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Una News: परिवार अदालत ने दांपत्य जीवन बहाल करने की याचिका की मंजूर
Sun, 13 Sep 2026 12:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:37 AM IST
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दुलैहड़ (ऊना)। करीब 30 साल पहले हुई शादी के बाद पति-पत्नी साथ रह रहे थे। करीब साढ़े तीन साल पहले पत्नी घर छोड़कर पति से अलग रहने लगी। पति ने उसे वापस साथ लाने के लिए परिवार अदालत का दरवाजा खटखटाया।
पत्नी अदालत की ओर से उचित तरीके से नोटिस की तामील होने के बावजूद वह पेश नहीं हुई। इस पर उसे एकतरफा कर दिया गया। अब परिवार अदालत ऊना के प्रधान न्यायाधीश नरेश कुमार ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दांपत्य अधिकारों की बहाली की डिक्री पारित की है।
मामले के अनुसार, पति ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उसका विवाह करीब 30 वर्ष पहले ऊना जिले के अजोली में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था। शादी के बाद दोनों बसाल में रहने लगे। उनके एक बेटा भी है।
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पति के अनुसार, कुछ समय तक दोनों का दांपत्य जीवन सामान्य रहा लेकिन करीब साढ़े तीन साल पहले पत्नी छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा करने लगी और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगी।
पति ने अदालत को बताया कि वह रोजी-रोटी कमाने के सिलसिले में बाहर गया था। वापस घर पहुंचने पर पत्नी वहां नहीं मिली। उसने काफी तलाश की और उसके मायके वालों को भी इसकी जानकारी दी। पति का कहना था कि पत्नी अपने साथ आभूषण और अन्य कीमती सामान भी ले गई।
उसने मामले को सुलझाने के लिए महिला सेल में आवेदन दिया, जहां पत्नी को बुलाया गया लेकिन वह वहां भी नहीं पहुंची। इसके अलावा पंचायतों के माध्यम से भी विवाद सुलझाने के प्रयास किए गए लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
पति ने अदालत में कहा कि पत्नी ने बिना उचित कारण उसका साथ छोड़ा है। वह आज भी पत्नी को अपने साथ रखने और उसका भरण-पोषण करने के लिए तैयार है, बशर्ते वह वापस आकर उसके साथ रहे।
अदालत के समक्ष पत्नी को 16 फरवरी 2026 को उचित तरीके से नोटिस की तामील हुई लेकिन वह पेश नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने उसे एकतरफा कर दिया। पति ने बतौर गवाह अदालत में अपना बयान दर्ज कराया और अपनी गवाही पूरी की।
पत्नी की ओर से कोई प्रतिवाद नहीं किया गया। अदालत ने पति की गवाही को चुनौती या खंडित करने वाला कोई साक्ष्य सामने न आने पर उसे विश्वसनीय माना। अदालत ने पाया कि पत्नी करीब साढ़े तीन साल पहले बिना उचित कारण अपना वैवाहिक घर छोड़कर चली गई और इसके बाद पति के साथ नहीं रही।
इस आधार पर अदालत ने माना कि पत्नी ने जानबूझकर पति का साथ छोड़ा है। इन तथ्यों के आधार पर परिवार अदालत ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसके पक्ष में दांपत्य अधिकारों की बहाली की डिक्री पारित कर दी।
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पत्नी अदालत की ओर से उचित तरीके से नोटिस की तामील होने के बावजूद वह पेश नहीं हुई। इस पर उसे एकतरफा कर दिया गया। अब परिवार अदालत ऊना के प्रधान न्यायाधीश नरेश कुमार ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दांपत्य अधिकारों की बहाली की डिक्री पारित की है।
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मामले के अनुसार, पति ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उसका विवाह करीब 30 वर्ष पहले ऊना जिले के अजोली में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था। शादी के बाद दोनों बसाल में रहने लगे। उनके एक बेटा भी है।
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पति के अनुसार, कुछ समय तक दोनों का दांपत्य जीवन सामान्य रहा लेकिन करीब साढ़े तीन साल पहले पत्नी छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा करने लगी और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगी।
पति ने अदालत को बताया कि वह रोजी-रोटी कमाने के सिलसिले में बाहर गया था। वापस घर पहुंचने पर पत्नी वहां नहीं मिली। उसने काफी तलाश की और उसके मायके वालों को भी इसकी जानकारी दी। पति का कहना था कि पत्नी अपने साथ आभूषण और अन्य कीमती सामान भी ले गई।
उसने मामले को सुलझाने के लिए महिला सेल में आवेदन दिया, जहां पत्नी को बुलाया गया लेकिन वह वहां भी नहीं पहुंची। इसके अलावा पंचायतों के माध्यम से भी विवाद सुलझाने के प्रयास किए गए लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
पति ने अदालत में कहा कि पत्नी ने बिना उचित कारण उसका साथ छोड़ा है। वह आज भी पत्नी को अपने साथ रखने और उसका भरण-पोषण करने के लिए तैयार है, बशर्ते वह वापस आकर उसके साथ रहे।
अदालत के समक्ष पत्नी को 16 फरवरी 2026 को उचित तरीके से नोटिस की तामील हुई लेकिन वह पेश नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने उसे एकतरफा कर दिया। पति ने बतौर गवाह अदालत में अपना बयान दर्ज कराया और अपनी गवाही पूरी की।
पत्नी की ओर से कोई प्रतिवाद नहीं किया गया। अदालत ने पति की गवाही को चुनौती या खंडित करने वाला कोई साक्ष्य सामने न आने पर उसे विश्वसनीय माना। अदालत ने पाया कि पत्नी करीब साढ़े तीन साल पहले बिना उचित कारण अपना वैवाहिक घर छोड़कर चली गई और इसके बाद पति के साथ नहीं रही।
इस आधार पर अदालत ने माना कि पत्नी ने जानबूझकर पति का साथ छोड़ा है। इन तथ्यों के आधार पर परिवार अदालत ने पति की याचिका मंजूर करते हुए उसके पक्ष में दांपत्य अधिकारों की बहाली की डिक्री पारित कर दी।