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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Year Ender 2024 For the first time in Himachal 6 MLAs lost their seats

Year Ender 2024: हिमाचल में पहली बार गई 6 विधायकों की विधायकी, सियासी उठापटक के देशभर में चर्चा में रहा प्रदेश

Sun, 29 Dec 2024 03:03 PM IST
अंकेश डोगरा सुरेश शांडिल्य, शिमला
सुरेश शांडिल्य, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 29 Dec 2024 03:03 PM IST
सार

Year Ender 2024: साल 2024 में हिमाचल में पहली बार छह विधायकों की विधायकी चली गई। फरवरी में बजट सत्र के दौरान राज्य की सियासत में उस वक्त नया मोड़ आया, जब यहां पर राज्यसभा सदस्य पद के लिए चुनाव हो रहे थे। पढ़ें...

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Year Ender 2024 For the first time in Himachal 6 MLAs lost their seats
Year Ender 2024 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

साल 2024 हिमाचल प्रदेश में सियासी उठापटक के लिए देशभर में चर्चा में रहा। हिमाचल में पहली बार छह विधायकों की विधायकी चली गई। कांग्रेस की सुक्खू सरकार के लिए यह किसी सियासी भूचाल से कम नहीं था। सरकार अब गई, तब गई, की चर्चा शुरू हो चुकी थी। मगर विपक्षी भाजपा की ओर से खड़े किए इस राजनीतिक संकट से सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पार पाने में कामयाब हो गई। कांग्रेस विधायकों की संख्या पहले 40 थी और यह घटकर 34 रह गई। उपचुनाव के बाद कांग्रेस का यह संख्याबल फिर से 40 पर पहुंच गया। भाजपा के विधायक पहले 25 थे और ये बढ़कर 28 हो गए। सुक्खू सरकार सत्ता में आई थी तो निर्दलियों की संख्या 3 थी और वर्तमान में विधानसभा में कोई निर्दलीय विधायक नहीं बचा है।

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फरवरी में बजट सत्र के दौरान राज्य की सियासत में उस वक्त नया मोड़ आया, जब यहां पर राज्यसभा सदस्य पद के लिए चुनाव हो रहे थे। कांग्रेस के छह विधायकों और तीन निर्दलियों की क्रॉस वोटिंग से भाजपा के उम्मीदवार हर्ष महाजन राज्यसभा के लिए चुन लिए गए। उसके बाद वित्त विधेयक के पारण के समय व्हिप जारी होने के बावजूद अनुपस्थित रहने पर कांग्रेस के छहों विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया। इनके अलावा तीन निर्दलियों ने इस्तीफे दिए, जो विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर कर लिए।

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फरवरी में हुए बजट सत्र में जब वित्त विधेयक पारित हो रहा था तो माना जा रहा था कि इसका पारण न होने से सरकार गिर जाएगी, मगर विधानसभा अध्यक्ष से नोकझोंक करने पर नौ भाजपा विधायकों को बजट सत्र में सदन की बैठकों से निलंबित किया गया और बजट पारित हो गया। इसके बाद सियासी घमासान आगे बढ़ता गया। छह कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया और तीन निर्दलियों के इस्तीफे मंजूर किए गए। नौ सीटों पर विधानसभा उपचुनाव में छह पर कांग्रेस और तीन पर भाजपा उपचुनाव जीत गई।

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छह विधायकों को घर बैठना पड़ा, दो निर्दलीय भी शामिल
इस सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस सरकार के एक मंत्री और कुछ विधायकों की हसरतें भी सामने आईं। एक मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया, मगर बाद में हाईकमान के हस्तक्षेप पर नरम पड़ गए। कांग्रेस के विधायक रहे पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के अलावा विधायक राजेंद्र राणा जैसे नेता वरिष्ठता की दुहाई देते हुए राज्य मंत्रिमंडल में जगह न मिलने और अपनी अनदेखी की बात कर बगावत कर गए और विधायकी जाने के बाद भाजपा के हो लिए। अन्य कांग्रेस विधायकों में रवि ठाकुर, इंद्रदत्त लखनपाल, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार भुट्टो ने भी राज्यसभा सदस्य के लिए भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। इनमें से राजेंद्र राणा, रवि ठाकुर, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार भुट्टो को उपचुनाव हारने के बाद घर बैठना पड़ा। इसी तरह निर्दलीय विधायकों में होशियार सिंह और केएल ठाकुर भी घर बैठ गए। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर देहरा से विधायक बन गईं।

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