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Una News: कुटलैहड़ औद्योगिक क्षेत्र में गैर संरक्षित वन भूमि का पेच
Wed, 14 Oct 2026 02:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:02 AM IST
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ऊना। कुटलैहड़ के बौल में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की मंजूरी के लिए एक बार फिर भूमि की स्थिति का पेच फंस गया है। उद्योग विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में 11 हेक्टेयर से अधिक भूमि दर्शाई गई है। चयनित भूमि में से नौ हेक्टेयर वन भूमि है। विभाग द्वारा इसी वन भूमि में से दो हेक्टेयर भूमि के गैर संरक्षित वन होने की आशंका जताई गई है। अब राजस्व विभाग की मदद से भूमि के राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
एफसीए की मंजूरी के दूसरे चरण में संबंधित कमेटी ने डीएफओ ऊना से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने दस्तावेजों की जांच की। विभाग के अनुसार, प्रस्ताव में शामिल करीब दो हेक्टेयर भूमि की श्रेणी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में उद्योग विभाग की ओर से बुधवार को बौल में चयनित भूमि की नाप-नपाई करवाई जा सकती है। इससे राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि गैर संरक्षित वन भूमि का कितना हिस्सा प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में शामिल है। वन विभाग इसी के आधार पर एफसीए को रिपोर्ट भेजेगा देगा।
यदि नाप-नपाई में गैर संरक्षित वन भूमि प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल पाई जाती है तो उद्योग विभाग को एफसीए की मंजूरी के लिए प्रस्ताव में संशोधन कर फाइल दोबारा तैयार करनी पड़ सकती है।
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पहले भी सामने आई थीं पांच खामियां
कुटलैहड़ में करीब 300 कनाल सरकारी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। अगस्त 2026 में उद्योग विभाग ने एफसीए कमेटी की ओर से बताई गई पांच खामियों को दूर कर प्रस्ताव दोबारा भेजा था। इनमें निजी भूमि की केएमएल फाइल में सड़क का ओवरलैप, स्थानीय रास्ते की स्थिति, वन भूमि की कानूनी श्रेणी, गैर वन भूमि के राजस्व रिकॉर्ड और परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज शामिल थे।
उद्योग विभाग द्वारा चयनित की गई भूमि की श्रेणी अन प्रोटेक्टड फोरेस्ट है या नहीं, अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर जाकर चयनित भूमि की डिमार्केशन करेगी। उसके बाद भी स्थिति स्पष्ट होगी।
-विकल्प यादव, डीएफओ ऊना
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एफसीए की मंजूरी के दूसरे चरण में संबंधित कमेटी ने डीएफओ ऊना से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने दस्तावेजों की जांच की। विभाग के अनुसार, प्रस्ताव में शामिल करीब दो हेक्टेयर भूमि की श्रेणी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में उद्योग विभाग की ओर से बुधवार को बौल में चयनित भूमि की नाप-नपाई करवाई जा सकती है। इससे राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि गैर संरक्षित वन भूमि का कितना हिस्सा प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में शामिल है। वन विभाग इसी के आधार पर एफसीए को रिपोर्ट भेजेगा देगा।
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यदि नाप-नपाई में गैर संरक्षित वन भूमि प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल पाई जाती है तो उद्योग विभाग को एफसीए की मंजूरी के लिए प्रस्ताव में संशोधन कर फाइल दोबारा तैयार करनी पड़ सकती है।
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पहले भी सामने आई थीं पांच खामियां
कुटलैहड़ में करीब 300 कनाल सरकारी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। अगस्त 2026 में उद्योग विभाग ने एफसीए कमेटी की ओर से बताई गई पांच खामियों को दूर कर प्रस्ताव दोबारा भेजा था। इनमें निजी भूमि की केएमएल फाइल में सड़क का ओवरलैप, स्थानीय रास्ते की स्थिति, वन भूमि की कानूनी श्रेणी, गैर वन भूमि के राजस्व रिकॉर्ड और परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज शामिल थे।
उद्योग विभाग द्वारा चयनित की गई भूमि की श्रेणी अन प्रोटेक्टड फोरेस्ट है या नहीं, अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर जाकर चयनित भूमि की डिमार्केशन करेगी। उसके बाद भी स्थिति स्पष्ट होगी।
-विकल्प यादव, डीएफओ ऊना