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Una News: स्कूलों में पंजाबी विषय के 37 में से 22 अध्यापकों के पद खाली

Tue, 23 Apr 2024 02:01 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 23 Apr 2024 02:01 AM IST
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Posts of 22 out of 37 teachers of Punjabi subject are vacant in schools.
13 वर्षों से पंजाबी विषय के अध्यापक की नहीं हुई कोई नियुक्ति
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सीमावर्ती इलाकों के विद्यार्थियों में है पंजाबी विषय को लेकर अधिक रुझान
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। जिले के स्कूलों में पंजाबी विषय की पढ़ाई जुगाड़ के सहारे ही चल रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के 37 स्कूलों में विद्यार्थियों को पंजाबी विषय पढ़ाया जाता है। पंजाब के साथ लगते क्षेत्र के युवाओं के लिए पंजाबी अनिवार्य होती है। 22 स्कूलों में पंजाबी अध्यापकों के पद खाली चले आ रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि 13 वर्ष से किसी भी पंजाबी अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्र की भाषा पंजाब से मिलती-जुलती है। इसको देखते हुए यहां 45 स्कूल में पंजाबी विषय पढ़ाया जा रहा है। कुछ स्कूलों में जहां बच्चे पंजाबी पढ़ना चाहते हैं, वहां कोई दूसरा अध्यापक जो पंजाबी जानता है, वही काम चला रहा है। विद्यार्थी और अभिभावक चाहते हैं कि पंजाबी भाषा का ज्ञान दिया जाए। जिला में पंजाबी अध्यापकों के लिए केवल 37 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 15 अध्यापक ही सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 22 पद खाली हैं। ऐसी स्थिति में स्कूलों के दूसरे शिक्षक विद्यार्थियों को पंजाबी विषय की पढ़ाई करवाने को मजबूर हैं।
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ध्यान रहे की छठी से आठवीं कक्षा तक पंजाबी विषय ड्राइंग के साथ वैकल्पिक है। नौवीं से दसवीं तक पंजाबी के मुकाबले विकल्प में संस्कृत विषय है। कई विद्यालयों में पंजाबी अध्यापकों का पद सृजत ही नहीं है, लेकिन बच्चे पंजाबी पढ़ रहे हैं। हरोली विस क्षेत्र में 15 ऐसे स्कूल हैं। जहां पंजाबी अध्यापक के पद सृजत हैं, लेकिन जहां पढ़ने वाला बच्चा ही कोई नहीं, कुछ अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधानों ने यह मांग की है कि जहां विद्यार्थी पंजाबी पढ़ना चाहते हैं, वहां पर पद सृजित किए जाएं। स्कूल प्रबंधन कमेटियों में से ममता देवी, तरसेम लाल, सुशील कुमार, ज्ञान चंद, हरित देवी ने भी पंजाबी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अध्यापकों की तैनाती करने की सरकार से मांग की है।
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वहीं, पंजाबी अध्यापक संगठन के जिला प्रधान जयंत सिंह का कहना है कि जिस विद्यालय में 10 बच्चे पंजाबी पढ़ना चाहते हैं। प्रशासन वहां पंजाबी अध्यापकों के पद सृजित करके अध्यापकों की नियुक्ति करे। 15 विद्यालयों में पद सृजित हैं, वहां पंजाबी पढ़ने वाला कोई बच्चा नहीं। जहां पढ़ने वाले बच्चे हैं, वह पद वहां तब्दील कर दिए जाएं। विभाग विद्यालयों से आंकड़े मंगवाकर उन पदों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाए।



कोट्स



पंजाबी विषय के अध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला संज्ञान में आया है। सभी विद्यालयों से खाली पदों की जानकारी मंगवाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। विद्यार्थियों के हित में फैसला आने पर उसे तुरंत लागू किया जाएगा।



देवेंद्र चंदेल, उपशिक्षा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, ऊना
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