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Una News: मौसम साफ, गेहूं की फसल की कटाई में जुटेंगे किसान
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ज्वार में गेंहू की कटाई करते हुए ।स्रोत स्वयं
- फोटो : बेला कस्बा में मंडराता सांड़।
बीते दिनों खराब मौसम के कारण रुकी थी कटाई
कई जगह हवाओं से खेतों में बिछ गई है फसल
किसानों के कहा- मौसम साफ रहने का कई दिन से था इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना/बंगाणा/बड़ूही। जिले में बीते करीब 10 दिन से लगातार खराब चल रहे मौसम से मंगलवार को राहत मिली। सुबह की शुरुआत साफ मौसम के साथ हुई। सबसे बड़ी राहत किसानों को हुई, जिन्होंने खराब मौसम के कारण गेहूं की कटाई रोकी हुई थी। मौसम साफ होते ही किसानों ने अपने सारे काम छोड़कर गेहूं की कटाई शुरू कर दी। बीते दिनों खराब मौसम और बारिश के चलते किसान काफी चिंतित थे। अब किसान तड़के पांच बजे से लेकर देर शाम आठ बजे तक खेतों में मेहनत कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक करीब 5000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल की कटाई पूरी हो पाई। 30000 हेक्टेयर जमीन पर अभी भी कटाई होना बाकी है। बुधवार को अधिकतर खेतों में कटाई शुरू हो गई। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की अनिश्चितता ने उन्हें कोई भी मौका नहीं छोड़ने दिया। जैसे ही आसमान साफ हुआ लोगों ने बिना समय गंवाए फसल समेटनी शुरू कर दी। दोपहर के समय थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से खेतों में जुट जाते हैं। किसानों की प्राथमिकता इस समय गेहूं की फसल को सुरक्षित निकालना है। यदि फिर से बारिश हुई तो खड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में दोबारा मौसम खराब होने की संभावना जताई गई है। इसलिए हर किसान अपने स्तर पर भरसक प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द कटाई पूरी की जाए।
चिंतित हैं कि अगर दोबारा मौसम खराब हुआ तो पिछले छह महीने से की हुई मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इसलिए जल्द से जल्द फसल को काटकर घर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोग दोपहर का भोजन भी खेतों में ही ले रहे हैं। -किसान सतीश कुमार
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गेहूं की कटाई के समय अकसर मौसम खराब होने की चुनौती रहती है। कुछ दिनों के भीतर फसल कटाई से लेकर तूड़ी प्रबंधन का कार्य निपटाना होता है। कहा कि अगर मौसम की भेंट फसल चढ़ जाए तो काफी नुकसान होता है। -किसान राजेश कुमार
इस बार फसल की पैदावार गिरना तय है। जरूरत से अधिक फसल सूख चुकी और कटाई में देरी हो गई। मौसम के चक्कर में यह देरी हुई। कहा कि अगर अब और इंतजार किया तो बची फसल को सुरक्षित नहीं रख पाएंगे। -किसान जतिंद्र कुमार
इस बार बैसाखी पर्व के बाद से लगातार मौसम खराब चल रहा है। फसल को काटने तक का समय नहीं मिला। कहा कि इस बार कटाई की मजदूरी भी 1000 से 1200 रुपये प्रति कनाल है। किसानों को फसल काटने की जल्दी है। इसलिए महंगे दाम पर फसल कटवा रहे। कुल मिलाकर किसान की जेब में कुछ नहीं बचेगा। -किसान संदीप कुमार
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं कटाई का यह उपयुक्त समय है। हालांकि, गैर सिंचित इलाकों में करीब एक सप्ताह पहले से फसल तैयार है। कहा कि फसल की पैदावार अच्छी है। मौसम का असर फसल पर हो सकता है।
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कई जगह हवाओं से खेतों में बिछ गई है फसल
किसानों के कहा- मौसम साफ रहने का कई दिन से था इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना/बंगाणा/बड़ूही। जिले में बीते करीब 10 दिन से लगातार खराब चल रहे मौसम से मंगलवार को राहत मिली। सुबह की शुरुआत साफ मौसम के साथ हुई। सबसे बड़ी राहत किसानों को हुई, जिन्होंने खराब मौसम के कारण गेहूं की कटाई रोकी हुई थी। मौसम साफ होते ही किसानों ने अपने सारे काम छोड़कर गेहूं की कटाई शुरू कर दी। बीते दिनों खराब मौसम और बारिश के चलते किसान काफी चिंतित थे। अब किसान तड़के पांच बजे से लेकर देर शाम आठ बजे तक खेतों में मेहनत कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक करीब 5000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल की कटाई पूरी हो पाई। 30000 हेक्टेयर जमीन पर अभी भी कटाई होना बाकी है। बुधवार को अधिकतर खेतों में कटाई शुरू हो गई। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की अनिश्चितता ने उन्हें कोई भी मौका नहीं छोड़ने दिया। जैसे ही आसमान साफ हुआ लोगों ने बिना समय गंवाए फसल समेटनी शुरू कर दी। दोपहर के समय थोड़ी देर आराम करने के बाद फिर से खेतों में जुट जाते हैं। किसानों की प्राथमिकता इस समय गेहूं की फसल को सुरक्षित निकालना है। यदि फिर से बारिश हुई तो खड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है। मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में दोबारा मौसम खराब होने की संभावना जताई गई है। इसलिए हर किसान अपने स्तर पर भरसक प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द कटाई पूरी की जाए।
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चिंतित हैं कि अगर दोबारा मौसम खराब हुआ तो पिछले छह महीने से की हुई मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इसलिए जल्द से जल्द फसल को काटकर घर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोग दोपहर का भोजन भी खेतों में ही ले रहे हैं। -किसान सतीश कुमार
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गेहूं की कटाई के समय अकसर मौसम खराब होने की चुनौती रहती है। कुछ दिनों के भीतर फसल कटाई से लेकर तूड़ी प्रबंधन का कार्य निपटाना होता है। कहा कि अगर मौसम की भेंट फसल चढ़ जाए तो काफी नुकसान होता है। -किसान राजेश कुमार
इस बार फसल की पैदावार गिरना तय है। जरूरत से अधिक फसल सूख चुकी और कटाई में देरी हो गई। मौसम के चक्कर में यह देरी हुई। कहा कि अगर अब और इंतजार किया तो बची फसल को सुरक्षित नहीं रख पाएंगे। -किसान जतिंद्र कुमार
इस बार बैसाखी पर्व के बाद से लगातार मौसम खराब चल रहा है। फसल को काटने तक का समय नहीं मिला। कहा कि इस बार कटाई की मजदूरी भी 1000 से 1200 रुपये प्रति कनाल है। किसानों को फसल काटने की जल्दी है। इसलिए महंगे दाम पर फसल कटवा रहे। कुल मिलाकर किसान की जेब में कुछ नहीं बचेगा। -किसान संदीप कुमार
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं कटाई का यह उपयुक्त समय है। हालांकि, गैर सिंचित इलाकों में करीब एक सप्ताह पहले से फसल तैयार है। कहा कि फसल की पैदावार अच्छी है। मौसम का असर फसल पर हो सकता है।