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Una News: विद्यार्थियों ने श्लोक पाठ और गीतों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं
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बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना के तीन जिलों के 77 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
10 दिनों में छात्रों ने संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
जोल (ऊना)। हिमाचल प्रदेश संस्कृत भारती (न्यास) की ओर से 1 से 10 जनवरी तक ग्राम पंचायत अंबेहड़ा धीरज के गांव अटया स्थित सुंदर नारायण गुरुकुलम में संस्कृत प्रबोधन वर्ग का सफल आयोजन किया गया। इसमें बिलासपुर, हमीरपुर व ऊना जिलों के संस्कृत महाविद्यालयों डंगार, पंजगाई, चकमोह व डोहगी से 77 विद्यार्थी, शिक्षक एवं प्रबंधक शामिल हुए। समापन समारोह में मुख्य अतिथि उद्योगपति एवं समाजसेवी योगेश शर्मा रहे। सारस्व अतिथि रमेशचंद शास्त्री, विशिष्ट अतिथि पंडित शिवकुमार शास्त्री तथा मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत भारती ऊना जिला अध्यक्ष शास्त्री बृजमोहन ने की।
मुख्य शिक्षक गणेशदत्त वशिष्ट ने बताया कि वर्ग में विद्यार्थियों की दिनचर्या पूर्णतः संस्कृत में थी और 10 दिनों में छात्रों ने संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाया। समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने संस्कृत संभाषण, श्लोक पाठ व गीतों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्कृत के जनभाषा बनने से समाज संस्कारित होगा। कुल मिलाकर यह 10 दिवसीय प्रबोधन वर्ग अत्यंत सफल व संस्कृत के उत्थान की दिशा में सराहनीय प्रयास रहा।
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10 दिनों में छात्रों ने संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
जोल (ऊना)। हिमाचल प्रदेश संस्कृत भारती (न्यास) की ओर से 1 से 10 जनवरी तक ग्राम पंचायत अंबेहड़ा धीरज के गांव अटया स्थित सुंदर नारायण गुरुकुलम में संस्कृत प्रबोधन वर्ग का सफल आयोजन किया गया। इसमें बिलासपुर, हमीरपुर व ऊना जिलों के संस्कृत महाविद्यालयों डंगार, पंजगाई, चकमोह व डोहगी से 77 विद्यार्थी, शिक्षक एवं प्रबंधक शामिल हुए। समापन समारोह में मुख्य अतिथि उद्योगपति एवं समाजसेवी योगेश शर्मा रहे। सारस्व अतिथि रमेशचंद शास्त्री, विशिष्ट अतिथि पंडित शिवकुमार शास्त्री तथा मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत भारती ऊना जिला अध्यक्ष शास्त्री बृजमोहन ने की।
मुख्य शिक्षक गणेशदत्त वशिष्ट ने बताया कि वर्ग में विद्यार्थियों की दिनचर्या पूर्णतः संस्कृत में थी और 10 दिनों में छात्रों ने संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाया। समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने संस्कृत संभाषण, श्लोक पाठ व गीतों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्कृत के जनभाषा बनने से समाज संस्कारित होगा। कुल मिलाकर यह 10 दिवसीय प्रबोधन वर्ग अत्यंत सफल व संस्कृत के उत्थान की दिशा में सराहनीय प्रयास रहा।
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