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Una News: अव्यवस्था में जल रहे गरीबों के अरमान, व्यवस्था के नाम पर केवल निर्देश

Sun, 28 Jun 2026 06:25 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sun, 28 Jun 2026 06:25 AM IST
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The aspirations of the poor are burning in chaos, only instructions are given in the name of system.
ऊना। लालसिंगी की झुग्गी बस्ती में शनिवार सुबह भड़की आग ने सिर्फ 29 झुग्गियों को ही नहीं जलाया बल्कि प्रशासनिक दावों और व्यवस्थाओं की भी परतें उधेड़ कर रख दीं। महज दो महीने पहले इसी क्षेत्र में लगी भीषण आग में करीब 30 झुग्गियां राख हो गई थीं। उस समय प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए। कच्ची झुग्गियों के स्थान पर पक्के शेड बनाने के निर्देश भी दिए गए लेकिन समय बीतता गया, निर्देश कागजों तक सीमित रहे और शनिवार को इतिहास ने खुद को फिर दोहरा दिया।
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शनिवार सुबह जब लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे तभी एक झुग्गी से उठी आग की लपटें देखते ही देखते पूरी बस्ती में फैल गईं। कुछ ही देर में परिवार अपने सामान को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। बच्चों की चीख-पुकार, महिलाओं की बेबसी और आग की ऊंची लपटों ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दो महीने पहले हुई घटना के बाद सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लागू किया गया होता तो क्या आज यह स्थिति पैदा होती। आग की पहली घटना के बाद प्रशासन ने पक्के शेड बनाने और झुग्गियों को सुरक्षित ढंग से व्यवस्थित करने की बात कही थी। प्रभावित परिवारों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें हर समय आग और बारिश के खतरे के बीच नहीं जीना पड़ेगा। मगर जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया। लालसिंगी की यह बस्ती लंबे समय से अस्थायी आशियानों के सहारे जीवन बिता रही है। गर्मी के मौसम में प्लास्टिक, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री से बनी झुग्गियां आग की घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील रहती हैं। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर आश्वासन तो देते हैं लेकिन समय के साथ सारे वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। शनिवार की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गरीबों की सुरक्षा से जुड़े निर्णय केवल बैठकों और फाइलों तक ही क्यों सीमित रह जाते हैं।
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प्रशासन की तरफ से पीड़ित परिवारों को प्रति परिवार दो हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है। बार-बार हो रही इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा जिसमें भूमि मालिकों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
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-अभिषेक मित्तल, उपमंडलाधिकारी ऊना
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