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मां पद्मावती की गाथा सभी संतों और व्यासपीठों को सुनानी चाहिए : सत्यदेवानंद

Sat, 05 Jul 2025 05:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jul 2025 05:46 PM IST
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The story of Maa Padmavati should be narrated to all saints and platforms: Satyadevanand
संवाद न्यूज एजेंसी
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घनारी (ऊना)। आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र में डंगोह खास के गूग्गा जाहर वीर मंदिर में 10 दिवसीय मां बगलामुखी महायज्ञ और प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। अखिल भारतीय संत परिषद के हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के प्रभारी यति सत्यदेवानंद ने महायज्ञ में पूर्ण आहुति के समय लोगों को मां पद्मावती की गाथा सुनाई। बताया कि 1300 ईस्वी के काल खंड में कैसे खिलजी नाम के मुसलमान बादशाह की गाज चितौड़गढ़ के किले पर गिरी थी। कैसे उस वक्त के चितौड़ के राजा रत्न सिंह और उसके राज्य के रण बांकुरों ने अपने धर्म और राज्य के लिए बलिदान दिए थे। अपनी पवित्रता बचाने के लिए कैसे 16 हजार महिलाओं ने हवन कुंड में अपना जौहर कर दिया था। कहा कि यह सभी धर्म गुरुओं तथा व्यासपीठों पर बैठे कथा वाचकों की जिम्मेदारी थी कि इस गाथा को अपनी हर कथा और प्रवचन में शामिल किया जाना चाहिए। समापन पर बच्चों ने शस्त्र प्रशिक्षण प्रहार करके तथा दंड की युद्ध कलाओं का प्रयोग करके दिखाया।
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