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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   World Organ Donation Day 373 lives changed by organ donation in Himachal 350 got eyesight 23 got new life

विश्व अंगदान दिवस 2025: हिमाचल में अंगदान से बदली 373 जिंदगियां, 350 को मिली आंखों की रोशनी, 23 को नया जीवन

Wed, 13 Aug 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 13 Aug 2025 05:00 AM IST
सार

World Organ Donation Day 2025: अंगदान को महादान कहा जाता है, जिसकी मदद से दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2021 से अब तक 373 ट्रांसप्लांट कराए जा चुके हैं। इनमें 350 नेत्रदान और 23 लीवर ट्रांसप्लांट शामिल हैं। इसके अलावा दो ब्रेन डेड डोनर के मामले में सभी अंग दान कर कई मरीजों को नई जिंदगी मिली है। 

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World Organ Donation Day 373 lives changed by organ donation in Himachal 350 got eyesight 23 got new life
विश्व अंगदान दिवस - फोटो : freepik.com

विस्तार

प्रदेश में अंगदान से 350 लोगों को आंखों की रोशनी मिली है। ये लोग अब दूसरों की आंखों से दुनिया को देख रहे हैं। इसी तरह 23 लोग ऐसे हैं जिनके लीवर का दर्द खत्म हुआ है। दूसरों से दान में मिले लीवर से उनका जीवन बेहतर हुआ है। अंगदान के लिए अब हर वर्ग के लोग आगे आने लगे हैं। इससे उन लोगों को नई सांसें मिली हैं जो किसी न बीमारी से पीड़ित हैं।

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राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) आईजीएमसी शिमला के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 से अब तक 373 ट्रांसप्लांट कराए जा चुके हैं। इनमें 350 नेत्रदान और 23 लीवर ट्रांसप्लांट शामिल हैं। इसके अलावा दो ब्रेन डेड डोनर के मामले में सभी अंग दान कर कई मरीजों को नई जिंदगी मिली है। इन चार वर्षों में 4,600 लोगों ने मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लिया है। फिर भी 50 मरीज आज भी अंग मिलने की प्रतीक्षा में हैं।

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एक देह दान से 8-9 जिंदगियां बच सकती हैं। अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीज को 15 दिन अस्पताल में भर्ती रखा जाता है। पहले महीने हर हफ्ते जांच होती है, फिर एक साल तक हर दो महीने पर चेकअप किया जाता है। अंग का आवंटन रक्त समूह, लोकेशन, उम्र के अंतर और पंजीकरण क्रम के आधार पर होता है। अंगदान केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि जीवनदान का सबसे बड़ा रूप है। प्रदेश में जागरुकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब भी जरूरतमंद मरीजों की लंबी सूची इस बात की गवाही देती है कि और लोगों को आगे आना होगा। अगर आप अंगदान का संकल्प लेते हैं, तो आपका नाम सोटो में पंजीकृत होता है और मृत्यु के बाद आपके अंग जरूरतमंदों तक पहुंचाए जाते हैं।

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ऐसे करें अंगदान
अंगदान दो तरह से होता है। जीवित दान और मृत्यु उपरांत दान। जीवित व्यक्ति एक गुर्दा या लीवर का हिस्सा दान कर सकता है। इससे दाता को कोई गंभीर नुकसान नहीं होता। ब्रेन डेड घोषित मरीज के हृदय, फेफड़े, यकृत, गुर्दे, आंत और अग्न्याशय जैसे अंग कॉर्निया, हड्डियां, त्वचा जैसे ऊतक दान किए जा सकते हैं। अंगों का आवंटन रक्त समूह, लोकेशन, आयु अंतर और रजिस्ट्रेशन क्रम के आधार पर किया जाता है, ताकि सही समय पर सही मरीज तक अंग पहुंचे।

बहन अंजू ने भाई स्वरूप को दिया जीवन
कांगड़ा के स्वरूप चंद ने बताया कि उनके दोनों गुर्दे 2023 में 80 फीसदी खराब हो गए थे। अगले वर्ष 2024 में वे डायलिसिस पर आ गए। हफ्ते में तीन बार, चार-चार घंटे मशीन से जुड़े रहना उनके जीवन का हिस्सा बन गया था। परिवार चिंतित था, लेकिन उनकी बहन अंजू ने आगे बढ़कर गुर्दा दान करने का फैसला लिया। जून 2025 में प्रत्यारोपण हुआ और आज स्वरूप फिर से स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी रहे हैं।

संध्या की आंखों में लौटी रोशन
रामपुर की संध्या के जीवन में रंग लौटाने वाला पल भी अंगदान का ही परिणाम है। पिछले वर्ष एक आंख से पूरी तरह अंधी हो चुकी संध्या को डॉक्टरों ने पंजीकृत किया था। नौ महीने पहले उन्हें बुलाया गया और हिमकेयर योजना के तहत निःशुल्क ऑपरेशन किया गया। अब वे फिर से अपने परिवार और प्रकृति के रंग देख सकती हैं।

पिता का साहसिक निर्णय
आईजीएमसी शिमला के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत ने व्यक्तिगत रूप से अंगदान का महत्व अनुभव किया। उनके 14 वर्षीय बेटे को ब्रेन डेड घोषित किया गया। गहरे दुःख के बीच उन्होंने बेटे के सभी अंग दान करने का फैसला किया। इससे कई लोगों को जीवन मिला। दुःख कभी खत्म नहीं होता, लेकिन यह जानकर संतोष है कि उसके अंग आज भी किसी की सांसें चला रहे हैं।
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