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वाटर स्पोर्ट्स को लेकर पर्यटक नहीं दिखा रहे रूचि
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ऊना। गोबिंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स की शुरू की गई गतिविधियों को अभी पर्यटकों का रिस्पांस नहीं मिल रहा है। पानी में साहसिक पर्यटन की गतिविधियों में पर्यटकों की कोई खास दिलचस्पी अभी तक नहीं दिखी है। ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर इस ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिये कुटलैहड़ के पर्यटन को पंख लगाना चाह रहे हैं लेकिन पर्यटकों के रुख को देखते हुए अभी तक कोई खास उम्मीद नहीं बंधी है।
सर्दियों में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को गर्मियों में रिस्पांस मिलने की उम्मीद थी, लेकिन संचालक की मानें तो केवल वीकेंड या छुट्टी वाले दिन ही पर्यटक पहुंच रहे हैं। अन्य दिनों में कोई रिस्पांस नहीं है। हालत यह है कि डीजल तक का खर्चा पूरा नहीं हो पाता है। वाटर स्पोर्ट्स के लिए फिलहाल रायपुर में गोबिंद सागर झील पर सात सीटर बोट व दो सीटर स्कूटर चलाया जा रहा है। इन दोनों के लिए ऑपरेटर रखे गए हैं। शुरूआती दौर में बोट व स्कूटर दोनों को देखने के लिए काफी लोग पहुंचे, लेकिन सवारी कम ही लोगों ने की। इसका कारण ठंड भी माना जा रहा था, लेकिन अब गर्मी के बीच भी कोई खास रुचि देखने को नहीं मिल रही है। जानकारों का कहना है कि पर्यटक केवल एक ही गतिविधि के लिए इतनी दूर नहीं पहुंचता है। रायपुर में वाटर स्पोर्ट्स के नाम पर केवल बोटिंग व स्कूटर ही उपलब्ध है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां अन्य गतिविधियां भी होना जरूरी है। उधर, रायपुर में गोबिंद सागर झील पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि संचालित करने वाले अभय पराशर ने बताया कि पर्यटक कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वीकेंड या छुट्टी वाले दिन ही कुछ पर्यटक पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों को प्रति सवारी 500 रुपये किराया अधिक लग रहा है। जबकि बोट में एक फेरे पर तेल का अधिक खर्चा होता है।
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सर्दियों में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को गर्मियों में रिस्पांस मिलने की उम्मीद थी, लेकिन संचालक की मानें तो केवल वीकेंड या छुट्टी वाले दिन ही पर्यटक पहुंच रहे हैं। अन्य दिनों में कोई रिस्पांस नहीं है। हालत यह है कि डीजल तक का खर्चा पूरा नहीं हो पाता है। वाटर स्पोर्ट्स के लिए फिलहाल रायपुर में गोबिंद सागर झील पर सात सीटर बोट व दो सीटर स्कूटर चलाया जा रहा है। इन दोनों के लिए ऑपरेटर रखे गए हैं। शुरूआती दौर में बोट व स्कूटर दोनों को देखने के लिए काफी लोग पहुंचे, लेकिन सवारी कम ही लोगों ने की। इसका कारण ठंड भी माना जा रहा था, लेकिन अब गर्मी के बीच भी कोई खास रुचि देखने को नहीं मिल रही है। जानकारों का कहना है कि पर्यटक केवल एक ही गतिविधि के लिए इतनी दूर नहीं पहुंचता है। रायपुर में वाटर स्पोर्ट्स के नाम पर केवल बोटिंग व स्कूटर ही उपलब्ध है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां अन्य गतिविधियां भी होना जरूरी है। उधर, रायपुर में गोबिंद सागर झील पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि संचालित करने वाले अभय पराशर ने बताया कि पर्यटक कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वीकेंड या छुट्टी वाले दिन ही कुछ पर्यटक पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों को प्रति सवारी 500 रुपये किराया अधिक लग रहा है। जबकि बोट में एक फेरे पर तेल का अधिक खर्चा होता है।
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