Seat Ka Samikaran: मखदुमपुर से विधायक रहते बिहार के CM बने थे मांझी, बीते चार में से तीन चुनाव में राजद जीती
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज मखदुमपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। मखदुमपुर सीट से 2010 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जीत हासिल की थी। मौजूद समय में राजद के सतीश कुमार यहां से विधायक हैं।
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात मखदुमपुर सीट की करेंगे। मखदुमपुर सीट से 2010 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जीत हासिल की थी। मौजूद समय में राजद के सतीश कुमार विधायक हैं। इसके साथ ही इस सीट की सबसे खास बात यह है कि यहां से जीते कई विधायक बिहार सरकार में मंत्री भी रहे हैं।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला जहानाबाद है। जहानाबाद जिला एक अनुमंडल और 8 ब्लॉक में बंटा है। जिले में तीन विधानसभा सीट हैं। इनमें जहानाबाद, घोसी, मखदुमपुर (एससी) शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज मखदुमपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। मखदुमपुर विधानसभा सीट से 1952 में पहली बार चुनाव हुआ था।
1952: निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली
1952 विधानसभा के चुनाव में मखदुमपुर से निर्दलीय उम्मीदवार रामेश्वर यादव को जीत मिली। रामेश्वर ने कांग्रेस की शांति देवी को 770 वोट से मात दी। रामेश्वर को कुल 6,530 वोट मिले। वहीं, शांति देवी को 5,760 वोट मिले थे।- 1957 विधानसभा चुनाव में मखदुमपुर सीट से कांग्रेस को पहली जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस के मिथिलेश्वर प्रसाद सिंह को 5,929 वोट से जीत हासिल की। वहीं निर्दलीय शैल कुमारी दूसरी नंबर पर रही। मिथिलेश्वर प्रसाद को कुल 9,412 वोट मिले और शैल कुमारी को 3,483 वोट मिले।
- कांग्रेस की जीत का सिलसिला 1962 के चुनाव में भी जारी रहा। 1962 के चुनाव में मखदुमपुर सीट से कांग्रेस के सुखदेव प्रसाद वर्मा ने जीत हासिल की। सुखदेव ने निर्दलीय उम्मीदवार यदुनंदन शर्मा को 12,786 वोट से हराया। सुखदेव प्रसाद को कुल 19,164 वोट मिले। वहीं यदुनंदन शर्मा के लिए 6,375 वोट मिले। सुखदेव प्रसाद बाद में नवादा लोकसभा सीट और चतरा लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। इसके साथ ही प्रसाद बिहार सरकार में मंत्री भी रहे हैं।
1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एल. राम ने कांग्रेस के एम. चौधरी को 7,328 वोट से हराया। एल. राम को कुल 16,995 वोट मिले। वहीं, एम. चौधरी को 9,667 वोट मिले।
1969: कांग्रेस की वापसी
- 1969 के चुनाव में कांग्रेस को मखदुमपुर सीट से जीत मिली। इस चुनाव में महाबीर चौधरी ने 5,413 वोट से एक बार के विधायक सुखदेव प्रसाद को मात दी। महाबीर चौधरी को कुल 13,597 और सुखदेव को 8,182 वोट मिले।
- 1972 के चुनाव में कांग्रेस के राम स्वरूप राम को 3,425 वोट से जीत मिली। दूसरी नंबर तत्कालीन विधायक महाबीर चौधरी रहे। राम स्वरूप को 20,971 वोट मिले। वहीं महाबीर को 17,546 वोट मिले।
आपताकाल के बाद से मखदुमपुर सीट से जनता पार्टी को जीत मिली। जनता पार्टी के उम्मीदवार रामजतन सिन्हा ने कांग्रेस के रामाश्रय प्रसाद सिंह 15,426 वोट से हराया। राम जतन को कुल 38,405 वोट मिले। वहीं रामाश्रय को 22,979 वोट से संतोष करना पड़ा।
इसके साथ ही रामजतन सिन्हा 2005 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने। कांग्रेस ने 2005 के विधानसभा चुनाव में राजद से गठबंधन किया था। रामजतन सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर जहानाबाद के मखदुमपुर से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी सीट छोड़ने से इनकार कर दिया था। उसके बाद रामजतन सिन्हा ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। कांग्रेस छोड़ने के बाद रामजतन सिन्हा ने अपनी पार्टी बनाई, लेकिन पार्टी नहीं चली, तब वह जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह राष्ट्रीय जनता दल के संपर्क में रहे, लेकिन मन मुताबिक बात कहीं नहीं बनी। इसके बाद वह 2024 में फिर से कांग्रेस में वापस लौटे।
1980 : रामाश्रय प्रसाद सिंह को मिली जीत
1980 के चुनाव में मखदुमपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने जीत हासिल की। कांग्रेस के उम्मीदवार रामाश्रय प्रसाद ने जनता पार्टी के राम यलन सिन्हा को 28,348 वोट से मात दी। रामाश्रय को कुल 57,072 वोट मिले। वहीं, राम यलन को 28,724 वोट से संतोष करना पड़ा।
- 1985 के विधानसभा चुनाव राम जतन सिंह ने पार्टी बदलकर उसी कांग्रेस से चुनाव लड़ा, जिसके उम्मीदवार को उन्होंने 1977 में मात दी थी। रामजतन सिन्हा ने निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र प्रासद को 17,941 वोट से हराया। राम जतन को कुल 60,894 वोट मिले। वहीं राजेंद्र को कुल 42,953 वोट मिले।
- इसके साथ ही उन्होंने 1990 में भी जीत हासिल की। इस चुनाव में कांग्रेस के राम जतन ने जनता दल के अनिल कुमार को 19,141 वोट से मात दी। राम जतन को कुल 60,974 वोट मिले। वहीं अनिल कुमार को 41,833 वोट से संतोष करना पड़ा।
- 1995 में जनता दल के बागी कुमार वर्मा को जीत मिली। इसके साथ ही उन्होंने 2000 के चुनाव में भी जीत हासिल की। दोनों चुनाव में बागी कुमार ने कांग्रेस के उम्मीदवार रामजतन सिन्हा को मात दी। 1995 के चुनाव में बागी कुमार ने तीन बार के विधायक रामजतन सिन्हा को 24,893 वोट से हराया। बागी को कुल 61,143 वोट मिले। वहीं, रामजतन को कुल 36,250 वोट मिले।
- 2000 के चुनाव में बागी कुमार ने 7,370 वोट से दर्ज की। वहीं, कांग्रेस के राम जतन सिन्हा दूसरे नंबर पर रहे। बागी कुमार को 62,996 और राम जतन सिंह को 55,626 वोट मिले। बागी कुमार वर्मा ने बिहार सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
फरवरी 2005
बिहार में 2005 में दो बार चुनाव हुए थे। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। 2005 फरवरी में पूर्व विधायक रामाश्रय को जीत मिली। रामाश्रय ने यह चुनाव लोजपा से लड़ा था। रामाश्रय ने दो बार के विधायक बागी कुमार को 4,571 वोट से हराया । रामाश्रय को कुल 44,050 वोट मिले। वहीं बागी कुमार को 39,479 वोट से संतोष करना पड़ा।
रामाश्रय लोजपा छोड़ कर जदयू में शामिल हुए। हालांकि, इस चुनाव में उन्होंने हार का सामना करना पड़ा। 2005 अक्तूबर में राजद के कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने 8,624 वोट से जीत दर्ज की। कृष्णनंदन को 32,252 मिले। वहीं रामाश्रय को 23,628 वोट मिले।
2010 के चुनाव में मखदुमपुर सीट से जदयू के जीतन राम मांझी को जीत मिली। जीतन राम ने राजद के धर्मराज पासवान को 5,085 वोट से हराया था। जीतन राम मांझी को कुल 38,463 वोट मिले। वहीं धर्मराज पासवान को 33,378 वोट मिले।
इस जीत के बाद से जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री बने। वे करीब 11 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। मौजूदा समय में जीतन राम मांझी गया लोकसभा सीट से सांसद हैं। वे केंद्र सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री हैं।
2015: जीतन राम मांझी को मिली हार
2015 के चुनाव में तत्कालीन विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजद के सूबेदार दास 26,777 वोट से जीते। सूबेदार दास को 66,631 वोट मिले। वहीं, हम के जीतन राम मांझी को 39,854 वोट मिले।
2020 के चुनाव में मखदुमपुर से राजद के सतीश कुमार को जीत मिली। उन्होंने हम के देवेंद्र कुमार को 22,565 वोट से हराया। सतीश कुमार को 71,571 वोट मिले। वहीं देवेंद्र कुमार को 49,006 वोट से संतोष करना पड़ा।
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