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Una News: डमी दाखिलों का खेल, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के गठजोड़ से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
Tue, 20 Jan 2026 06:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:09 AM IST
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ऊना। जिले में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। कई निजी स्कूलों में डमी दाखिले कर बच्चों को नियमित पढ़ाई से दूर रखते हुए कोचिंग संस्थानों में भेजा जा रहा है। नियमों के खिलाफ चल रहे इस खेल में कुछ निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की आपसी मिलीभगत सामने आ रही है जबकि शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सूत्रों के अनुसार, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के कई विद्यार्थियों का नाम केवल कागजों में स्कूलों में दर्ज है जबकि वे पूरा समय बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में उनकी उपस्थिति नाममात्र या पूरी तरह फर्जी दिखाई जा रही है। इसके बदले स्कूलों को मोटी फीस मिल रही और कोचिंग संस्थान छात्रों की संख्या बढ़ाकर अपना व्यवसाय चमका रहे हैं।
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बचपन पर पड़ रहा असर
शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूल की उम्र में बच्चों को कोचिंग के दबाव में डालना उनके मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास के लिए घातक है। न तो उन्हें खेलकूद का अवसर मिल रहा है और न ही सहपाठियों के साथ सीखने-समझने का माहौल। प्रतियोगी परीक्षा की होड़ में बचपन ही छीना जा रहा है।
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नियमों की खुलेआम अनदेखी
शिक्षा नियमों के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्कूलों में नियमित कक्षाएं, न्यूनतम उपस्थिति और पाठ्यक्रम का पालन अनिवार्य है। इसके बावजूद डमी दाखिलों का यह सिलसिला वर्षों से जारी है। अभिभावकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग केवल औपचारिकता निभाता है।
कार्रवाई की मांग तेज
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने शिक्षा विभाग से जिले के सभी निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की संयुक्त जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो यह अवैध व्यवस्था बच्चों के भविष्य को गहरे संकट में डाल देगी। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब तक आंखें मूंदे रहता है या फिर डमी दाखिलों के इस खेल पर लगाम कसने के लिए ठोस कदम उठाता है।
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार तक्खी ने बताया कि डमी दाखिलों को लेकर संदिग्ध स्कूलों में पड़ताल की जाएगी। अगर ऐसे मामले सामने आए तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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सूत्रों के अनुसार, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के कई विद्यार्थियों का नाम केवल कागजों में स्कूलों में दर्ज है जबकि वे पूरा समय बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में उनकी उपस्थिति नाममात्र या पूरी तरह फर्जी दिखाई जा रही है। इसके बदले स्कूलों को मोटी फीस मिल रही और कोचिंग संस्थान छात्रों की संख्या बढ़ाकर अपना व्यवसाय चमका रहे हैं।
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बचपन पर पड़ रहा असर
शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूल की उम्र में बच्चों को कोचिंग के दबाव में डालना उनके मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास के लिए घातक है। न तो उन्हें खेलकूद का अवसर मिल रहा है और न ही सहपाठियों के साथ सीखने-समझने का माहौल। प्रतियोगी परीक्षा की होड़ में बचपन ही छीना जा रहा है।
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नियमों की खुलेआम अनदेखी
शिक्षा नियमों के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्कूलों में नियमित कक्षाएं, न्यूनतम उपस्थिति और पाठ्यक्रम का पालन अनिवार्य है। इसके बावजूद डमी दाखिलों का यह सिलसिला वर्षों से जारी है। अभिभावकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग केवल औपचारिकता निभाता है।
कार्रवाई की मांग तेज
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने शिक्षा विभाग से जिले के सभी निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की संयुक्त जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो यह अवैध व्यवस्था बच्चों के भविष्य को गहरे संकट में डाल देगी। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब तक आंखें मूंदे रहता है या फिर डमी दाखिलों के इस खेल पर लगाम कसने के लिए ठोस कदम उठाता है।
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार तक्खी ने बताया कि डमी दाखिलों को लेकर संदिग्ध स्कूलों में पड़ताल की जाएगी। अगर ऐसे मामले सामने आए तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।