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Una News: पूरी रात संघर्ष कर लोगों ने बचाए अपने आशियाने, एक पशुशाला राख
Fri, 29 May 2026 12:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 29 May 2026 12:21 AM IST
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बंगाणा (ऊना)। बंगाणा क्षेत्र के गांव हरोट में जंगल में लगी आग ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। तेज हवाओं के चलते जंगल की आग मंगलवार देर शाम रिहायशी क्षेत्र तक पहुंच गई, जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया। आग की लपटों के बीच दो परिवारों ने पूरी रात जागकर अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष किया। इसके बावजूद एक पशुशाला आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार आग तेजी से फैलती हुई घरों के बेहद करीब पहुंच गई थी। ऐसे में परिवारों ने बिना समय गंवाए बाल्टियों, पाइपों और पेड़ों की टहनियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। पूरी रात परिवारों के सदस्य और ग्रामीण आग पर काबू पाने में जुटे रहे और अपने रिहायशी मकानों को आग की लपटों से बचा लिया।
घटना की सूचना तुरंत अग्निशमन विभाग, पुलिस और वन विभाग को दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 24 घंटे तक मौके पर कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। इससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। पीड़ित परिवार से रशपाल और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने वाले रास्ते पहाड़ी और संकरे हैं, जिसके कारण अग्निशमन विभाग की बड़ी गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग के पास छोटे अग्निशमन वाहन उपलब्ध होते तो राहत कार्य आसानी से किया जा सकता था।
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ग्रामीणों के अनुसार आग तेजी से फैलती हुई घरों के बेहद करीब पहुंच गई थी। ऐसे में परिवारों ने बिना समय गंवाए बाल्टियों, पाइपों और पेड़ों की टहनियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। पूरी रात परिवारों के सदस्य और ग्रामीण आग पर काबू पाने में जुटे रहे और अपने रिहायशी मकानों को आग की लपटों से बचा लिया।
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घटना की सूचना तुरंत अग्निशमन विभाग, पुलिस और वन विभाग को दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 24 घंटे तक मौके पर कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। इससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। पीड़ित परिवार से रशपाल और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने वाले रास्ते पहाड़ी और संकरे हैं, जिसके कारण अग्निशमन विभाग की बड़ी गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग के पास छोटे अग्निशमन वाहन उपलब्ध होते तो राहत कार्य आसानी से किया जा सकता था।
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