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Una News: कुटलैहड़ में फिर चली ‘आरी’, विजिलेंस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में उजागर हुआ अवैध कटान
Sat, 25 Oct 2025 06:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 25 Oct 2025 06:04 AM IST
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अवैध कटान। स्त्रोत: जागरूक पाठक
थानाकलांबंगाणा (ऊना)। कुटलैहड़ क्षेत्र में एक बार फिर जंगलों की हरियाली पर आरी चली है। कोठी गांव में सरकारी व निजी भूमि पर अवैध कटान का ताजा मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही विजिलेंस विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। गौर रहे कि इस क्षेत्र में पहले भी करोड़ों रुपये के खैर केेे पेड़ों की तस्करी हो चुकी है।
वन विभाग के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि सरकारी भूमि से 5 खैर के पेड़ काटे गए थे, जिन्हें विभाग ने मौके से रेस्क्यू कर लिया है। वहीं, निजी (मलकीत) भूमि से 8 खैर के पेड़ काटे जाने की पुष्टि हुई है, जिनकी लकड़ी अभी विभाग की पकड़ से बाहर बताई जा रही है।
इससे पहले भी इस क्षेत्र में करोड़ों रुपये के खैर के पेड़ों की अवैध तस्करी हो चुकी है, जिससे राज्य की वन संपदा को भारी क्षति पहुंची थी। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद विभागीय निगरानी में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार कार्रवाई को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटा लिए हैं और अवैध कटान में शामिल लोगों की पहचान कर जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का अंजाम कभी शुभ नहीं होता। जंगलों का विनाश न केवल पर्यावरण को बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी खतरे में डालता है। यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो लालच में आकर हरे-भरे जंगलों को उजाड़ रहे हैं।
विजिलेंस विभाग ने वन विभाग को सचेत किया है और मामला वन विभाग को ही सौंप दिया है। शिकायत के आधार पर विजिलेंस विभाग ने वन विभाग को जानकारी दी।
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वन विभाग के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि सरकारी भूमि से 5 खैर के पेड़ काटे गए थे, जिन्हें विभाग ने मौके से रेस्क्यू कर लिया है। वहीं, निजी (मलकीत) भूमि से 8 खैर के पेड़ काटे जाने की पुष्टि हुई है, जिनकी लकड़ी अभी विभाग की पकड़ से बाहर बताई जा रही है।
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इससे पहले भी इस क्षेत्र में करोड़ों रुपये के खैर के पेड़ों की अवैध तस्करी हो चुकी है, जिससे राज्य की वन संपदा को भारी क्षति पहुंची थी। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद विभागीय निगरानी में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार कार्रवाई को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटा लिए हैं और अवैध कटान में शामिल लोगों की पहचान कर जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का अंजाम कभी शुभ नहीं होता। जंगलों का विनाश न केवल पर्यावरण को बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी खतरे में डालता है। यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो लालच में आकर हरे-भरे जंगलों को उजाड़ रहे हैं।
विजिलेंस विभाग ने वन विभाग को सचेत किया है और मामला वन विभाग को ही सौंप दिया है। शिकायत के आधार पर विजिलेंस विभाग ने वन विभाग को जानकारी दी।