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Una News: प्रतिबंधित दवा तस्करी मामले में वीरेंद्र बिंदु की जमानत याचिका खारिज
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-उच्च न्यायालय के निर्णय में दखल देने की कोई विशेष वजह नहीं
बीते साल पकड़ी गई प्रतिबंधित दवाओं का कथित किंगपिन है वीरेंद्र बिंदु
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। बहुचर्चित प्रतिबंधित दवा तस्करी मामले में उच्चतम न्यायालय ने मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उच्चतम न्यायालय ने प्रतिबंधित दवा तस्करी मामले के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई वजह नहीं जिसके चलते प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय में दखल दिया जाए। मुख्य आरोपी ने प्रतिबंधित दवा तस्करी प्रकरण में जमानत पाने के लिए उच्चतम न्यायालय में सात वकीलों को खड़ा किया था।
गोर हो कि स्टेट सीआईडी की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने गगरेट में पिछले साल दिल्ली से ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से आया प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा पकड़ा था। इन दवाओं का इस्तेमाल कुछ युवा नशे के लिए करते हैं। पुलिस ने पहले गगरेट से ही चार लोगों को गिरफ्तार किया और मामला मादक द्रव्य पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। तफ्तीश का जिम्मा स्टेट सीआईडी की गठित एसआईटी को मिला। एसआईटी ने कड़ी मेहनत करते हुए अंतरराज्यीय प्रतिबंधित दवा तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली, यूपी, हरियाणा व पंजाब से कुछ और लोगों को भी गिरफ्तार किया था। अभी इस मामले की तफ्तीश चल ही रही थी कि दिल्ली से दवा तस्करी की एक और खेप ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से आ गई। इसके बाद खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित दवा तस्कर अब खुद दवाएं न लाकर प्रतिबंधित दवाएं ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से मंगवा रहे हैं।
इस मामले में जांच के बाद एसआईटी ने पाया कि इस प्रकरण का किंग पिन नगर पंचायत गगरेट का पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार उर्फ बिंदू है। जांच की सारी सूई उसकी तरफ घूमी तो एसआईटी ने वीरेंद्र बिंदु की संपत्ति भी इस केस के साथ अटैच कर दी। बिंदु ने जमानत पाने के लिए पहले प्रदेश उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की लेकिन वहां जमानत याचिका खारिज हुई। अब वीरेंद्र बिंदु ने अपने वकीलों के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका दायर की। जिसकी सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश व जस्टिस अरविंद कुमार ने करते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। स्टेट सीआईडी के एक आला अधिकारी ने बताया कि यह केस नशा माफिया के लिए नजीर बने, इसके लिए स्टेट सीआईडी की एसआईटी ने पुख्ता तथ्य जुटाए हैं।
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बीते साल पकड़ी गई प्रतिबंधित दवाओं का कथित किंगपिन है वीरेंद्र बिंदु
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। बहुचर्चित प्रतिबंधित दवा तस्करी मामले में उच्चतम न्यायालय ने मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उच्चतम न्यायालय ने प्रतिबंधित दवा तस्करी मामले के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई वजह नहीं जिसके चलते प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय में दखल दिया जाए। मुख्य आरोपी ने प्रतिबंधित दवा तस्करी प्रकरण में जमानत पाने के लिए उच्चतम न्यायालय में सात वकीलों को खड़ा किया था।
गोर हो कि स्टेट सीआईडी की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने गगरेट में पिछले साल दिल्ली से ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से आया प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा पकड़ा था। इन दवाओं का इस्तेमाल कुछ युवा नशे के लिए करते हैं। पुलिस ने पहले गगरेट से ही चार लोगों को गिरफ्तार किया और मामला मादक द्रव्य पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। तफ्तीश का जिम्मा स्टेट सीआईडी की गठित एसआईटी को मिला। एसआईटी ने कड़ी मेहनत करते हुए अंतरराज्यीय प्रतिबंधित दवा तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली, यूपी, हरियाणा व पंजाब से कुछ और लोगों को भी गिरफ्तार किया था। अभी इस मामले की तफ्तीश चल ही रही थी कि दिल्ली से दवा तस्करी की एक और खेप ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से आ गई। इसके बाद खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित दवा तस्कर अब खुद दवाएं न लाकर प्रतिबंधित दवाएं ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से मंगवा रहे हैं।
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इस मामले में जांच के बाद एसआईटी ने पाया कि इस प्रकरण का किंग पिन नगर पंचायत गगरेट का पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार उर्फ बिंदू है। जांच की सारी सूई उसकी तरफ घूमी तो एसआईटी ने वीरेंद्र बिंदु की संपत्ति भी इस केस के साथ अटैच कर दी। बिंदु ने जमानत पाने के लिए पहले प्रदेश उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की लेकिन वहां जमानत याचिका खारिज हुई। अब वीरेंद्र बिंदु ने अपने वकीलों के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका दायर की। जिसकी सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश व जस्टिस अरविंद कुमार ने करते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। स्टेट सीआईडी के एक आला अधिकारी ने बताया कि यह केस नशा माफिया के लिए नजीर बने, इसके लिए स्टेट सीआईडी की एसआईटी ने पुख्ता तथ्य जुटाए हैं।
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