहले थी। अपनी इस फोटो स्टोरी के माध्यम से हमने ऐसा ही तुलनात्मक अध्ययन करने की कोशिश की है जो आपको दिखाएगा कि दिल्ली से सटे गाजियाबाद जैसे मेट्रो शहर का पहले कैसा हाल था और अब कैसा हाल है...
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- पांच माह पहले रहते थे गुलजार, तस्वीरों में देखें फरीदाबाद का हाल
लॉकडाउन से एक माह पहले ही हर साल लगने वाले अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में भी कई देशों के साथ ही विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्पियों ने भागीदारी निभाई थी। दो पखवाड़े तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले में प्रतिदिन औसतन 60 हजार दर्शक पहुंचते थे। अब कोरोना के कारण 2021 में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले के आयोजन पर भी संशय बना हुआ है। अमर उजाला शहर के इन प्रमुख स्थानों की फोटो के माध्यम से दर्शा रहा है कि पांच माह पहले और पांच माह बाद आज शहर के यह चर्चित स्थान किस कदर प्रभावित हुए हैं।
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कोरोना काल में बदल गई 'मिसाल-ए-मोहब्बत' की तस्वीर
आगरा में संक्रमण के कारण संरक्षित स्मारकों पर अभी भी ताला लगा हुआ है। शाहजहां और मुमताज की मोहब्बत की मिसाल ताजमहल पर भी सन्नाटा पसरा है। पहली बार ताजमहल इतने लंबे समय तक वक्त हुआ है। जिस संगमरमरी स्मारक ताजमहल के दीदार के लिए दुनियाभर से सैलानी आते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। ताजमहल को बंद हुए पांच महीने से ज्यादा हो चुके हैं। यह पहला मौका है जब ताजमहल, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी सहित सभी स्मारक इतने लंबे समय तक बंद रहे हैं। इस पाबंदी से लगभग चार लाख लोगों का रोजगार ठप है।
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- कोरोना काल में गोरखनाथ बाबा से दूर हुए 'भक्त'
गोरखपुर सहित पूरे यूपी में हर शनिवार और रविवार को साप्ताहिक लॉकडाउन लग रहा है। आज हम आपको गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां लॉकडाउन के पहले हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती थी। वहीं लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा और अब अनलॉक होने के बाद भी लोग न के बराबर जा रहे हैं।
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- पहले ब्रज के मंदिरों में उमड़ती थी भक्तों की भीड़
अनलॉक का तीसरा चरण चल रहा है, लेकिन ब्रजभूमि पर पहले जैसी रौनक नहीं लौटी है। इस बार कोरोना के कारण यहां पर्वों का उल्लास भी फीका रहा। पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बड़े आयोजन नहीं हुए। गोवर्धन में मुड़िया पूर्णिमा मेला नहीं लगा। बरसाना में राधाष्टमी मेले को भी निरस्त कर दिया गया है। वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पट भी भक्तों के लिए बंद हैं। लॉकडाउन से पहले इन मंदिरों में आराध्य के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती थी, आज यह सूने हैं। भक्त अपने आराध्य के दर्शन को तरस रहे हैं।
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- लॉकडाउन से पहले यहां दिखता था 'जुहू चौपाटी' जैसा नजारा
गोरखपुर के रामगढ़ ताल की वजह से शहर की एक अलग ही पहचान बन गई है। इसे मुख्यमंत्री के शहर का जुहू चौपाटी कहा जा रहा है। यहां आम दिनों में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं हालांकि लॉकडाउन की वजह से लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था। जिससे यहां पूरी तरह सन्नाटा छाया रहता था। वहीं अब अनलॉक होने के बाद भी यहां लोगों को जाने की अनुमति नहीं मिलने के कारण अभी भी विरान पड़ा है।
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महाभारतकालीन नगरी में नहीं लौटी रौनक, सूने हैं मंदिर, चर्च और तीर्थस्थल
महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में 24 मार्च से लगे लॉकडाउन के कारण ऐतिहासिक नगरी की खोई हुई चहल-पहल अभी भी वापस नहीं लौट पाई है कोरोना के चलते प्रभावित हुआ यहां का कारोबार आज तक पटरी पर नहीं लौटा जिसके कारण स्थानीय दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और कई होटल ढाबे बंद भी हो चुके हैं।
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- बनारस के घाट थे कुछ ऐसे, नावें भी हो गई थीं बंद, जीवन सामान्य होने की ओर
वाराणसी में गंगा घाट, मंदिर, सड़कों पर जहां भीड़ रहती थी, वहां पर एक दम सन्नाटा पसर गया था। अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट पर सन्नाटा छा गया था। गंगा में चलने वाली नावें बंद हो गई थीं। यहां पर हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते थे, अब वहां सिर्फ सन्नाटा दिखता था।
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- पहले यहां देश-दुनिया से आते थे लोग, ये स्थान तो खचाखच भरा रहता था
कटड़ा स्थित माता वैष्णो देवी का धाम लॉकडाउन से पहले श्रद्धालुओं से भरा रहता था। यात्रा मार्ग से लेकर मुख्य मंदिर तक पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी। देश विदेश से लोग माता वैष्णो देवी के दर्शन करने आते थे। वहीं लॉकडाउन होने के बाद भक्तों के लिए माता वैष्णो देवी के कपाट बंद कर दिए गए थे। साथ ही यात्रा पर भी पाबंदी लगा दी गई थी।
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पांच माह पहले तक गुलजार रहते थे शहर के ये चर्चित स्थान, अब सूने हैं सब
मुरादाबाद के दिल्ली रोड स्थित गांगन पर गुरुवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार का ये नजारा लॉकडाउन से पहले का है। अब यहां सन्नाटा पसरा रहता है। लालबाग स्थित काली माता मंदिर में लॉकडाउन से पहले आरती के दौरान भक्तों का मजमा लगता था। लेकिन अब हालात कुछ और हैं।
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पहले इन स्थानों पर उमड़ती थी भीड़, आज पसरा है सन्नाटा
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कोरोना काल के पांच माह पूरे, जानिए संपूर्ण लॉकडाउन से लेकर अब तक कैसे बदली देश की स्थिति
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