फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   Plans made on animal roads a formality

Una News: पशु सड़कों पर, औपचारिकता बनीं योजनाएं

Tue, 28 Jan 2025 07:31 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 28 Jan 2025 07:31 AM IST
विज्ञापन
Plans made on animal roads a formality
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह। स्रोत संवाद
लावारिस पशुओं की समस्या पर अभियान
विज्ञापन


धरातल पर लगातार बढ़ रहे आवारा पशु, हो रहे सड़क हादसे, किसानों की फसलें बर्बाद
गंभीर मुद्दा होने के बावजूद प्रशासन और सरकार नहीं दे रहा ध्यान

हर पांच साल बाद पशुपालन विभाग करता है गणना

बेसहारा पशुओं की समस्या पर रोकथाम गणना का मुख्य उद्देश्य





संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस समस्या से चलते हो रहे सड़क हादसों में कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं। हैरत की बाद है कि इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद इस ओर कई सालों से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। मात्र हर पांच साल बाद पशुओं की गणना करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस गणना के मुख्य उद्देश्यों में बेसहारा पशुओं की समस्या पर रोकथाम लाना भी शामिल है, लेकिन चिंताजनक है कि सड़कों पर जहां बेसहारा पशु गंभीर हादसों का कारण बन रहे तो वहीं किसान की फसलें भी तबाह हो रही हैं।

जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग ने बीते वर्ष अक्तूबर माह से पशुओं की गणना का अभियान शुरु किया। इसमें 50 प्रतिशत अभियान पूरा हो चुका है, जबकि 15 फरवरी माह के बाद बेसहारा पशुओं की गिनती होगी। गणना के बाद ऐसे पशुओं की समस्या के हल को लेकर रणनीति तैयार करने की बात भी कही जा रही, लेकिन यह गणना साल 2019 में भी हुई थी। चिंताजनक है कि उसके बाद समस्या बढ़ी है, घटी नहीं। जिला का गगरेट और कुटलैहड़ का मैदानी क्षेत्र बेसहारा पशुओं की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है। ऊना से गगरेट की ओर जाते समय हरोली विधानसभा खत्म होते ही गगरेट का गुगलैहड़ गांव आता है। वहीं से बेसहारा पशु सड़कों के आसपास दिखने शुरू हो जाते हैं। गुगैलहड़ से गगरेट करीब 15 किमी लंबे सड़क मार्ग पर बेसहारा पशुओं की भरमार है। इस मार्ग पर कई हादसे हो चुके। इनमें लोगों की मौत तक हो गई। वहीं पूरे क्षेत्र में फसलें तैयार करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती बेसहारा पशु हैं। यही स्थिति कुटलैहड़ के मैदानी इलाके नारी, चलोला, बडसाला, बसाल सहित अन्य गांवों में है।
विज्ञापन


बॉक्स

विधानसभा में उठाया था मुद्दाः चैतन्य शर्मा

पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा ने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या विशेषकर गगरेट इलाके के लिए बेहद गंभीर मुद्दा है। उन्होंने विधायक रहते समय इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया। जिसपर सरकार का जवाब आया कि कांगड़ा में गो अभ्यारण्य बनाने की परियोजना है। इसके बाद समस्या का हल होगा। कहा कि अभी तक उस परियोजना पर कोई कदम उठाए नजर नहीं आते।
विज्ञापन
विज्ञापन


---

नगर पंचायत गगरेट के अध्यक्ष अनिल जसवाल ने कहा कि बेसहारा पशुओं की इलाके में समस्या बेहद गंभीर है। इसके समाधान को लेकर कई संस्थाओं ने भरसक प्रयास कर लिए, लेकिन हालात जस के तस हैं। कहा कि नगर पंचायत में भी पदाधिकारियों की ओर से इस मुद्दे को कम उठाया जाता है। कहा कि इस समस्या के समाधान को सरकार व प्रशासन को ही ठोस कदम उठाना होगा।


---

भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर चमेल सिंह ने कहा कि आवारा पशुओं के कारण कई इलाके में खेत खलिहान सूने पड़े हुए हैं। कहा कि समस्या का समाधान सरकार और प्रशासन को करना होगा। हालांकि इसके लिए पूरे समाज को आगे आना चाहिए। कहा कि आवारा पशु छोड़ने वाले लोगों को 1000 रुपये तक जुर्माना मात्र है। अगर कोई पकड़ी भी जाए तो पशु दोबारा लेने से जुर्माना देना बेहतर समझता है। कहा कि प्रति पशु जुर्माना राशि 10000 रुपये तक होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed