Shimla: दृष्टिबाधितों ने किया सीएम आवास कूच, पुलिस ने रोका, सड़क पर बैककर की नारेबाजी
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हिमाचल प्रदेश में रोजगार और आरक्षण से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर पिछले 998 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिबाधितों का सब्र बुधवार को जवाब देता नजर आया। अपनी मांगों के समर्थन में बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास ओकओवर की ओर कूच के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने छोटा शिमला में सड़क पर ही धरना शुरू कर नारेबाजी की। राजधानी शिमला में दिनभर चले इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दृष्टिबाधित युवाओं के रोजगार और आरक्षण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे करीब तीन वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दृष्टिबाधित जन संगठन के सचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि संगठन पिछले 998 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहा है। बार-बार सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, कई दौर की वार्ताएं भी हुईं, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम सामने नहीं आया।
दृष्टिबाधित युवाओं के लिए विभिन्न सरकारी विभागों में आरक्षित करीब 1100 बैकलॉग पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इन पदों को भरने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार को संगठन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का निर्णय लिया था। बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर तक बहस भी हुई, जिसके बाद आंदोलनकारी सड़क पर ही बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। इस दौरान क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित हुआ और मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
1100 बैकलॉग पद भरने की प्रमुख मांग
संगठन का कहना है कि दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों को समय पर नहीं भरा गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित युवा रोजगार से वंचित हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सभी विभागों में रिक्त बैकलॉग पदों की विभागवार सूची सार्वजनिक की जाए और भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके अलावा आरक्षण संबंधी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने, लंबित मामलों का निपटारा करने और दिव्यांग हितों से जुड़े निर्णयों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की भी मांग उठाई गई। राजेश ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चक्का जाम, सीएम आवास घेराव और प्रदेशव्यापी विरोध कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।