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Una News: खल ने खाली की जेब, दिन में तारे दिखा रहा तारामीरा
Wed, 30 Sep 2026 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 30 Sep 2026 11:29 PM IST
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बडूही (ऊना)। दुधारू पशुओं की खुराक में मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाला तारामीरा भी अब पशुपालकों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। पिछले करीब एक महीने में इसके दाम में 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। एक माह पहले उच्च गुणवत्ता का तारामीरा बाजार में करीब 70 रुपये प्रति किलो बिक रहा था जबकि अब इसका भाव बढ़कर करीब 90 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। तारामीरा के दाम बढ़ने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ गई है।
पहले ही बिनौला खल और पशु फीड के दाम लगातार बढ़ने से पशुओं को पालने की लागत में भारी इजाफा हो चुका है। बिनौला खल 57 रुपये प्रति किलो और फीड 32 रुपये प्रति किलो बिक रही है। अब तारामीरा महंगा होने से दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है। क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि दुधारू पशुओं को तारामीरा नियमित खुराक के तौर पर दिया जाता है। पशुपालकों के अनुसार मौजूदा कीमतों में पशुओं की खुराक का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है जबकि दूध के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि पशु आहार की बढ़ती कीमतों पर निगरानी रखी जाए और दुग्ध उत्पादकों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
ऊना से थोक व्यापारी अनिल कुमार के अनुसार तारामीरा के दाम बढ़ने के पीछे बाजार में इसकी आवक और उपलब्धता में कमी प्रमुख कारणों में शामिल है। तारामीरा मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में रबी मौसम में उगाया जाता है।
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तारामीरा के दाम में एक महीने के भीतर इतनी बढ़ोतरी होना पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। दुधारू पशुओं की खुराक में कटौती करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे दूध उत्पादन प्रभावित होने का डर रहता है। सरकार को पशु आहार की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
-बलवंत कुमार, पशु पालक, दियाड़ा
पिछले कुछ समय से तारामीरा की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बाजार में इसकी आवक पहले की तुलना में कम रहने से भी भाव बढ़े हैं। दुकानदारों के स्तर पर कीमत बढ़ाने के बजाय जिस भाव पर माल मिल रहा है, उसी के अनुसार बिक्री करनी पड़ रही है।
-सतीश मेहता, पशु आहार विक्रेता, बडूही
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पहले ही बिनौला खल और पशु फीड के दाम लगातार बढ़ने से पशुओं को पालने की लागत में भारी इजाफा हो चुका है। बिनौला खल 57 रुपये प्रति किलो और फीड 32 रुपये प्रति किलो बिक रही है। अब तारामीरा महंगा होने से दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है। क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि दुधारू पशुओं को तारामीरा नियमित खुराक के तौर पर दिया जाता है। पशुपालकों के अनुसार मौजूदा कीमतों में पशुओं की खुराक का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है जबकि दूध के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि पशु आहार की बढ़ती कीमतों पर निगरानी रखी जाए और दुग्ध उत्पादकों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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ऊना से थोक व्यापारी अनिल कुमार के अनुसार तारामीरा के दाम बढ़ने के पीछे बाजार में इसकी आवक और उपलब्धता में कमी प्रमुख कारणों में शामिल है। तारामीरा मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में रबी मौसम में उगाया जाता है।
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तारामीरा के दाम में एक महीने के भीतर इतनी बढ़ोतरी होना पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। दुधारू पशुओं की खुराक में कटौती करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे दूध उत्पादन प्रभावित होने का डर रहता है। सरकार को पशु आहार की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
-बलवंत कुमार, पशु पालक, दियाड़ा
पिछले कुछ समय से तारामीरा की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बाजार में इसकी आवक पहले की तुलना में कम रहने से भी भाव बढ़े हैं। दुकानदारों के स्तर पर कीमत बढ़ाने के बजाय जिस भाव पर माल मिल रहा है, उसी के अनुसार बिक्री करनी पड़ रही है।
-सतीश मेहता, पशु आहार विक्रेता, बडूही