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इमारती लकड़ी चोरी मामले में दो लोगों को तीस दिन की कैद
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Two convicted of furniture wood theft sent prison for 30 days
अंब (ऊना)। ब्रह्मपुर में इमारती लकड़ी चोरी के मामले में कोर्ट नंबर दो अंब विशाल तिवारी की अदालत ने दो लोगों को दोषी करार दिया है। दोनों को तीस-तीस दिन की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को अतिरिक्त पंद्रह दिन की कैद भुगतनी होगी।
सहायक जिला न्यायवादी पूजा धीमान ने बताया कि 21 दिसंबर 2016 को जगदीश राम पुत्र बिशनदास निवासी ब्रह्मपुर ने गगरेट थाना में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी मलकीयत भूमि आरोपी के साथ लगती है। उसकी मलकीयत भूमि में खसरा नंबर 731 के बन्ने पर इमारती लकड़ी तुणी का पेड़ था। जिसकी कीमत लगभग सत्तर हजार रुपये थी।
पेड़ पर प्यारे लाल जबरदस्ती अपना हक जता रहा था। उसने चोरी से तुणी का पेड़ काटकर यशपाल को बेच दिया था। जिस बारे उसे 3 मई 2016 को पता चला। छानबीन करने पर काटा गया पेड़ यशपाल के घर मिला। फिर उसका आपस में समझौता हुआ कि जुलाई 2016 तक यह निशानदेही करवा लेंगे। जिसकी जमीन निकलेगी पेड़ उसका होगा। तुणी की लकड़ी छत्तीस लोगों की मौजूदगी में यशपाल को दे दी गई।
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12 जून 2016 को विवादित खसरा नंबर की निशानदेही होनी थी। जिसमें आरोपी प्यारे लाल नहीं आया फिर दिसंबर माह में शिकायतकर्ता को मालूम हुआ कि यशपाल ने बिना अनुमति के तुणी के मोच्छों को चिरवाकर उपयोग कर लिया है। पुलिस ने विवादित भूमि की निशानदेही करवाई।
जिसमें तुणी का कटा हुआ पेड़ खसरा नंबर 731 में पाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों को सुनने के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कोर्ट नंबर दो अंब विशाल तिवारी की अदालत ने प्यारेलाल को आईपीसी की धारा 379 के तहत दोषी करार देते हुए तीस दिन की कैद और पांच हजार रुपए जुर्माना तथा दोषी यशपाल को आईपीसी की धारा 406 के तहत तीस दिन की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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सहायक जिला न्यायवादी पूजा धीमान ने बताया कि 21 दिसंबर 2016 को जगदीश राम पुत्र बिशनदास निवासी ब्रह्मपुर ने गगरेट थाना में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी मलकीयत भूमि आरोपी के साथ लगती है। उसकी मलकीयत भूमि में खसरा नंबर 731 के बन्ने पर इमारती लकड़ी तुणी का पेड़ था। जिसकी कीमत लगभग सत्तर हजार रुपये थी।
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पेड़ पर प्यारे लाल जबरदस्ती अपना हक जता रहा था। उसने चोरी से तुणी का पेड़ काटकर यशपाल को बेच दिया था। जिस बारे उसे 3 मई 2016 को पता चला। छानबीन करने पर काटा गया पेड़ यशपाल के घर मिला। फिर उसका आपस में समझौता हुआ कि जुलाई 2016 तक यह निशानदेही करवा लेंगे। जिसकी जमीन निकलेगी पेड़ उसका होगा। तुणी की लकड़ी छत्तीस लोगों की मौजूदगी में यशपाल को दे दी गई।
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12 जून 2016 को विवादित खसरा नंबर की निशानदेही होनी थी। जिसमें आरोपी प्यारे लाल नहीं आया फिर दिसंबर माह में शिकायतकर्ता को मालूम हुआ कि यशपाल ने बिना अनुमति के तुणी के मोच्छों को चिरवाकर उपयोग कर लिया है। पुलिस ने विवादित भूमि की निशानदेही करवाई।
जिसमें तुणी का कटा हुआ पेड़ खसरा नंबर 731 में पाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों को सुनने के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कोर्ट नंबर दो अंब विशाल तिवारी की अदालत ने प्यारेलाल को आईपीसी की धारा 379 के तहत दोषी करार देते हुए तीस दिन की कैद और पांच हजार रुपए जुर्माना तथा दोषी यशपाल को आईपीसी की धारा 406 के तहत तीस दिन की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।