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Una News: निजी स्कूल बस की खिड़की के शीशे टूटे, जुगाड़ से चलाया जा रहा काम
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बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे, परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में
मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की बसों में सुरक्षा रामभरोसे
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की टूटी-फूटी बसों को जुगाड़ के जरिये चलाया जा रहा है। गगरेट क्षेत्र में एक निजी स्कूल बस की खिड़की के शीशे टूटे हैं। इसे जुगाड़ के जरिये मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। लगभग एक महीने से टूटी खिड़की का शीशा वहीं फंसा हुआ है और उसके टुकड़े अब भी खिड़की में लगे हैं।
न तो स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर मामले पर ध्यान दिया, न ही बच्चों के अभिभावक इस खतरे के प्रति जागरूक दिखाई दिए। बड़ी-बड़ी सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के दावे करने वाले इस स्कूल की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए बस की खिड़की पर लोहे के पाइप से जुगाड़ कर रखा है, जिसे कपड़े के टुकड़े से बांधा गया है। यह न केवल बच्चों की सुरक्षा को राम भरोसे छोड़ने जैसा है, बल्कि स्कूल प्रशासन के सुरक्षा दावों और उसकी लापरवाह कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।स्थानीय लोग कहते हैं कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है। प्रबुद्ध वर्ग ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और स्कूल प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाए, ताकि भविष्य में बच्चों की सुरक्षा खतरे में न पड़े। इस संबंध में आरटीओ ऊना अशोक कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों का निरीक्षण किया जाएगा और जो भी उचित कार्रवाई होगी, अमल में लाई जाएगी।
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मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की बसों में सुरक्षा रामभरोसे
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की टूटी-फूटी बसों को जुगाड़ के जरिये चलाया जा रहा है। गगरेट क्षेत्र में एक निजी स्कूल बस की खिड़की के शीशे टूटे हैं। इसे जुगाड़ के जरिये मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। लगभग एक महीने से टूटी खिड़की का शीशा वहीं फंसा हुआ है और उसके टुकड़े अब भी खिड़की में लगे हैं।
न तो स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर मामले पर ध्यान दिया, न ही बच्चों के अभिभावक इस खतरे के प्रति जागरूक दिखाई दिए। बड़ी-बड़ी सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के दावे करने वाले इस स्कूल की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए बस की खिड़की पर लोहे के पाइप से जुगाड़ कर रखा है, जिसे कपड़े के टुकड़े से बांधा गया है। यह न केवल बच्चों की सुरक्षा को राम भरोसे छोड़ने जैसा है, बल्कि स्कूल प्रशासन के सुरक्षा दावों और उसकी लापरवाह कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।स्थानीय लोग कहते हैं कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती है। प्रबुद्ध वर्ग ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और स्कूल प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाए, ताकि भविष्य में बच्चों की सुरक्षा खतरे में न पड़े। इस संबंध में आरटीओ ऊना अशोक कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों का निरीक्षण किया जाएगा और जो भी उचित कार्रवाई होगी, अमल में लाई जाएगी।
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