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अलवर सामूहिक दुष्कर्म: पीड़िता ने कहा- पांचों आरोपियों को मिले फांसी से भी बदतर सजा
Fri, 10 May 2019 12:40 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 10 May 2019 12:40 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala Graphics
अलवर सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता के लिए वो तीन घंटे किसी नरक से कम नहीं थे। यह उसे सालों तक डराते रहेंगे लेकिन उसने न्याय पाने की लड़ाई छोड़ने से मना कर दिया है। पीड़िता का कहना है कि वह सभी पांचों आरोपियों के लिए मौत की सजा चाहती है। इस समय वह बारहवीं कक्षा की छात्रा है और पीड़िता अपनी पढ़ाई को पूरा करना चाहती है।
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समूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने कहा, 'मैं चाहती हूं कि जिन पांच लोगों ने मेरे साथ दुष्कर्म किया, वीडियो बनाया जबकि मैंने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। उन्होंने हमेशा के लिए हमारी जिंदगी बदल दी, जिसके बारे में मुझे बुरे सपने आते रहेंगे, उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए। यदि इससे बदतर कोई सजा होती है तो इन पांचों को वही मिलनी चाहिए।'
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20 साल की अनुसूचित जाति की महिला स्थानीय पुलिस के शुरुआती व्यवहार को देखकर भयभीत हो गई थी। चार मई को जब एक आरोपी ने दुष्कर्म के वीडियो को वायरल किया तो उन्होंने उसकी अलग से एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया। पीड़िता के पति ने कहा, 'जैसे ही वीडियो वायरल हुई। हम पुलिस स्टेशन गए लेकिन हमसे कहा गया कि मामला दर्ज नहीं किया जा सकता क्योंकि स्टाफ की कमी है। यहां तक की पांच और छह मई को पुलिस ने कहा कि चुनाव के कारण कोई काम नहीं हो सकता है।'
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घटना वाले दिन को याद करते हुए पति ने कहा, 'अपने सास-ससुर के घर से निकलने के 10 मिनट बाद इन पांचों ने हमारा पीछा करना शुरू कर दिया और हमें रोक दिया। वह हमें सड़क से नीचे नाले में घसीटकर ले गए। वहां हमसे कपड़े उतारने के लिए कहा। जब हमने इसका विरोध किया तो हमारे कपड़े फाड़ने लगे और तब तक ऐसा करते रहे जब तक हमने उतार नहीं दिए। इसके बाद तीन घंटों तक हमें नरक का सामना करना पड़ा। हम मदद के लिए चिल्लाए लेकिन जल्द ही हमें अहसास हो गया कि इसका कोई फायदा नहीं होगा।'
मामला दर्ज होने के बाद भी धमकी और उगाही के लिए फोन आते रहे। पीड़िता ने कहा, 'हमने शुरुआत में मामले की शिकायत दर्ज नहीं करवाई क्योंकि इन आदमियों ने धमकी दी थी कि वे मेरे माता-पिता और परिवार को नुकसान पहुंचाएंगे। हालांकि हमें अहसास हुआ कि हमें शिकायत दर्ज करवानी चाहिए ताकि किसी और को इस तरह का सामना न करना पड़े।' पीड़िता और उसके पति न्याय की इस लड़ाई को जारी रखना चाहते हैं और वह क्षेत्र के ऊंचे समुदाय के आगे झुकना नहीं चाहते। पांचों आरोपी गुज्जर समुदाय से हैं।
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