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Una News: कृषि के लिए मौसम की दुश्वारियां बरकरार, सिंचाई में छूटे पसीने
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पहले बारिश और अब तीखी धूप से हो रहे परेशानी
विशेषकर आलू की फसल को हर तीसरे से चौथे दिन करनी पड़ रही सिंचाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में कृषि के लिहाज से मौसम की कठिनाइयां बरकरार हैं। पहले लगातार बारिश और उसके बाद तेज धूप ने फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों को आलू और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ रही है। हर तीसरे से चौथे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 1500 हेक्टेयर में आलू की फसल तैयार की जा रही है। इसके अलावा हरी सब्जियों की बुआई भी लगभग पूरी हो चुकी है। अब किसानों के लिए फसलों की समय पर सिंचाई बड़ी चुनौती है। खासकर उन किसानों को, जिनके एक से अधिक खेतों में फसल तैयार है, सिंचाई के लिए मजदूरों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में डीजल इंजन से सिंचाई करने वाले किसानों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान विरेंद्र कुमार, सुरेश सैनी, अमित कुमार, बलजिंद्र सिंह और सरूप सिंह ने बताया कि आलू की फसल में बुआई के कुछ समय बाद बारिश हो जाने से फसल को अंकुरित होने में लाभ मिलता है और मिट्टी की पकड़ मजबूत होती है। वहीं, सिंचाई करने से बुआई वाले हिस्से की मिट्टी दरकने लगती है, जिससे कई बार बीज बाहर आ जाते हैं और नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में फसल से खरपतवार हटाना भी बड़ी चुनौती बनेगा। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग, कुलभूषण धीमान ने कहा कि वर्तमान में केवल सिंचित क्षेत्रों में ही खेती हो रही है, जिससे फसल अच्छी तरह तैयार होने की उम्मीद है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार की समस्या हो तो वे विभाग से संपर्क कर सहयोग प्राप्त करें।
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विशेषकर आलू की फसल को हर तीसरे से चौथे दिन करनी पड़ रही सिंचाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में कृषि के लिहाज से मौसम की कठिनाइयां बरकरार हैं। पहले लगातार बारिश और उसके बाद तेज धूप ने फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों को आलू और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ रही है। हर तीसरे से चौथे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 1500 हेक्टेयर में आलू की फसल तैयार की जा रही है। इसके अलावा हरी सब्जियों की बुआई भी लगभग पूरी हो चुकी है। अब किसानों के लिए फसलों की समय पर सिंचाई बड़ी चुनौती है। खासकर उन किसानों को, जिनके एक से अधिक खेतों में फसल तैयार है, सिंचाई के लिए मजदूरों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में डीजल इंजन से सिंचाई करने वाले किसानों को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान विरेंद्र कुमार, सुरेश सैनी, अमित कुमार, बलजिंद्र सिंह और सरूप सिंह ने बताया कि आलू की फसल में बुआई के कुछ समय बाद बारिश हो जाने से फसल को अंकुरित होने में लाभ मिलता है और मिट्टी की पकड़ मजबूत होती है। वहीं, सिंचाई करने से बुआई वाले हिस्से की मिट्टी दरकने लगती है, जिससे कई बार बीज बाहर आ जाते हैं और नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में फसल से खरपतवार हटाना भी बड़ी चुनौती बनेगा। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग, कुलभूषण धीमान ने कहा कि वर्तमान में केवल सिंचित क्षेत्रों में ही खेती हो रही है, जिससे फसल अच्छी तरह तैयार होने की उम्मीद है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार की समस्या हो तो वे विभाग से संपर्क कर सहयोग प्राप्त करें।