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Una News: स्कूलों में बढ़ीं एसएमसी की जिम्मेदारियां, बिना परख हो रहीं नियुक्तियां
Wed, 15 Jul 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:39 AM IST
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ऊना। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विकास कार्यों की निगरानी के लिए गठित स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ाई जा रही हैं लेकिन इनके गठन में सदस्यों और प्रधानों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कई स्कूलों में ऐसे महिला और पुरुषों को एसएमसी प्रधान बना दिया गया, जिन्हें स्कूल संचालन, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होने की बात सामने आ रही है।
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में निर्माण कार्यों की निगरानी, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, विद्यार्थियों की सुविधाओं, आधारभूत ढांचे के रखरखाव और विभिन्न व्यवस्थाओं में एसएमसी की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण की गई है। इसके बावजूद कई स्थानों पर समिति गठन के दौरान पात्रता और क्षमता के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कुछ स्कूलों में एसएमसी की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। कई जगह बैठकों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, खेल सुविधाओं, आधारभूत संसाधनों और अन्य आवश्यक मुद्दों पर गंभीर चर्चा के बजाय केवल औपचारिक चायपान तक ही गतिविधियां सीमित रह जाती हैं। इससे समिति के गठन का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
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क्या कहते हैं अभिभावक
अभिभावक नरोत्तम शर्मा ने मांग उठाई कि कि स्कूल प्रबंधन समिति के गठन में पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता और जागरूकता को विशेष महत्व दिया जाए। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को शिक्षा के महत्व, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और स्कूल प्रबंधन की समझ ही नहीं होगी तो वह विद्यालय के विकास में प्रभावी भूमिका कैसे निभा पाएगा।
अभिभावक हरजिंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में एसएमसी अध्यक्ष बनने के लिए संबंधित अभिभावक का बच्चा उसी स्कूल में अध्ययनरत होना, नैतिक चरित्र, निष्ठा और पारदर्शी व लोकतांत्रिक चुनाव जैसी शर्तों पर जोर दिया जाता है। इसके साथ शैक्षणिक समझ और सामाजिक सक्रियता को भी चयन का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। गांव के प्रबुद्ध और शिक्षित लोगों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने से स्कूलों में शिक्षा, खेलकूद और आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि स्कूलों में एसएमसी का गठन तय मानकों के तहत होता है। इसमें शैक्षणिक योग्यता के मापदंड को लेकर कोई अलग से दिशा-निर्देश नहीं है। अगर इस संबंध में कोई आदेश जारी होते हैं तो निश्चित तौर पर उसी अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
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शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में निर्माण कार्यों की निगरानी, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, विद्यार्थियों की सुविधाओं, आधारभूत ढांचे के रखरखाव और विभिन्न व्यवस्थाओं में एसएमसी की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण की गई है। इसके बावजूद कई स्थानों पर समिति गठन के दौरान पात्रता और क्षमता के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार कुछ स्कूलों में एसएमसी की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। कई जगह बैठकों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता, खेल सुविधाओं, आधारभूत संसाधनों और अन्य आवश्यक मुद्दों पर गंभीर चर्चा के बजाय केवल औपचारिक चायपान तक ही गतिविधियां सीमित रह जाती हैं। इससे समिति के गठन का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
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क्या कहते हैं अभिभावक
अभिभावक नरोत्तम शर्मा ने मांग उठाई कि कि स्कूल प्रबंधन समिति के गठन में पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता और जागरूकता को विशेष महत्व दिया जाए। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को शिक्षा के महत्व, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और स्कूल प्रबंधन की समझ ही नहीं होगी तो वह विद्यालय के विकास में प्रभावी भूमिका कैसे निभा पाएगा।
अभिभावक हरजिंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में एसएमसी अध्यक्ष बनने के लिए संबंधित अभिभावक का बच्चा उसी स्कूल में अध्ययनरत होना, नैतिक चरित्र, निष्ठा और पारदर्शी व लोकतांत्रिक चुनाव जैसी शर्तों पर जोर दिया जाता है। इसके साथ शैक्षणिक समझ और सामाजिक सक्रियता को भी चयन का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। गांव के प्रबुद्ध और शिक्षित लोगों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने से स्कूलों में शिक्षा, खेलकूद और आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि स्कूलों में एसएमसी का गठन तय मानकों के तहत होता है। इसमें शैक्षणिक योग्यता के मापदंड को लेकर कोई अलग से दिशा-निर्देश नहीं है। अगर इस संबंध में कोई आदेश जारी होते हैं तो निश्चित तौर पर उसी अनुसार कार्यवाही की जाएगी।