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NIA: लोकल सिम कार्ड से दुश्मन देश के लिए जासूसी; जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें-वीडियो भेजे, 13 के खिलाफ चार्जशीट
Sat, 05 Sep 2026 05:44 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 05 Sep 2026 05:44 PM IST
सार
एनआईए ने गाजियाबाद जासूसी मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ लखनऊ की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। जांच में भारत की संप्रभुता, एकता और सुरक्षा के खिलाफ साजिश, संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ, जासूसी कैमरे लगाने और दुश्मन देश को जियो-टैग तस्वीरें, वीडियो व जीपीएस जानकारी भेजने के आरोप सामने आए हैं।
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NIA
- फोटो : PTI
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विस्तार
एनआईए ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश की स्पेशल एनआईए कोर्ट में 13 आरोपियों प्रवीण, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, ऋतिक गंगवार, समीर उर्फ शूटर, दुर्गेश निषाद, नौशाद, गगन कुमार, विवेक, शिवराज, मीरा ठाकुर और शेन इरम उर्फ महक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। यह कार्रवाई एनआईए केस नंबर RC-01/2026/NIA/LKW (गाजियाबाद जासूसी मामला) के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2) और 152, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3 और 5, और UA (P) एक्ट की धारा 13, 17 और 18 के तहत की गई है। इस केस में पांच नाबालिगों के खिलाफ विस्तृत जांच रिपोर्ट (डीआईआर) पहले ही 18 मई को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड गाज़ियाबाद के समक्ष पेश की जा चुकी है।
यह मामला शुरू में कौशांबी पुलिस स्टेशन, कमिश्नरेट गाजियाबाद में एफआईआर नंबर 76/2026 (दिनांक 14 मार्च 2026) के तौर पर दर्ज किया गया था। इसे बीएनएस की धारा 61(2) और 152 तथा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज किया गया था। जांच के दौरान, पुलिस ने इसमें यूए (पी) एक्ट की धारा 18 भी जोड़ी। अब तक इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एनआईए की जांच से यह साबित हुआ है कि आरोपियों ने भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के खिलाफ गैर-कानूनी काम और गंभीर अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। आरोपियों ने गैर-कानूनी तरीके से बेहद अहम और प्रतिबंधित/संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ की। उन्होंने वहां तक न केवल पहुंच बनाई, बल्कि जासूसी वाले कैमरे भी लगा दिए।
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आरोपियों ने दुश्मन देश में मौजूद संस्थाओं को संवेदनशील जानकारी (जिसमें जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें और वीडियो शामिल थे) भेजी। उन्होंने गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए भारतीय सिम कार्ड हासिल करने और उनका इस्तेमाल करने में दुश्मन देश से जुड़ी ऐसी संस्थाओं की मदद की। साथ ही, उन्होंने संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो, और उनके सटीक जीपीएस कोऑर्डिनेट्स हासिल करने में भी उनकी सक्रिय रूप से मदद की। इससे देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बाकी आरोपियों और अन्य संदिग्धों के खिलाफ मामले की आगे की जांच चल रही है।
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यह मामला शुरू में कौशांबी पुलिस स्टेशन, कमिश्नरेट गाजियाबाद में एफआईआर नंबर 76/2026 (दिनांक 14 मार्च 2026) के तौर पर दर्ज किया गया था। इसे बीएनएस की धारा 61(2) और 152 तथा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज किया गया था। जांच के दौरान, पुलिस ने इसमें यूए (पी) एक्ट की धारा 18 भी जोड़ी। अब तक इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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एनआईए की जांच से यह साबित हुआ है कि आरोपियों ने भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के खिलाफ गैर-कानूनी काम और गंभीर अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। आरोपियों ने गैर-कानूनी तरीके से बेहद अहम और प्रतिबंधित/संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ की। उन्होंने वहां तक न केवल पहुंच बनाई, बल्कि जासूसी वाले कैमरे भी लगा दिए।
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आरोपियों ने दुश्मन देश में मौजूद संस्थाओं को संवेदनशील जानकारी (जिसमें जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें और वीडियो शामिल थे) भेजी। उन्होंने गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए भारतीय सिम कार्ड हासिल करने और उनका इस्तेमाल करने में दुश्मन देश से जुड़ी ऐसी संस्थाओं की मदद की। साथ ही, उन्होंने संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो, और उनके सटीक जीपीएस कोऑर्डिनेट्स हासिल करने में भी उनकी सक्रिय रूप से मदद की। इससे देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बाकी आरोपियों और अन्य संदिग्धों के खिलाफ मामले की आगे की जांच चल रही है।