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Una News: जिले में खून से प्लेटलेट अलग करने की मशीन नहीं
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आशुतोष डोगरा
ऊना। जिले में मरीजों को जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट के लिए भटकना पड़ता है। मरीजों को प्लेटलेट के लिए या तो पंजाब के निजी अस्पतालों या फिर टांडा मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार समय रहते प्लेटलेट न चढ़ने से मरीज दम भी तोड़ देता है। तेजी से विकसित हो रहे ऊना जिले में खून से प्लेटलेट अलग करने वाली मशीन नहीं लग पाई। समस्या को कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया।
लोगों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग व विभिन्न सामाजिक संगठनों की तरफ से रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान कई यूनिट रक्त एकत्रित हो जाता है। जिले में मरीज को खून की कमी होने पर रक्त चढ़ाने के लिए तो पूरी व्यवस्था है लेकिन प्लेटलेट चढ़ाने के लिए जिले भर में कोई व्यवस्था नहीं है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। वर्तमान में प्लेटलेट के लिए जिले से बाहर पंजाब के निजी अस्पताल व टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए जाना पड़ता है। प्लेटलेट की मात्रा 25 हजार के नीचे जाने के बाद इसकी जरूरत पड़ती है।
समय पर प्लेटलेट न चढ़ने से कई बार हो जाती है मौत
जिले में कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। जांच के दौरान मरीजों में डॉक्टर्स प्लेटलेट कम होने की शिकायत बताते हैं। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे क्षेत्रीय अस्पताल, टांडा मेडिकल कॉलेज या फिर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया जाता है। अगर क्षेत्रीय अस्पताल में ही प्लेटलेट चढ़ाने के लिए मशीन लग जाए तो कई लोगों की जान को बचाया जा सकता है।
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क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि अस्पताल में अभी तक केवल खून चढ़ाने की सुविधा है। प्लेटलेट चढ़ाने के लिए अभी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया गया है।
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ऊना। जिले में मरीजों को जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट के लिए भटकना पड़ता है। मरीजों को प्लेटलेट के लिए या तो पंजाब के निजी अस्पतालों या फिर टांडा मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार समय रहते प्लेटलेट न चढ़ने से मरीज दम भी तोड़ देता है। तेजी से विकसित हो रहे ऊना जिले में खून से प्लेटलेट अलग करने वाली मशीन नहीं लग पाई। समस्या को कई बार विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया।
लोगों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग व विभिन्न सामाजिक संगठनों की तरफ से रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान कई यूनिट रक्त एकत्रित हो जाता है। जिले में मरीज को खून की कमी होने पर रक्त चढ़ाने के लिए तो पूरी व्यवस्था है लेकिन प्लेटलेट चढ़ाने के लिए जिले भर में कोई व्यवस्था नहीं है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। वर्तमान में प्लेटलेट के लिए जिले से बाहर पंजाब के निजी अस्पताल व टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए जाना पड़ता है। प्लेटलेट की मात्रा 25 हजार के नीचे जाने के बाद इसकी जरूरत पड़ती है।
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समय पर प्लेटलेट न चढ़ने से कई बार हो जाती है मौत
जिले में कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। जांच के दौरान मरीजों में डॉक्टर्स प्लेटलेट कम होने की शिकायत बताते हैं। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे क्षेत्रीय अस्पताल, टांडा मेडिकल कॉलेज या फिर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया जाता है। अगर क्षेत्रीय अस्पताल में ही प्लेटलेट चढ़ाने के लिए मशीन लग जाए तो कई लोगों की जान को बचाया जा सकता है।
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क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि अस्पताल में अभी तक केवल खून चढ़ाने की सुविधा है। प्लेटलेट चढ़ाने के लिए अभी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया गया है।