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'दुनिया के लिए कुछ, आरएसएस सदस्यों के लिए कुछ और': ओवैसी ने मुसलमान वाले बयान पर भागवत को घेरा, बवाल क्यों?
Sun, 30 Aug 2026 08:26 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, हैदराबाद।
पीटीआई, हैदराबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 30 Aug 2026 08:26 PM IST
सार
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि जो हिंदू भारत में मुसलमानों के होने के खिलाफ है, वह हिंदू नहीं रहेगा। उनके इस बयान पर असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस की पुरानी विचारधारा का हवाला देते हुए सवाल उठाए। ओवैसी ने हेडगेवार और गोलवलकर के विचारों का जिक्र किया और मुसलमानों व ईसाइयों को लेकर संगठन की सोच पर आरोप लगाए। साथ ही यूसीसी और धर्मांतरण विरोधी कानूनों को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।
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ओवैसी का मोहन भागवत पर तंज
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी’ फेथ लीडर्स समिट को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कही। भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।
भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के इस बयान पर सवाल उठाए। ओवैसी का आरोप है कि आरएसएस दुनिया के सामने अपनी एक अलग छवि पेश करता है, जबकि संगठन के प्रमुख विचारकों की सोच मुसलमानों को लेकर अलग रही है।
‘आरएसएस में कुछ बातें दुनिया के लिए’
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भागवत के बयान को लेकर लिखा कि यह आरएसएस की पुरानी रणनीति है। संगठन की कुछ बातें दुनिया के सामने कही जाती हैं और कुछ बातें उसके अपने सदस्यों के लिए होती हैं।
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असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार की जीवनी का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि हेडगेवार कांग्रेस से इसलिए अलग हुए थे क्योंकि महात्मा गांधी लगातार हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम करते थे। ओवैसी ने यह भी कहा कि हेडगेवार को ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ का नारा पसंद नहीं था।
यह भी पढ़ें: मोहन भागवत: 'विविधता और एकता भारत के डीएनए में', न्यूयॉर्क में भागवत के संबोधन की क्या रहीं बड़ी बातें?
गोलवलकर की किताब का भी जिक्र
ओवैसी ने आरएसएस के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर की किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किताब में ‘इंटरनल थ्रेट्स’ नाम का एक अध्याय है। इसमें मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को क्रमशः पहला और दूसरा आंतरिक खतरा बताया गया है।
यूसीसी और धर्मांतरण कानून पर भी आरोप
असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर समान नागरिक संहिता का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी के नाम पर मुसलमानों को ‘हिंदू कानून’ के तहत लाया जा रहा है। इतना ही नहीं, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानूनों के जरिए ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा है।
असल विवाद क्या है?
पूरे विवाद की शुरुआत भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान से हुई। भागवत ने धार्मिक आधार पर किसी समुदाय को भारत से बाहर रखने की सोच को हिंदू विचार के खिलाफ बताया। इसके बाद ओवैसी ने आरएसएस के पुराने विचारकों और उनकी किताबों का हवाला देकर भागवत के बयान की नीयत और संगठन की विचारधारा पर सवाल उठाए।
हल्द्वानी विवाद पर बोले ओवैसी- 2026 में छुआछूत और शुद्धिकरण की घटना संविधान पर हमला
दूसरी ओर, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद हुए कथित शुद्धिकरण विवाद पर भी हमला बोला है। हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह बात बिल्कुल सच है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और केंद्र सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने इसकी निंदा भी की। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले लोग आरएसएस के सदस्य हैं और सोशल मीडिया व मुख्यधारा के मीडिया में उनकी तस्वीरें संघ की पोशाक (गणवेश) में भरी पड़ी हैं। ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब देश के संविधान के तहत छुआछूत को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है, तो साल 2026 में ऐसी घटना कैसे हो सकती है?
ओवैसी ने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर मल्लिकार्जुन खरगे की जगह चंद्रशेखर आजाद या कोई अन्य दलित व्यक्ति शामिल होता, तो क्या किसी अलग राजनीतिक दल से होने की वजह से देश का नजरिया बदल जाता? कानून का उल्लंघन हुआ है और छुआछूत प्रतिबंधित है, इसलिए यह कृत्य पूरी तरह से गलत था। ओवैसी ने कहा कि ऐसे समय में जब हम 'विकसित भारत' की बात कर रहे हैं, उत्तराखंड में साल 2026 में ऐसी घटना घटित होती है और वहां के मुख्यमंत्री इसे एक मजाक की तरह लेते हैं।
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भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के इस बयान पर सवाल उठाए। ओवैसी का आरोप है कि आरएसएस दुनिया के सामने अपनी एक अलग छवि पेश करता है, जबकि संगठन के प्रमुख विचारकों की सोच मुसलमानों को लेकर अलग रही है।
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‘आरएसएस में कुछ बातें दुनिया के लिए’
ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भागवत के बयान को लेकर लिखा कि यह आरएसएस की पुरानी रणनीति है। संगठन की कुछ बातें दुनिया के सामने कही जाती हैं और कुछ बातें उसके अपने सदस्यों के लिए होती हैं।
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असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार की जीवनी का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि हेडगेवार कांग्रेस से इसलिए अलग हुए थे क्योंकि महात्मा गांधी लगातार हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम करते थे। ओवैसी ने यह भी कहा कि हेडगेवार को ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ का नारा पसंद नहीं था।
यह भी पढ़ें: मोहन भागवत: 'विविधता और एकता भारत के डीएनए में', न्यूयॉर्क में भागवत के संबोधन की क्या रहीं बड़ी बातें?
गोलवलकर की किताब का भी जिक्र
ओवैसी ने आरएसएस के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर की किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किताब में ‘इंटरनल थ्रेट्स’ नाम का एक अध्याय है। इसमें मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को क्रमशः पहला और दूसरा आंतरिक खतरा बताया गया है।
यूसीसी और धर्मांतरण कानून पर भी आरोप
असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर समान नागरिक संहिता का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी के नाम पर मुसलमानों को ‘हिंदू कानून’ के तहत लाया जा रहा है। इतना ही नहीं, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानूनों के जरिए ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा है।
असल विवाद क्या है?
पूरे विवाद की शुरुआत भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान से हुई। भागवत ने धार्मिक आधार पर किसी समुदाय को भारत से बाहर रखने की सोच को हिंदू विचार के खिलाफ बताया। इसके बाद ओवैसी ने आरएसएस के पुराने विचारकों और उनकी किताबों का हवाला देकर भागवत के बयान की नीयत और संगठन की विचारधारा पर सवाल उठाए।
हल्द्वानी विवाद पर बोले ओवैसी- 2026 में छुआछूत और शुद्धिकरण की घटना संविधान पर हमला
दूसरी ओर, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद हुए कथित शुद्धिकरण विवाद पर भी हमला बोला है। हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह बात बिल्कुल सच है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और केंद्र सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने इसकी निंदा भी की। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले लोग आरएसएस के सदस्य हैं और सोशल मीडिया व मुख्यधारा के मीडिया में उनकी तस्वीरें संघ की पोशाक (गणवेश) में भरी पड़ी हैं। ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब देश के संविधान के तहत छुआछूत को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है, तो साल 2026 में ऐसी घटना कैसे हो सकती है?
ओवैसी ने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर मल्लिकार्जुन खरगे की जगह चंद्रशेखर आजाद या कोई अन्य दलित व्यक्ति शामिल होता, तो क्या किसी अलग राजनीतिक दल से होने की वजह से देश का नजरिया बदल जाता? कानून का उल्लंघन हुआ है और छुआछूत प्रतिबंधित है, इसलिए यह कृत्य पूरी तरह से गलत था। ओवैसी ने कहा कि ऐसे समय में जब हम 'विकसित भारत' की बात कर रहे हैं, उत्तराखंड में साल 2026 में ऐसी घटना घटित होती है और वहां के मुख्यमंत्री इसे एक मजाक की तरह लेते हैं।