{"_id":"6683e77d294836b1f9091710","slug":"traditional-maize-sowing-also-starts-with-the-rains-una-news-c-93-1-ssml1048-127461-2024-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: बरसात के साथ पारंपरिक मक्की की बिजाई भी शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: बरसात के साथ पारंपरिक मक्की की बिजाई भी शुरू
Wed, 03 Jul 2024 05:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 03 Jul 2024 05:09 AM IST
विज्ञापन
ऊना के बंगाणा क्षेत्र में मक्की की बिजाई में जुटा ट्रैक्टर चालक। स्रोत संवाद
ऊना। जिला में बरसात की शुरुआत के साथ ही पारंपरिक मक्की की बिजाई शुरू हो चुकी है। खेतों में बिजाई के लिए पर्याप्त नमी आने के बाद किसान खेतों में जुट गए हैं और मक्की की बिजाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार जिला में करीब 30,000 हेक्टेयर जमीन पर मक्की की बिजाई होती है। इसमें से लगभग 10,000 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है, जबकि 20,000 हेक्टेयर गैर सिंचित है और फसल बारिश पर ही निर्भर होती है। सिंचाई सुविधा वाले अधिकतर खेतों में मई में मक्की की बिजाई हो चुकी है। अब बारिश पर निर्भर इलाकों में मक्की की बिजाई का कार्य शुरू हुआ है।
बताया जा रहा कि अधिकतर किसानों ने 300 रुपये से 600 रुपये प्रतिकिलो दाम के हिसाब से दुकानों से मक्की का बीज खरीदा है। हालांकि बीज इससे महंगी कीमत के भी बाजार में उपलब्ध है, लेकिन किसान ज्यादा महंगा बीज खरीदने के गुरेज करते हैं।
विज्ञापन
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने कहा कि पारंपरिक मक्की की बिजाई चल रही है। यह फसल अक्तूबर की शुरूआत में तैयार होती है। जहां सिंचाई सुविधा नहीं होती, वहां किसान इस समय बिजाई कर रहे हैं। इस फसल को किसान अपने लिए और बिक्री के लिए भी रखते हैं।
12-32-16 खाद की मांग भी बढ़ी
बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में मक्की की बिजाई शुरू होने से 12-32-16 खाद की मांग भी बढ़ी है। यह खाद फसल की बिजाई के समय इस्तेमाल होती है। इस खाद के डालने से बीज में पौधा अच्छे तरीके से अंकुरित होता है। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद की खरीद कर रहे हैं। इसके लिए इफको और अन्य खाद के गोदामों में प्रतिदिन किसान पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार जिला में करीब 30,000 हेक्टेयर जमीन पर मक्की की बिजाई होती है। इसमें से लगभग 10,000 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है, जबकि 20,000 हेक्टेयर गैर सिंचित है और फसल बारिश पर ही निर्भर होती है। सिंचाई सुविधा वाले अधिकतर खेतों में मई में मक्की की बिजाई हो चुकी है। अब बारिश पर निर्भर इलाकों में मक्की की बिजाई का कार्य शुरू हुआ है।
विज्ञापन
बताया जा रहा कि अधिकतर किसानों ने 300 रुपये से 600 रुपये प्रतिकिलो दाम के हिसाब से दुकानों से मक्की का बीज खरीदा है। हालांकि बीज इससे महंगी कीमत के भी बाजार में उपलब्ध है, लेकिन किसान ज्यादा महंगा बीज खरीदने के गुरेज करते हैं।
विज्ञापन
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने कहा कि पारंपरिक मक्की की बिजाई चल रही है। यह फसल अक्तूबर की शुरूआत में तैयार होती है। जहां सिंचाई सुविधा नहीं होती, वहां किसान इस समय बिजाई कर रहे हैं। इस फसल को किसान अपने लिए और बिक्री के लिए भी रखते हैं।
12-32-16 खाद की मांग भी बढ़ी
बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में मक्की की बिजाई शुरू होने से 12-32-16 खाद की मांग भी बढ़ी है। यह खाद फसल की बिजाई के समय इस्तेमाल होती है। इस खाद के डालने से बीज में पौधा अच्छे तरीके से अंकुरित होता है। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद की खरीद कर रहे हैं। इसके लिए इफको और अन्य खाद के गोदामों में प्रतिदिन किसान पहुंच रहे हैं।

ऊना के बंगाणा क्षेत्र में मक्की की बिजाई में जुटा ट्रैक्टर चालक। स्रोत संवाद