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Una News: सांड ने मार डाला बुजुर्ग, धरातल पर व्यवस्था... आ बैल मुझे मार

Thu, 22 Aug 2024 04:03 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2024 04:03 AM IST
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The bull killed the old man, there is order on the ground... come bull kill me
ऊना-संतोषगढ़ सड़क पर जनकौर गांव से पैदल गुजर रहा था बुजुर्ग, बचाने आया व्यक्ति भी लहूलुहान, दो साल में 15 लोगों की मौत
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संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। लावारिस मवेशियों से निपटने के लिए भले ही कई अभियान चलाने का दावा किया जाता रहा है लेकिन धरातल पर व्यवस्था आ बैल मुझे मार जैसी है। अब पेखूवेला के केवल कृष्ण (60) को सांड ने पटक-पटक कर मार डाला। केवल मंगलवार रात 8:30 बजे ऊना-संतोषगढ़ सड़क मार्ग पर जनकौर गांव से पैदल गुजर रहे थे। इसी बीच सांड ने हमला कर दिया। घसीटते हुए सांड खेतों में ले गया और पटक-पटक कर केवल की जान ले ली।
यह सब कुछ देख रहे प्रेम पाल ने बचाने की कोशिश की लेकिन सांड ने उन्हें भी लहूलुहान कर दिया। इस घटना में बुजुर्ग की नहीं बल्कि उस सरकारी व्यवस्था की मौत भी हुई है, जिसके तहत मवेशियों को पकड़ने के दावे किए जाते हैं। ऊना जिला में दो साल के भीतर लावारिस पशुओं की टक्कर और हमले से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। गंभीर रूप से घायल हुए कई लोग आज भी इसका दंश झेल रहे हैं। जनकौर की घटना को मिलाकर अकेले अगस्त में ही तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
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घटना की सूचना मिलने के बाद एएसपी ऊना संजीव भाटिया व थाना प्रभारी मनोज वालिया सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना भेज दिया है। पुलिस स्थानीय लोगों से भी पूछताछ कर रही है। पशुपालन विभाग ने हमला करने वाले सांड को काफी मशक्कत के बाद पकड़ लिया है। सांड को गोसदन थालाकलां में छोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि गगरेट, अंब और संतोषगढ़ से जुड़े सड़क मार्गों पर लावारिस मवेशियों की समस्या सबसे अधिक है। जगह-जगह पशुओं के झुंड बने रहते हैं। राहगीरों का पैदल गुजरना मुश्किल हो जाता है।
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पड़ोसी राज्यों से छोड़े जा रहे लावारिस मवेशी : सत्ती
पड़ोसी राज्यों से छोड़े जा रहे लावारिस मवेशी लोगों के लिए काल बने हुए हैं। खनन माफिया को सुरक्षा देने और एस्कॉर्ट करने में व्यस्त पुलिस की नाक के तले पंजाब और अन्य राज्यों के लोग मवेशियों को छोड़कर मुसीबतों को बढ़ा रहे हैं। - सतपाल सिंह सत्ती, ऊना सदर के भाजपा विधायक
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लावारिस मवेशियों के कारण कीमती जानें चली गईं। जहां यह समस्या अधिक है, वहां पुलिस ने सड़क मार्गों के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। इस समस्या का शत प्रतिशत समाधान लोगों की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। पहले तो स्वयं आवारा पशुओं काे सड़कों पर न छोड़ें। अगर कोई ऐसा करता नजर आए तो पुलिस को सूचित करें। - राकेश सिंह, पुलिस अधीक्षक ऊना।
सांड के हमले से एक व्यक्ति की मौत हुई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। घायल प्रेम का भी क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार करवाया जा रहा है। - संजीव भाटिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऊना
लावारिस मवेशियों की रोकथाम के लिए बीते वर्षों में कई योजनाएं लागू की गईं। गोशालाओं में भी सैकड़ों पशुओं का पालन पोषण हो रहा है। लेकिन वहां भी क्षमता से अधिक पशु हो चुके हैं। यह समस्या लोगों के सहयोग से ही खत्म होगी। पशु कहीं बाहर से नहीं आते। हमारे लोग ही इन्हें सड़कों पर छोड़ रहे हैं। - डॉ. विनय शर्मा, उपनिदेशक, जिला पशुपालन विभाग
कुछ साल पहले हमारे गांव में एक आवारा पशु ने हमला कर सेवानिवृत्त कैप्टन की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी थी। लोगों का सैर पर निकलना जोखिम भरा हो चुका है। पशुपालन विभाग ने कुछ साल पहले पशुओं के कानों में टैग लगाए। कई लावारिस पशुओं को वह आज भी लगे हैं। उनके जरिए पशुओं के मालिकों की पहचान होनी चाहिए। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
- सरदार रणजीत सिंह, हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष
लावारिस पशुओं की रोकथाम में लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इस समस्या से हमारे ही लोग मौत का ग्रास बन रहे हैं। प्रशासन को भी इसके लिए पुख्ता योजना बनानी चाहिए।
- हरप्रीत सिंह, निवासी पंजावर गांव
गांवों में लावारिस पशु पहले लोगों की फसलें उजाड़ देते थे। अब लोगों की मौत की वजह बन चुके हैं। रात के अंधेरे में वाहनों की लाइट में भी कई बार पशु नजर नहीं आते। कई बार पशुओं को सड़कों से हटाएं तो वे हमला कर देते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए पुख्ता व्यवस्था करने की जरूरत है। - सुनील कुमार, पंडोगा गांव के किसान
ऊना-धर्मशाला सड़क मार्ग पर वाहनों की स्पीड 100 किमी प्रति घंटा के आसपास होती है। ऐसे में अगर कोई पशु सामने आता है तो हादसा हो जाता है। सड़कों के आसपास के क्षेत्र इस समस्या से मुक्त करने चाहिए। नहीं तो हादसे होते रहेंगे। - संदीप कुमार, किसान
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इस साल ये गंवा चुके हैं अपनी जान
बीते 18 अगस्त को पुलिस थाना मैहतपुर के तहत चड़तगढ़ में प्रवासी युवक की मौके पर ही मौत हो गई। युवक मोहित चड़तगढ़ में बाइक पर सवार होकर जा रहा था। इसी बीच लावारिस पशु आने से बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। हादसे में मोहित की मौत हो गई।
9 अगस्त को पुलिस थाना गगरेट के तहत मवा सिंधिया में बाइक सवार जसवीर सिंह की बाइक पशु की चपेट में आ गई। हादसे में जसवीर सिंह गंभीर रूप से चोटिल हो गया। लोगों की सहायता से उसे गगरेट अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया।

जुलाई माह में गगरेट के ओयल गांव के एक युवक की बाइक के आगे नील गाय के आने से मौत हो गई। ओयल गांव का 30 वर्षीय युवक नीरज डढवाल बुधवार देर रात एक समारोह में भाग लेने के बाद बाइक पर घर लौट रहा था।

बीती 10 जुलाई को दौलतपुर चौक-गगरेट रोड पर दंपती सहित गाय की मौत हो गई। मृतक दंपती विक्रम सिंह (55) व वंदना (52) ढोलवाहा (पंजाब) से अपनी जठेरी माथा टेकने गगरेट जा रहे थे।

मई माह में भी गगरेट के बड़ोह-थपलां मार्ग पर एक नीलगाय को बचाने के चक्कर में 62 वर्षीय स्कूटी चालक राकेश शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई थी।
बीते 12 जून को पंडोगा बैरियर के पास एक ट्रैक्टर पलट गया। हादसे की वजह ट्रैक्टर के आगे मवेशी आना बताया गया। हादसे में दो युवकों 19 साल के कुलविंदर और 30 साल के सूरज की मौत हो गई।
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