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Una News: कर छूट खत्म होते ही अंबेहड़ा में 26 उद्योग बंद
Sat, 03 Oct 2026 12:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:21 AM IST
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बड़ूही (ऊना)। पिछड़े क्षेत्र में उद्योग लाने के लिए सरकार ने कर रियायत दी, निवेशकों ने अंबेहड़ा का रुख किया और करीब 30 औद्योगिक इकाइयां स्थापित भी हुईं। लेकिन प्रोत्साहन योजना की अवधि पूरी होने के बाद इन इकाइयों की रफ्तार थम गई। अब पंचायत क्षेत्र में महज तीन से चार इकाइयां ही संचालित हैं। जबकि 26 उद्योग के बंद हो चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2004 और इंसेंटिव रूल्स-2004 के तहत अंबेहड़ा धीरज, प्लाहटा और सयाना समेत कुछ क्षेत्रों को औद्योगिक प्रोत्साहन के दायरे में रखा गया था। कैटेगरी-सी के पिछड़े क्षेत्रों और अधिसूचित पिछड़ी पंचायतों को पार्शियल कर मुक्त क्षेत्र का दर्जा देकर पात्र नई इकाइयों को बिक्री कर में रियायत दी गई थीं। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना था।
शुरुआत में योजना का असर भी दिखा और कई उद्यमियों ने यहां इकाइयां स्थापित कीं। बाद में जमीन की उपलब्धता, बढ़ती कीमतें, सड़क संपर्क और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं चुनौती बनती गईं। भूमि मालिकों की सहमति नहीं मिलने से कनेक्शन लेने में भी अड़चनें आईं।
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उद्यमियों के अनुसार, 2011 से 2015 के बीच स्थापित कुछ इकाइयों को बाद में दो प्रतिशत अतिरिक्त एंट्री टैक्स का सामना करना पड़ा। निवेश के समय जिस कर राहत को ध्यान में रखा गया था, उसमें बदलाव से उत्पादन लागत बढ़ी और कारोबार चलाना कठिन हुआ। स्थानीय लोगों प्रभात कुमार, गणेश कुमार, रामपाल शर्मा और जनक राज ने आरोप लगाया कि सभी इकाइयों में वास्तविक उत्पादन नहीं हुआ।
योजना के तहत करीब 30 इकाइयां स्थापित हुई थीं लेकिन वर्तमान में तीन से चार ही चल रही हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी और नीतिगत बदलावों के कारण क्षेत्र को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
- योगराज योगी उद्योगपति, अंबेहड़ा
जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में टैक्स एक समान हाेने से उद्योगपतियों ने यहां से पलायन कर लिया है।
- महेश साहनी, उद्योगपति अंबेहड़ा
योजना दस वर्ष के लिए थी और इस दौरान कई लोगों ने इसका लाभ उठाया। स्थानीय स्तर पर सामने आई विभिन्न समस्याओं के कारण क्षेत्र में अपेक्षा के अनुरूप अधिक उद्योग स्थापित नहीं हो सके।
-अंशुल धीमन, संयुक्त निदेशक उद्योग ऊना
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हिमाचल प्रदेश इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2004 और इंसेंटिव रूल्स-2004 के तहत अंबेहड़ा धीरज, प्लाहटा और सयाना समेत कुछ क्षेत्रों को औद्योगिक प्रोत्साहन के दायरे में रखा गया था। कैटेगरी-सी के पिछड़े क्षेत्रों और अधिसूचित पिछड़ी पंचायतों को पार्शियल कर मुक्त क्षेत्र का दर्जा देकर पात्र नई इकाइयों को बिक्री कर में रियायत दी गई थीं। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना था।
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शुरुआत में योजना का असर भी दिखा और कई उद्यमियों ने यहां इकाइयां स्थापित कीं। बाद में जमीन की उपलब्धता, बढ़ती कीमतें, सड़क संपर्क और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं चुनौती बनती गईं। भूमि मालिकों की सहमति नहीं मिलने से कनेक्शन लेने में भी अड़चनें आईं।
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उद्यमियों के अनुसार, 2011 से 2015 के बीच स्थापित कुछ इकाइयों को बाद में दो प्रतिशत अतिरिक्त एंट्री टैक्स का सामना करना पड़ा। निवेश के समय जिस कर राहत को ध्यान में रखा गया था, उसमें बदलाव से उत्पादन लागत बढ़ी और कारोबार चलाना कठिन हुआ। स्थानीय लोगों प्रभात कुमार, गणेश कुमार, रामपाल शर्मा और जनक राज ने आरोप लगाया कि सभी इकाइयों में वास्तविक उत्पादन नहीं हुआ।
योजना के तहत करीब 30 इकाइयां स्थापित हुई थीं लेकिन वर्तमान में तीन से चार ही चल रही हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी और नीतिगत बदलावों के कारण क्षेत्र को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
- योगराज योगी उद्योगपति, अंबेहड़ा
जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में टैक्स एक समान हाेने से उद्योगपतियों ने यहां से पलायन कर लिया है।
- महेश साहनी, उद्योगपति अंबेहड़ा
योजना दस वर्ष के लिए थी और इस दौरान कई लोगों ने इसका लाभ उठाया। स्थानीय स्तर पर सामने आई विभिन्न समस्याओं के कारण क्षेत्र में अपेक्षा के अनुरूप अधिक उद्योग स्थापित नहीं हो सके।
-अंशुल धीमन, संयुक्त निदेशक उद्योग ऊना