सेल्फ फाइनांस प्राध्यापकों के लिए बने नीति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश सेल्फ फाइनांस प्राध्यापक यूनियन ने प्रदेश के कॉलेजों में सेल्फ फाइनांस के तहत तैनात प्राध्यापकों को नियमित किए जाने की मांग उठाई है। इसके अलावा प्राध्यापकों के लिए सरकार से विशेष स्थायी नीति बनाने की वकालत की है, जिससे इस वर्ग को राहत मिल सके। हिमाचल प्रदेश सेल्फ फाइनांस प्राध्यापक यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल वर्मा, एचके ठाकुर, वरुण, रेखा, अनुभव, विजय, पंकज, साहिल, सचिन, गुरजीत, सोनिका, उपासना, रजनी सहित अन्यों ने कहा कि प्रदेश भर के कॉलेजों में शिक्षा की अलख जगाने में प्राध्यापक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पिछले लंबे अरसे से प्राध्यापक अनुबंध के आधार पर कॉलेजों में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेल्फ फाइनांस से जुड़े कोर्सिज एमबीए, एमसीए, बीसीए, बीबीए, पीजीडीसीए सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्सिज के विद्यार्थियों को अन्य प्राध्यापकों की तर्ज पर सेवा दी जा रही है लेकिन इन प्राध्यापकों को सेल्फ फाइनांस के माध्यम से ही मानदेय दिया जा रहा है। आज दिन तक इस वर्ग की आवाज सुनने वाला कोई नहीं आया। प्रदेश सरकार भी इस वर्ग की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है। प्रदेश में लगभग तीन सौ से अधिक प्राध्यापक मौजूदा समय में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में कम वेतन में प्राध्यापकों का अपना और अपने परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि मामले को कई बार सरकार के ध्यान में लाया जा चुका है लेकिन आज दिन तक कोई उचित कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है, जिससे यह वर्ग मायूस है। यूनियन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सरकार इस वर्ग की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र उचित कार्रवाई अमल में लाए और वर्ग विशेष को न्याय प्रदान करे।