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केवल दर्शन के लिए ही खुल सकेंगे धार्मिक स्थान: डीसी
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ऊना। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपायुक्त राघव शर्मा ने जिले के सभी धार्मिक स्थानों के प्रबंधक, प्रबंधन कमेटी, पुजारियों को श्रद्धालुओं की भीड़ पर नियंत्रण के आदेश दिए हैं। सभी धार्मिक स्थान केवल दर्शन के लिए ही खुल सकेंगे।
डीसी ने कहा कि जिले में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। कोराना मामलों में वृद्धि दर को रोकने के लिए सावन के महीने और एकादशी के अवसर पर सभी धार्मिक स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ पर नियंत्रण रखना होगा। सभी धार्मिक स्थानों पर मास्क, सामाजिक दूरी, सैनिटाइजर का उपयोग और कोविड-19 उचित व्यवहार संबंधित शर्तों की अनुपालना सुनिश्चित करें। शर्तों की अनुपालना के लिए आप अपने स्तर पर सेवादारों की व्यवस्था करें। आयोजन के लिए संबंधित उपमंडलाधिकारी की अनुमति से आंतरिक निर्मित भवन अथवा बंद हॉल की 50 प्रतिशत क्षमता या अधिकतम 200 व्यक्ति तक उपस्थित रह सकेंगे।
ऐसे सभी स्थानों पर फेस मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर का उपयोग करना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि खुले स्थान या मैदान की 50 प्रतिशत क्षमता की अधिकतम सीमा तक व्यक्ति उपस्थित रह सकेंगे। कीर्तन, भजन, जागरण, जगराता और भंडारे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेंगे। आदेशों का उल्लंघन दंडनीय अपराध होगा। सभी उपमंडलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 60 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होंगे।
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डीसी ने कहा कि जिले में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। कोराना मामलों में वृद्धि दर को रोकने के लिए सावन के महीने और एकादशी के अवसर पर सभी धार्मिक स्थानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ पर नियंत्रण रखना होगा। सभी धार्मिक स्थानों पर मास्क, सामाजिक दूरी, सैनिटाइजर का उपयोग और कोविड-19 उचित व्यवहार संबंधित शर्तों की अनुपालना सुनिश्चित करें। शर्तों की अनुपालना के लिए आप अपने स्तर पर सेवादारों की व्यवस्था करें। आयोजन के लिए संबंधित उपमंडलाधिकारी की अनुमति से आंतरिक निर्मित भवन अथवा बंद हॉल की 50 प्रतिशत क्षमता या अधिकतम 200 व्यक्ति तक उपस्थित रह सकेंगे।
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ऐसे सभी स्थानों पर फेस मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर का उपयोग करना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि खुले स्थान या मैदान की 50 प्रतिशत क्षमता की अधिकतम सीमा तक व्यक्ति उपस्थित रह सकेंगे। कीर्तन, भजन, जागरण, जगराता और भंडारे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेंगे। आदेशों का उल्लंघन दंडनीय अपराध होगा। सभी उपमंडलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 60 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होंगे।
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