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स्टोन क्रशर निर्माण के विरोध में गुगलैहड़ में ग्रामीणों का विरोध जारी
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गगरेट के गुगलैहड़ गांव में निर्माणधीन स्टोन क्रशर का विरोध करते ग्रामीण।
- फोटो : Una
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गगरेट (ऊना)। उपमंडल गगरेट के गुगलैहड़ गांव में निर्माणधीन स्टोन क्रशर का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दूसरे दिन भी ग्रामीणों ने स्टोन क्रशर के निर्माण का विरोध किया।
ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल बीते शनिवार को प्रशासन से ऊना में मुलाकात करने गया था। वहीं रविवार को ग्रामीणों ने क्रशर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। अब सोमवार को भी ग्रामीण और इस स्टोन क्रशर का निर्माण न किए जाने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। गुगलैहड़ के ग्रामीणों का आरोप है कि स्टोन क्रशर से गांव की आबादी की दूरी गलत मापी गई है।
तहसीलदार की ओर से की गई निशानदेही सवालों के घेरे में है। ग्रामीण शशि पाल, कृष्ण कुमार, रजनीश कुमार, दीवान चंद और सरोज कुमारी ने बताया कि स्टोन क्रशर को लगाने के लिए गांव के लोगों को धोखे में रखकर एनओसी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि इस क्रशर के निर्माण से गुगलैहड़ गांव के वार्ड पांच लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा। लोगों की कृषि योग्य भूमि बंजर हो जाएगी। वहीं सबसे बड़ी समस्या जल स्तर को लेकर पैदा होगी। यहां क्रशर का निर्माण किया जा रहा है, उससे कुछ ही दूरी पर आबादी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तुरंत क्रशर की मंजूरी को रद्द किया जाए नहीं तो ग्रामीण परिजनों के साथ धरने पर बैठेंगे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और कुछ नेताओं के सहयोग से ही क्रशर का निर्माण तय नियमों के विपरीत किया जा रहा है। जिला परिषद सदस्य रजनी देवी ने बताया कि अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं। ग्रामीणों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। क्रशर जनता की सहमति के बिना नहीं लगना चाहिए। कुछ लोग इस मामले में पर्दे के पीछे रहकर रोटियां सेंक रहे हैं। जनता देख रही है कि खनन माफिया को कौन संरक्षण दे रहा है। क्रशर के मालिक संदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी करने और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण शुरू किया है।
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ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल बीते शनिवार को प्रशासन से ऊना में मुलाकात करने गया था। वहीं रविवार को ग्रामीणों ने क्रशर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। अब सोमवार को भी ग्रामीण और इस स्टोन क्रशर का निर्माण न किए जाने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। गुगलैहड़ के ग्रामीणों का आरोप है कि स्टोन क्रशर से गांव की आबादी की दूरी गलत मापी गई है।
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तहसीलदार की ओर से की गई निशानदेही सवालों के घेरे में है। ग्रामीण शशि पाल, कृष्ण कुमार, रजनीश कुमार, दीवान चंद और सरोज कुमारी ने बताया कि स्टोन क्रशर को लगाने के लिए गांव के लोगों को धोखे में रखकर एनओसी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि इस क्रशर के निर्माण से गुगलैहड़ गांव के वार्ड पांच लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा। लोगों की कृषि योग्य भूमि बंजर हो जाएगी। वहीं सबसे बड़ी समस्या जल स्तर को लेकर पैदा होगी। यहां क्रशर का निर्माण किया जा रहा है, उससे कुछ ही दूरी पर आबादी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तुरंत क्रशर की मंजूरी को रद्द किया जाए नहीं तो ग्रामीण परिजनों के साथ धरने पर बैठेंगे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और कुछ नेताओं के सहयोग से ही क्रशर का निर्माण तय नियमों के विपरीत किया जा रहा है। जिला परिषद सदस्य रजनी देवी ने बताया कि अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं। ग्रामीणों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। क्रशर जनता की सहमति के बिना नहीं लगना चाहिए। कुछ लोग इस मामले में पर्दे के पीछे रहकर रोटियां सेंक रहे हैं। जनता देख रही है कि खनन माफिया को कौन संरक्षण दे रहा है। क्रशर के मालिक संदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी करने और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण शुरू किया है।