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Una News: प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी, नर्सरी कक्षाओं ने और बढ़ाया बोझ
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सरकार और विभाग की ओर से बेहद धीमी गति से हो रही नियुक्तियां
कई अध्यापक हो रहे सेवानिवृत्त, विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर
वर्तमान में करीब 150 पद चल रहे हैं खाली, धीरे-धीरे कम हो रही बच्चों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों की कमी से नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू होने से शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। ऐसे में अध्यापकों के लिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारी के अनुसार जिले के प्राथमिक स्कूलों में करीब 150 पद खाली चल रहे हैं। बीते कुछ माह से नई नियुक्तियां हुई हैं लेकिन यह काफी नहीं हैं। अभी कई स्कूल ऐसे हैं, जहां दो अध्यापकों के सिर पर प्री नर्सरी सहित आठ कक्षाओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में अध्यापकों के लिए व्यवस्था संचालन से लेकर, कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाना काफी मुश्किल हो रहा है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा, महासचिव सत्येंद्र मिन्हास सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि अगस्त तक 200 से अधिक पद खाली चल रहे थे। स्कूलों में बच्चों की नियमित कक्षाएं लगाना मुश्किल हो रहा था। कई स्कूलों में नई नियुक्तियां हुई हैं, कई अभी राहत के इंतजार में हैं।
सुविधाओं का नहीं हो रहा इस्तेमाल
जिले के प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसका कारण अध्यापकों की कमी है। कई स्कूलों में तो ग्राम पंचायत और एसएमसी के सहयोग से अपने स्तर पर अध्यापक स्कूलों में रखे गए हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई पर असर न हो। आवश्यकता के अनुरूप अध्यापक न होने से बच्चों को उन सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा, जो स्कूल में मौजूद हैं। वहीं खेलों के क्षेत्र में भी बच्चे पिछड़ रहे हैं।
कोट्स
Iसरकार के आदेश अनुसार नई नियुक्तियां की जा रही हैं। पहले के मुकाबले अब यह समस्या घटी है। उम्मीद है कि जल्द और नियुक्तियों से जुड़े आदेश जारी होंगे ताकि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके। I
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सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग
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कई अध्यापक हो रहे सेवानिवृत्त, विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर
वर्तमान में करीब 150 पद चल रहे हैं खाली, धीरे-धीरे कम हो रही बच्चों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों की कमी से नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू होने से शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। ऐसे में अध्यापकों के लिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारी के अनुसार जिले के प्राथमिक स्कूलों में करीब 150 पद खाली चल रहे हैं। बीते कुछ माह से नई नियुक्तियां हुई हैं लेकिन यह काफी नहीं हैं। अभी कई स्कूल ऐसे हैं, जहां दो अध्यापकों के सिर पर प्री नर्सरी सहित आठ कक्षाओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में अध्यापकों के लिए व्यवस्था संचालन से लेकर, कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाना काफी मुश्किल हो रहा है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा, महासचिव सत्येंद्र मिन्हास सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि अगस्त तक 200 से अधिक पद खाली चल रहे थे। स्कूलों में बच्चों की नियमित कक्षाएं लगाना मुश्किल हो रहा था। कई स्कूलों में नई नियुक्तियां हुई हैं, कई अभी राहत के इंतजार में हैं।
सुविधाओं का नहीं हो रहा इस्तेमाल
जिले के प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसका कारण अध्यापकों की कमी है। कई स्कूलों में तो ग्राम पंचायत और एसएमसी के सहयोग से अपने स्तर पर अध्यापक स्कूलों में रखे गए हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई पर असर न हो। आवश्यकता के अनुरूप अध्यापक न होने से बच्चों को उन सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा, जो स्कूल में मौजूद हैं। वहीं खेलों के क्षेत्र में भी बच्चे पिछड़ रहे हैं।
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कोट्स
Iसरकार के आदेश अनुसार नई नियुक्तियां की जा रही हैं। पहले के मुकाबले अब यह समस्या घटी है। उम्मीद है कि जल्द और नियुक्तियों से जुड़े आदेश जारी होंगे ताकि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके। I
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सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग